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अयोध्या फैसला: यहां एक ही परिसर में है मंदिर और मस्जिद, आपसी सौहार्द की मिसाल डेहरियावां के धर्मस्थल
Sat, 09 Nov 2019 08:55 AM IST
शाहरुख खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 09 Nov 2019 08:55 AM IST
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एक ही परिसर में है मंदिर और मस्जिद
- फोटो : अमर उजाला
आओ मिलकर एक ऐसा देश बनाया जाए मंदिर में अगर दीया जले तो मस्जिद तक उजाला जाए। ये लाइनें बीकापुर के डेहरियावां गांव की गंगा-जमुनी तहजीब पर सटीक बैठती हैं। यहां हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोगों के लिए हमेशा सद्भावना की बयार बहती है। यहां के लोगों का मानना है अयोध्या विवाद में कोर्ट का कोई भी फैसला आए सभी को उसे मानना चाहिए।
आपसी भाईचारा और सद्भाव नहीं बिगड़ना चाहिए। अमन चैन बिगाड़ने वालों को यह गांव हमेशा भाईचारे का संदेश देता रहा है। एक ही परिसर में अगल-बगल मंदिर और मस्जिद आपसे भाईचारा और सौहार्द की मिसाल कायम करती है। परिसर से आरती व अजान के स्वर एक साथ सुनाई देते हैं। गांव में ईद के मौके पर हिंदू लोग मुस्लिमों के यहां सेवइयां खाते हैं। तो रामायण व अन्य मांगलिक कार्यक्रमों में मुसलमान भाई भी पहुंचकर भंडारे में हिस्सा लेते हैं।
तहसील मुख्यालय से 15 किमी दूर खजुरहट-मिल्कीपुर मार्ग पर स्थित डेहरियावां गांव में अद्भुत नजारा प्रत्येक दिन सुबह शाम देखने को मिलता है। यहां के ग्रामीणों में मानवता और इंसानियत अन्य कहीं विरले ही दिखाई पड़ेगी। लगभग तीन हजार आबादी वाले इस गांव में एक ही परिसर में मंदिर और मस्जिद स्थापित है।
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हिंदू और मुस्लिम दोनों मिलकर यहां सफाई करने से लेकर पूजा इबादत में एक दूसरे का सहयोग करते हैं। जुम्मे तथा ईद के विशेष अवसर पर मंदिर परिसर तक नमाज अदा की जाती है। तो भंडारे के लिए मस्जिद परिसर का भी इस्तेमाल करने में कोई गुरेज नहीं होता। परिसर में लगे हैंडपंप से दोनों समुदाय के लोग पानी भरते हैं ।
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आपसी भाईचारा और सद्भाव नहीं बिगड़ना चाहिए। अमन चैन बिगाड़ने वालों को यह गांव हमेशा भाईचारे का संदेश देता रहा है। एक ही परिसर में अगल-बगल मंदिर और मस्जिद आपसे भाईचारा और सौहार्द की मिसाल कायम करती है। परिसर से आरती व अजान के स्वर एक साथ सुनाई देते हैं। गांव में ईद के मौके पर हिंदू लोग मुस्लिमों के यहां सेवइयां खाते हैं। तो रामायण व अन्य मांगलिक कार्यक्रमों में मुसलमान भाई भी पहुंचकर भंडारे में हिस्सा लेते हैं।
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तहसील मुख्यालय से 15 किमी दूर खजुरहट-मिल्कीपुर मार्ग पर स्थित डेहरियावां गांव में अद्भुत नजारा प्रत्येक दिन सुबह शाम देखने को मिलता है। यहां के ग्रामीणों में मानवता और इंसानियत अन्य कहीं विरले ही दिखाई पड़ेगी। लगभग तीन हजार आबादी वाले इस गांव में एक ही परिसर में मंदिर और मस्जिद स्थापित है।
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हिंदू और मुस्लिम दोनों मिलकर यहां सफाई करने से लेकर पूजा इबादत में एक दूसरे का सहयोग करते हैं। जुम्मे तथा ईद के विशेष अवसर पर मंदिर परिसर तक नमाज अदा की जाती है। तो भंडारे के लिए मस्जिद परिसर का भी इस्तेमाल करने में कोई गुरेज नहीं होता। परिसर में लगे हैंडपंप से दोनों समुदाय के लोग पानी भरते हैं ।
दोनों ही धर्म के बुजुर्ग बताते हैं कि सन 1971 में स्वर्गीय हैदर मेहंदी सिद्दीकी की अगुवाई में मस्जिद का निर्माण हुआ तो सन 1972 में स्वर्गीय सुरेंद्र तिवारी और स्व. हरिप्रसाद तिवारी के नेतृत्व में क्षेत्रवासियों के सहयोग से हनुमान मंदिर का निर्माण कराया गया। तब से यहां भाईचारा की एक अद्भुत मिसाल कायम है।
मंदिर की देखरेख पुजारी अयोध्या प्रसाद यादव और उनके परिवारीजन करते हैं। वह कहते हैं कि जब से होश संभाला है तबसे मंदिर और मस्जिद देख रहा हूं। कभी कोई विवाद की स्थिति नहीं उत्पन्न हुई। दोनों धर्मों के लोग अपने अपने तरीके से इन धर्म स्थलों में पूजा और इबादत करते हैं ।
यहां संप्रदायिक सद्भाव बिगाडने की बात तो दूर धर्म को लेकर किसी से वाद विवाद तक नहीं होता। दोनों समुदायों के लोग एक दूसरे का सम्मान करते हैं मस्जिद में नमाज पढने आए सेना से रिटायर्ड फौजी नबी अहमद, तनवीर अहमद सिद्दीकी, मो. नसीम, खलील उल्ला सिद्दीकी, वसीर रजा आदि ने बताया कि आपसी भाई चारा सौहार्द बिगाड़ने वालों को यहां से सीख लेनी चाहिए। बाहरी दुनिया में क्या होता है हमें भी भली भांति मालूम है। लेकिन यहां माहौल बिगड़ने न पाए इसका भी विशेष ध्यान सदैव रखा जाता है।
मंदिर की देखरेख पुजारी अयोध्या प्रसाद यादव और उनके परिवारीजन करते हैं। वह कहते हैं कि जब से होश संभाला है तबसे मंदिर और मस्जिद देख रहा हूं। कभी कोई विवाद की स्थिति नहीं उत्पन्न हुई। दोनों धर्मों के लोग अपने अपने तरीके से इन धर्म स्थलों में पूजा और इबादत करते हैं ।
यहां संप्रदायिक सद्भाव बिगाडने की बात तो दूर धर्म को लेकर किसी से वाद विवाद तक नहीं होता। दोनों समुदायों के लोग एक दूसरे का सम्मान करते हैं मस्जिद में नमाज पढने आए सेना से रिटायर्ड फौजी नबी अहमद, तनवीर अहमद सिद्दीकी, मो. नसीम, खलील उल्ला सिद्दीकी, वसीर रजा आदि ने बताया कि आपसी भाई चारा सौहार्द बिगाड़ने वालों को यहां से सीख लेनी चाहिए। बाहरी दुनिया में क्या होता है हमें भी भली भांति मालूम है। लेकिन यहां माहौल बिगड़ने न पाए इसका भी विशेष ध्यान सदैव रखा जाता है।
डेहरियावां के ग्राम प्रधान स्वदेश तिवारी व गांव के ही युवा देवकांत तिवारी ने बताया कि हनुमान जी के मंदिर पर हनुमान जयंती पर रामायण पाठ तथा भंडारे का भव्य आयोजन भी होता है। इसमें दोनों समुदायों के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।
क्षेत्र के बंटी कसौंधन, रमेश यादव, सर्वेश तिवारी, राजबहादुर यादव, समरजीत यादव, ललित तिवारी, अब्दुल्ला, जुल्फिकार अहमद, देव नारायण यादव आदि ने कहा कि हमारे धर्म भले ही अलग-अलग हो लेकिन ईश्वर की आराधना करने का रास्ता एक ही है। हम सभी आपसी भाईचारे व प्रेम से अपने अपने इष्ट देव की पूजा अर्चना और जियारत करते हैं। यहां कभी सांप्रदायिक तनाव जैसी स्थिति नहीं आई।
क्षेत्र के बंटी कसौंधन, रमेश यादव, सर्वेश तिवारी, राजबहादुर यादव, समरजीत यादव, ललित तिवारी, अब्दुल्ला, जुल्फिकार अहमद, देव नारायण यादव आदि ने कहा कि हमारे धर्म भले ही अलग-अलग हो लेकिन ईश्वर की आराधना करने का रास्ता एक ही है। हम सभी आपसी भाईचारे व प्रेम से अपने अपने इष्ट देव की पूजा अर्चना और जियारत करते हैं। यहां कभी सांप्रदायिक तनाव जैसी स्थिति नहीं आई।