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अयोध्या: पुराने दिग्गज इस बार नदारद, अज्ञातवास में विनय कटियार तो गठबंधन ने किया निर्मल खत्री को उपेक्षित!
Mon, 22 Apr 2024 06:22 AM IST
रोहित मिश्र
आदर्श शुक्ल, अमर उजाला, अयोध्या
आदर्श शुक्ल, अमर उजाला, अयोध्या
Published by: रोहित मिश्र
Updated Mon, 22 Apr 2024 06:22 AM IST
सार
अयोध्या की रणभूमि में इस बार पुराने दिग्गज नहीं दिख रहे हैं। कभी फायरब्रांड नेता रहे विनय कटियार तो करीब-करीब अज्ञातवास में हैं। प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भी उनकी मौजूदगी नहीं दिखी थी।
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इन चुनावों में विनय कटियार की कोई भूमिका नहीं दिख रही है।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
कभी चुनाव मैदान में कप्तान की भूमिका में रहे राजनीति के दिग्गज इस बार लोकसभा चुनाव के दौरान दर्शक दीर्घा में आराम कर रहे हैं। पूर्व सांसद विनय कटियार, पूर्व सांसद निर्मल खत्री और पूर्व विधायक जितेंद्र सिंह बबलू जैसे दिग्गज इस बार अयोध्या के रण से नदारद हैं। ऐसे में इनके समर्थक असमंजस में हैं।
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पहले बात शुरू करते हैं भाजपा के वरिष्ठ नेता विनय कटियार की। एक समय अयोध्या की राजनीति की धूरी रहे कटियार आजकल अज्ञातवास में हैं। विश्व हिंदू परिषद की युवा शाखा बजरंग दल के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में उन्हें देश भर में अलग पहचान मिली। राममंदिर आंदोलन के समय कटियार फायर ब्रांड नेता के तौर पर चर्चित हुए। भाजपा में उन्होंने राष्ट्रीय महासचिव तक का दायित्व संभाला। वर्ष 1991 व 1999 में वे दो बार फैजाबाद संसदीय क्षेत्र से चुने भी गए।
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पार्टी में उनके योगदान और बड़े कद को देखते हुए वर्ष 2012 व 2018 में दो बार राज्यसभा में भेजा गया। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव तक कटियार अयोध्या की राजनीति में सक्रिय रहे। उन्होंने इस विधानसभा चुनाव में रुदौली के पार्टी प्रत्याशी रामचंद्र यादव के समर्थन में चुनावी सभाएं भी कीं। इसके बाद से वे राजनीति से कटते गए। इस आम चुनाव में अभी तक भाजपा की ओर से उनकी कोई भूमिका तय नहीं की गई है।
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इसी तरह कांग्रेस के कद्दावर नेता निर्मल खत्री भी इस बार पर्दे के पीछे हैं। गठबंधन में फैजाबाद सीट सपा के हिस्से में चली गई। सपा ने यहां से अवधेश प्रसाद को चुनाव मैदान में उतारा है। निर्मल पहली बार वर्ष 1980 में यहां से विधायक चुने गए। इसके बाद वर्ष 1984 व 2009 में सांसद निर्वाचित हुए। वर्ष 2012 से 2016 तक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे। उन्होंने वर्ष 2014 का लोकसभा चुनाव कांग्रेस से लड़ा और 1,29,917 वोट पाकर चौथे स्थान पर रहे। वर्ष 2019 के चुनाव में 53,386 मत पाकर तीसरे स्थान पर थे। इस चुनाव में कांग्रेस का सपा से गठबंधन है और निर्मल चुनाव मैदान से बाहर हैं।
कभी बसपा सुप्रीमो मायावती के करीबी नेताओं में शुमार जितेंद्र सिंह बबलू इस लोकसभा चुनाव में राजनीति से दूरी बनाए हुए हैं। बबलू वर्ष 2007 में बसपा के टिकट पर बीकापुर से विधायक चुने गए थे। वर्ष 2014 में बसपा से ही लोकसभा चुनाव लड़े और 1,41,827 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे। तब कांग्रेस यहां चौथे स्थान पर सिमट गई थी। वर्ष 2021 में पूर्व विधायक भाजपा में शामिल हो गए। यह अलग बात रही कि वर्ष 2009 में तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी का घर जलाने के आरोप में घिरे बबलू की सदस्यता बाद में निरस्त कर दी गई। वर्ष 2022 में निषाद पार्टी का दामन थामा। इसके बाद से वे राजनीति के रण मे दिखाई नहीं दे रहे हैं।