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अयोध्या को बजट से काफी उम्मीदें, पर्यटन को मिलेगी दिशा
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अयोध्या। धर्मनगरी के विकास के लिए एक अलग से मॉडल तैयार किया जाना चाहिए। इसमें सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर का ही नहीं, बल्कि सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर की भी महती भूमिका होनी चाहिए। पर्यटन की सुविधाएं, लक्जरी होटल, गाइड, बेहतर रेल सेवा, वायुसेवा की शुरुआत, जल यातायात की सुविधा, अयोध्या की संस्कृति व लोक कला से लिए अलग से फंडिग की व्यवस्था आम बजट में होनी चाहिए। साथ ही पुराने प्रस्तावित योजनाओं के लिए धनराशि का आवंटन व नई योजनाओं की भी घोषणा के साथ तेजी से कार्य होना चाहिए।
यह बातें डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विवि में आम बजट को लेकर अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से अयोजित बजट परिचर्चा के दौरान प्रोफेसरों, प्राध्यापकों व छात्रों ने कही। सभी का मानना है कि अयोध्या का विकास विश्व पटल पर होना चाहिए। अयोध्या का नाम व सम्मान पूरे विश्व में है लेकिन यहां आने के बाद पर्यटक व श्रद्धालु खिन्न हो उठता है। कारण यह है कि यहां सुविधाओं का टोटा है। पर्यटक काशी तक तो जाते हैं लेकिन अयोध्या आना नहीं चाहते। इसका कारण यह है कि आम जनमासन को अयोध्या की संस्कृति व कलाओं से अब तक नहीं जोड़ा जा सका है। इसका विकास सर्वाधिक जरूरी है कि पर्यटक अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत का प्रचार-प्रसार व्यापक पैमाने पर हो।
इस मामले में अर्थशास्त्र विभाग के प्रो. विनोद कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि अयोध्या सत्ता का केंद्र बिंदु वर्षों से रही है लेकिन इसका ग्रोथ लेवल कम रहा है। पर्यटन के क्षेत्र में कोई विशेष विकास नहीं हुआ है। आवश्यकता है कि अयोध्या का इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने के साथ सांस्कृतिक व लोक कलाओं को संरक्षित करने व इसको रोजगार से जोड़ने की जरूरत है। वहीं विभाग के ही डॉ. विनोद कुमार तिवारी ने कहा कि अयोध्या के विकास के लिए बड़े बजट की जरूरत है। यहां संस्कृति का व्यापक प्रचार प्रसार नहीं हो सका है, इस वजह से विदेशी पर्यटकों की आमद न के बराबर है। केंद्र सरकार को चाहिए कि लोकल पर्यटकों के साथ विदेशी पर्यटकों को संपूर्ण सुवधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
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अर्थशास्त्र विभाग की प्राध्यापक डॉ. लता श्रीवास्तव का मनना है कि अयोध्या प्राचीन नगरी होने के बाद भी अभी विकास के मामले में बहुत पीछे है। यहां की मठ-मंदिरों का विकास काशी विश्वनाथ मंदिर की तर्ज पर किया जाना चाहिए। इसके लिए सरकार की ओर से योजना बनाकर नीतिबद्ध ढंग से विकास किए जाने की जरूरत है।
दृश्य कला विभाग की प्राध्यापक डॉ. सरिता द्विवेदी बतातीं है कि अयोध्या की कला व संस्कृति को संरक्षित किए जाने की जरूरत है। बड़े पैमाने पर यहां के कलाकार बरोजगार हैं, ऐसी योजना बजट में हो कि अयोध्या के कला व संस्कृति को संरक्षित किए जाने के साथ रोजगार से जोड़ा जाना चाहिए। यहीं की डॉ. पल्लवी सोनी ने कहा कि अयोध्या प्राख्यात धर्मनगरी है लेकिन यह दूर से ही कहने पर अच्छा लगता है। जब पर्यटक या श्रद्धालु यहंा पहुंचता है तो उनका मन बदल जाता है। कारण जैसी अयोध्या को लेकर लोगों की धारणा है वैसी नहीं मिलती है। प्रत्येक वस्तु को ऐसे डेवलप की जाए जिससे अयोध्या होने का अहसास हो।
इस परिचर्चा में अभिभावक ममता श्रीवास्तव ने कहा कि अयोध्या की सबसे बड़ी समस्या यहां की गंदगी है। पर्यटक या श्रद्धालु सबसे ज्यादा खिन्न यहां की गंदगी से होते हैं। शुक्रवार को पेश होने वाले आम बजट में सबसे अधिक जरूरी यह कि यहां की सफाई व्यवस्था के लिए अलग से बजट जारी किया जाए।
तो विश्वविद्यालय के दृश्य कला विभाग की छात्रा नेहा गुप्ता का मत है कि अयोध्या के विकास के लिए केंद्र की सरकार ने लोकसभा चुनाव से पहले कई बड़ी योजनाओं की घोषणा की थी। अब केंद्र सरकार को चाहिए कि अपनी पूर्ववत घोषणाओं को अमल में लाने के साथ नई योजनाओं को लागू करने की व्यवस्था बजट में करे।
यहीं की वैष्णवी मौर्या ने बजट के बारे में कहा कि अयोध्या अभी तक विकसित नहीं हो पाई है। इसके लिए पूर्ववत सरकारें जिम्मेदार है। सड़क, पानी व बिजली की व्यवस्था सुदृढ़ करने के साथ मठ-मंदिरों का विकास सहित पर्यटन की सुविधाओं के लिए योजनाएं बननी चाहिए।
दृश्य कला विभाग की छात्रा दिव्या श्रीवास्तव ने बताया कि अयोध्या प्राचीन नगरी है। यहां की सांस्कृति धरोहर में कला, सहित्य व संगीत की विभिन्न प्रतिभाओं ने अपना लोहा मनवाया है। इसको नए सिरे संजोने की जरूरत है। इसके लिए बजट में व्यवस्था की जानी चाहिए। यह बजट के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। तो मानसी का मानना है कि अयोध्या के विकास का बड़ा पैमाना रिंग रोड व अयोध्या में बनने वाला बैराज साबित होगा। इसकी घोषणा की जा चुकी है। केंद्र सरकार को चाहिए कि आम बजट में दोनों बड़ी योजनाओं के लिए धनराशि का आवंटन किया जाए।
दृश्य विभाग के ही छात्र अक्षय कुमार का मानते है कि अयोध्या का स्वरूप सरयू के बिना अधूरा है। आबादी बढने के साथ सरयू प्रदूषित होती जा रही है। केंद्र सरकार को आम बजट में सरयू में बढ़ रहे प्रदूषण को रोकने के लिए बजटीय व्यवस्था की जानी चाहिए। छात्र अमित सिंह ने बताया कि अयोध्या में गंदगी को खत्म करना सबसे ज्यादा जरूरी है। केंद्र की सरकार सबसे पहले अयोध्या को नीट व क्लीन बनाए जाने के लिए बजट का एलाटमेंट करे। साथ ही देश की प्रतिष्ठित सफाई एजेंसियों के माध्यम से सफाई कार्य संपन्न कराए।
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यह बातें डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विवि में आम बजट को लेकर अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से अयोजित बजट परिचर्चा के दौरान प्रोफेसरों, प्राध्यापकों व छात्रों ने कही। सभी का मानना है कि अयोध्या का विकास विश्व पटल पर होना चाहिए। अयोध्या का नाम व सम्मान पूरे विश्व में है लेकिन यहां आने के बाद पर्यटक व श्रद्धालु खिन्न हो उठता है। कारण यह है कि यहां सुविधाओं का टोटा है। पर्यटक काशी तक तो जाते हैं लेकिन अयोध्या आना नहीं चाहते। इसका कारण यह है कि आम जनमासन को अयोध्या की संस्कृति व कलाओं से अब तक नहीं जोड़ा जा सका है। इसका विकास सर्वाधिक जरूरी है कि पर्यटक अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत का प्रचार-प्रसार व्यापक पैमाने पर हो।
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इस मामले में अर्थशास्त्र विभाग के प्रो. विनोद कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि अयोध्या सत्ता का केंद्र बिंदु वर्षों से रही है लेकिन इसका ग्रोथ लेवल कम रहा है। पर्यटन के क्षेत्र में कोई विशेष विकास नहीं हुआ है। आवश्यकता है कि अयोध्या का इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने के साथ सांस्कृतिक व लोक कलाओं को संरक्षित करने व इसको रोजगार से जोड़ने की जरूरत है। वहीं विभाग के ही डॉ. विनोद कुमार तिवारी ने कहा कि अयोध्या के विकास के लिए बड़े बजट की जरूरत है। यहां संस्कृति का व्यापक प्रचार प्रसार नहीं हो सका है, इस वजह से विदेशी पर्यटकों की आमद न के बराबर है। केंद्र सरकार को चाहिए कि लोकल पर्यटकों के साथ विदेशी पर्यटकों को संपूर्ण सुवधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
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अर्थशास्त्र विभाग की प्राध्यापक डॉ. लता श्रीवास्तव का मनना है कि अयोध्या प्राचीन नगरी होने के बाद भी अभी विकास के मामले में बहुत पीछे है। यहां की मठ-मंदिरों का विकास काशी विश्वनाथ मंदिर की तर्ज पर किया जाना चाहिए। इसके लिए सरकार की ओर से योजना बनाकर नीतिबद्ध ढंग से विकास किए जाने की जरूरत है।
दृश्य कला विभाग की प्राध्यापक डॉ. सरिता द्विवेदी बतातीं है कि अयोध्या की कला व संस्कृति को संरक्षित किए जाने की जरूरत है। बड़े पैमाने पर यहां के कलाकार बरोजगार हैं, ऐसी योजना बजट में हो कि अयोध्या के कला व संस्कृति को संरक्षित किए जाने के साथ रोजगार से जोड़ा जाना चाहिए। यहीं की डॉ. पल्लवी सोनी ने कहा कि अयोध्या प्राख्यात धर्मनगरी है लेकिन यह दूर से ही कहने पर अच्छा लगता है। जब पर्यटक या श्रद्धालु यहंा पहुंचता है तो उनका मन बदल जाता है। कारण जैसी अयोध्या को लेकर लोगों की धारणा है वैसी नहीं मिलती है। प्रत्येक वस्तु को ऐसे डेवलप की जाए जिससे अयोध्या होने का अहसास हो।
इस परिचर्चा में अभिभावक ममता श्रीवास्तव ने कहा कि अयोध्या की सबसे बड़ी समस्या यहां की गंदगी है। पर्यटक या श्रद्धालु सबसे ज्यादा खिन्न यहां की गंदगी से होते हैं। शुक्रवार को पेश होने वाले आम बजट में सबसे अधिक जरूरी यह कि यहां की सफाई व्यवस्था के लिए अलग से बजट जारी किया जाए।
तो विश्वविद्यालय के दृश्य कला विभाग की छात्रा नेहा गुप्ता का मत है कि अयोध्या के विकास के लिए केंद्र की सरकार ने लोकसभा चुनाव से पहले कई बड़ी योजनाओं की घोषणा की थी। अब केंद्र सरकार को चाहिए कि अपनी पूर्ववत घोषणाओं को अमल में लाने के साथ नई योजनाओं को लागू करने की व्यवस्था बजट में करे।
यहीं की वैष्णवी मौर्या ने बजट के बारे में कहा कि अयोध्या अभी तक विकसित नहीं हो पाई है। इसके लिए पूर्ववत सरकारें जिम्मेदार है। सड़क, पानी व बिजली की व्यवस्था सुदृढ़ करने के साथ मठ-मंदिरों का विकास सहित पर्यटन की सुविधाओं के लिए योजनाएं बननी चाहिए।
दृश्य कला विभाग की छात्रा दिव्या श्रीवास्तव ने बताया कि अयोध्या प्राचीन नगरी है। यहां की सांस्कृति धरोहर में कला, सहित्य व संगीत की विभिन्न प्रतिभाओं ने अपना लोहा मनवाया है। इसको नए सिरे संजोने की जरूरत है। इसके लिए बजट में व्यवस्था की जानी चाहिए। यह बजट के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। तो मानसी का मानना है कि अयोध्या के विकास का बड़ा पैमाना रिंग रोड व अयोध्या में बनने वाला बैराज साबित होगा। इसकी घोषणा की जा चुकी है। केंद्र सरकार को चाहिए कि आम बजट में दोनों बड़ी योजनाओं के लिए धनराशि का आवंटन किया जाए।
दृश्य विभाग के ही छात्र अक्षय कुमार का मानते है कि अयोध्या का स्वरूप सरयू के बिना अधूरा है। आबादी बढने के साथ सरयू प्रदूषित होती जा रही है। केंद्र सरकार को आम बजट में सरयू में बढ़ रहे प्रदूषण को रोकने के लिए बजटीय व्यवस्था की जानी चाहिए। छात्र अमित सिंह ने बताया कि अयोध्या में गंदगी को खत्म करना सबसे ज्यादा जरूरी है। केंद्र की सरकार सबसे पहले अयोध्या को नीट व क्लीन बनाए जाने के लिए बजट का एलाटमेंट करे। साथ ही देश की प्रतिष्ठित सफाई एजेंसियों के माध्यम से सफाई कार्य संपन्न कराए।