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कैसे होगा राम मंदिर का निर्माण, कैसी होगी तकनीक, क्या हैं दिक्कतें, जानिए हर अपडेट

Sat, 19 Dec 2020 05:40 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sat, 19 Dec 2020 05:40 PM IST
सार

अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बने ये हर रामभक्त की चाहत है। इस दिशा में प्रयास शुरू हो चुके हैं। मंदिर के लिए राम मंदिर निर्माण समिति की कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। हालांकि, तकनीकी दिक्कतों के कारण नींव के निर्माण में चुनौतियां आ रही हैं। समिति तकनीकी टीम से लगातार इस पर चर्चा कर रही है। आइए जानते हैं राम मंदिर निर्माण से संबंधित अब तक के अपडेट...

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Ayodhya: Know every update related to the construction of Ram mandir.
राम मंदिर की बुनियाद के लिए खुदाई का कार्य - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दरअसल, जमीन के नीचे भुरभुरी बालू ने विशेषज्ञों के समक्ष चुनौती खड़ी कर दी है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बालू की परत के चलते पाइल टेस्टिंग के दौरान बनाए गए पिलर 2 से 3 इंच खिसक गए थे। जिसके बाद राममंदिर के नींव के नक्शे को लेकर मंथन जारी है। बताया जा रहा है कि मंदिर की मजबूती के लिए विशेषज्ञ जिस तरह से डैम (बांध) की दीवार बनती है उस विधि का इस्तेमाल नींव के निर्माण में कर सकते हैं जिससे कि मंदिर लंबे समय तक सुरक्षित बना रहे। निर्माण में इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि अगर भविष्य में सरयू नदी अपना रास्ता बदलती है तो भी इसका असर मंदिर की नींव पर न पड़े। दरअसल, शोध में पाया गया कि सरयू नदी अब तक पांच बार अपनी दिशा बदल चुकी है।

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बुनियाद में मिल रही बालू
सरयू नदी के किनारे होने के कारण बुनियाद में मिल रही बालू के कारण मंदिर की मजबूती को लेकर सवाल पैदा हो रहे हैं। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए 1200 स्तंभों का निर्माण किया जाना है। इसके पहले टेस्टिंग के लिए 12 पिलर का निर्माण किया गया है, लेकिन टेस्टिंग के दौरान जब इस पर भार डाला गया तो कुछ पिलर जमीन के निचले हिस्से में खिसक गए।
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सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, 15 दिसंबर को दिल्ली में हुई बैठक में यह तय हुआ है कि अब नए सिरे से राममंदिर की नींव की डिजाइन तैयार की जाएगी। इसके लिए आठ सदस्यीय कमेटी भी गठित की गई है। बताया गया कि एक हफ्ते पहले अयोध्या में हुई मंदिर निर्माण समिति की बैठक में मंदिर स्थल के 200 फीट नीचे मिली बालू की लेयर को लेकर मुद्दा उठा था। राम मंदिर की नींव की सतह पीली मिट्टी की न होकर रेत की मिली है। ऐसे में पाइलिंग टेस्ट और लोड टेस्ट के बाद काफी रिसर्च करनी पड़ रही है।

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कमेटी की रिपोर्ट पर ही नए सिरे से नींव की शुरुआत होगी

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राम मंदिर निर्माण के लिए अयोध्या पहुंचीं एलएनटी की बड़ी-बड़ी मशीनें - फोटो : अमर उजाला

आईआईटी दिल्ली के पूर्व निदेशक वीएस राजू की अध्यक्षता में गठित 8 टॉप इंजीनियर और कंस्ट्रक्शन एक्सपर्ट मंदिर की नींव से जुड़े कामों पर नजर बनाए हुए हैं। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सूत्रों के अनुसार इंजीनियर की कमेटी की रिपोर्ट पर ही नए सिरे से नींव की शुरुआत होगी। एक्सपर्ट की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जाएगी। यह रिपोर्ट मंदिर निर्माण समिति और ट्रस्ट के बीच रहेगी।

नींव में इस्तेमाल किए जा सकते हैं भारी पत्थर
मंदिर स्थल के नीचे मिली बालू को देखते हुए कहा जा रहा है कि मंदिर नींव में भारी पत्थरों का इस्तेमाल हो सकता है। जो सैकड़ों वर्ष तक सुरक्षित रहते हैं और जमीन के नीचे रहने पर भी उनका क्षरण नहीं होता है।

ट्रस्ट व एनजीटी की नजर अहरौरा व चुनार के गुलाबी पत्थरों पर

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राम मंदिर की प्रस्तावित तस्वीर - फोटो : पीएमओ

मिर्जापुर के गुलाबी पत्थरों की गुणवत्ता और सुंदरता को देखते हुए श्रीराम मंदिर में इसका इस्तेमाल हो सकता है। राजस्थान के बंसी पहाड़पुर के गुलाबी पत्थरों की खदानों से निकलने वाले उप खनिजों पर भरतपुर जिला प्रशासन की रोक के बाद श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट तथा नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) की नजर मिर्जापुर के अहरौरा व चुनार के गुलाबी पत्थरों पर है।

इन पत्थरों के नमूने परीक्षण के लिए प्रयोगशाला में भेजे गए हैं। गुणवत्ता का वैज्ञानिक परीक्षण होने के बाद यहां के पत्थरों के मंदिर निर्माण में इस्तेमाल किए जाने की उम्मीद जताई जा रही है। मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट को साढ़े चार लाख घन फीट से भी ज्यादा गुलाबी पत्थरों की आवश्यकता है।

एनजीटी की टीम खनन इलाके के पत्थर कटर प्लांट के व्यवसायियों से मुलाकात भी की है। इसके पूर्व भी मंदिर निर्माण ट्रस्ट की ओर से पत्थरों के नमूने लिए गए थे। पत्थरों की दर के अनुसार, इस पर तकरीबन 40 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। कारोबार से जुड़े लोगों के अनुसार मंदिर की 60 मीटर गहरी नींव की ऊपरी सतह पर 1200 पिलर पायलिंग करके तैयार करने की योजना है। लगभग ढाई एकड़ क्षेत्र में एक लाख पांच हजार 147 वर्गफीट क्षेत्रफल पर पिलर लगाए जाने हैं। एनजीटी तथा निर्माण इकाई से जुड़े ट्रस्ट के लोगों ने बताया कि पत्थर की गुणवत्ता का वैज्ञानिक परीक्षण विशेषज्ञों की टीम कर रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद निर्णय लिया जाएगा।

मजबूती और रंग की वजह से है मांग

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राम मंदिर - फोटो : अमर उजाला

कटर प्लांट संचालकों ने बताया कि अहरौरा के गुलाबी पत्थरों की गुणवत्ता काफी अच्छी रही है। इसका रंग कभी सुंदरता नहीं खोता है। पूर्व में किले की दीवार और महलों के निर्माण में इसका उपयोग किया जाता रहा है। नक्काशी के उभार में भी इन पत्थरों का अपना विशेष महत्व है। इनमें आसानी से नक्काशी की जा सकती है। इन पत्थरों में अत्यधिक भार सहन करने की क्षमता है। भारी दबाव का इन पर कोई असर नहीं होता है। कारोबारियों ने राम मंदिर निर्माण के लिए अहरौरा इलाके से गुलाबी पत्थर की आपूर्ति को गौरव का विषय बताया।

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