{"_id":"63d8b1e97be31b1c8820a162","slug":"ayodhya-news-former-ips-claims-the-meaning-of-manas-s-chaupai-has-changed-in-130-years-2023-01-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ayodhya News : पूर्व आईपीएस का दावा, 130 सालों में बदल गया मानस की चौपाई का अर्थ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ayodhya News : पूर्व आईपीएस का दावा, 130 सालों में बदल गया मानस की चौपाई का अर्थ
Tue, 31 Jan 2023 11:45 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Tue, 31 Jan 2023 11:45 AM IST
सार
किशोर कुणाल का कहना है कि हाल में, रामचरितमानस कर कुछ पंक्तियों पर मानस का मर्म नहीं समझने वाले अल्पज्ञों द्वारा आक्षेप किए जा रहे हैं। ढोल गंवार सूद्र पसु नारी...ऐसी ही एक पंक्ति है, जिस पर विवाद होता रहा है।
विज्ञापन
रामचरितमानस
- फोटो : अमर उजाला।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
रामचरितमानस की जिस चौपाई को लेकर इस समय विवाद खड़ा हुआ है, उसके साथ छेड़छाड़ की गई है। यह दावा सोमवार को अयोध्या पर गहन शोध करने वाले पूर्व आईपीएस किशोर कुणाल ने किया है। उन्होंने अपने शोध के आधार पर दावा किया है कि 130 सालों मानस की चौपाई का अर्थ बदल गया। 1890 से पहले मानस की सही चौपाई प्रचलित थी, लेकिन इसके बाद चौपाई से छेड़छाड़ की गई।
विज्ञापन
किशोर कुणाल का कहना है कि हाल में, रामचरितमानस कर कुछ पंक्तियों पर मानस का मर्म नहीं समझने वाले अल्पज्ञों द्वारा आक्षेप किए जा रहे हैं। ढोल गंवार सूद्र पसु नारी...ऐसी ही एक पंक्ति है, जिस पर विवाद होता रहा है।
विज्ञापन
शोध के अनुसार उनका दावा है कि 1810 में कोलकाता के विलियम फोर्ट से पंडित सदल मिश्र द्वारा संपादित रामचरित मानस छपा था उसमें यह चौपाई ढोल, गंवार, क्षुद्र, पशु नारी... छपा था। 1830 में कोलकाता के एसिएटिक लिथा कंपनी से हिंदी एंड हिंदुस्तानी सेलेक्शन्स..नाम से एक पुस्तक छपी थी जिसमें श्रीरामचरित मानस का पूरा सुंदरकांड पाठ छपा है। इसमें भी ढोल, गंवार, क्षुद्र, पशु नारी..ही है। इसी तरह कई ऐसी पुस्तकों व ग्रंथों में ढोल, गंवार, क्षुद्र, पशु व नारी..ही लिखा गया है।
विज्ञापन