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Amarujala Krishika 2024: अयोध्या कृषि विवि के कुलपति बोले- बिचौलिए न ले पाएं मेहनत का फल, खेती का मूल आधार पशु

Tue, 10 Dec 2024 10:01 AM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Tue, 10 Dec 2024 10:01 AM IST
सार

राजधानी लखनऊ में सोमवार को अमर उजाला कृषिका कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में सुबह 10 बजे से हुआ। इसका समापन शाम 5 बजे हुआ। कार्यक्रम में सीएम योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस मौके पर सीएम ने प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया।

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Ayodhya Agricultural University VC said Middlemen should not be able to take fruits of someone hard work
आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय अयोध्या के कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय अयोध्या के कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने कहा कि किसान समृद्ध होगा तो देश और समाज संपन्न होगा। खेती में लोगों का स्वास्थ्य भी छिपा है। किसानों को सामूहिक खेती की तरफ आगे बढ़ना होगा। इससे न सिर्फ उन्हें बेहतर बाजार मिलेगा, बल्कि उनकी आय भी बढ़ेगी।

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उन्होंने कहा कि किसान पैदावार तो बहुत करते हैं, पर उसे बाजार तक पहुंचाने में 50 फीसदी लाभ बिचौलिए ले जाते हैं। इसलिए खेती इस तरह करें कि अपना उत्पाद बाजार तक खुद पहुंचाएं और पूरा मुनाफा कमाएं। इसके लिए गांव, ब्लॉक व जिला स्तर पर क्लस्टर बनाकर काम करें। सामूहिक खेती इसमें उपयोगी होगी। उन्होंने ज्यादा कीटनाशक और खाद के प्रयोग का जिक्र करते हुए कहा कि खेती के तत्वों का संतुलन जरूरी है। किसान आधुनिक तकनीक भी जानें।
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उन्होंने कहा कि खेती का मूल आधार पशु हैं। एक समय पूरा ईको सिस्टम था, इसके मूल में पशु थे। पर, यह काफी प्रभावित हुआ है। हमें खेती को पर्यावरण के अनुकूल बनाना होगा। किसानों को ग्लोबल सोच के अनुरूप उत्पाद पैदा करना चाहिए। किसान अगेती खेती करें और हरी खाद का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करें।

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खेती में तेजी से बढ़ रहा एआई का प्रयोग : डॉ. आनंद

चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर के कुलपति डॉ. आनंद कुमार सिंह ने कहा कि बदलते दौर में खेती में भी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) व अन्य तकनीक का प्रयोग बढ़ रहा है। किसानों को चाहिए कि वे इसकी जानकारी रखें। अगर दिक्कत है तो कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) से जानकारी लें।


उन्होंने कहा कि खेती में विज्ञान और तकनीक के प्रयोग से ही अपेक्षित लाभ मिलेंगे। उन्होंने कहा कि खाद्यान्न उत्पादन तेजी से बढ़ा है, लेकिन अब हमें गुणवत्ता पर भी ध्यान देना होगा। क्योंकि इतना ज्यादा उत्पादन के बाद भी 200 मिलियन लोग कुपोषण का शिकार हैं। इससे पता चलता है कि कहीं कोई कमी और जानकारी का अभाव है।

डॉ. सिंह ने कहा कि हमें जो पानी, मिट्टी मिली थी, आज वह उस रूप में नहीं है। हमें इस ओर भी ध्यान देना होगा। आधुनिक तकनीक से आज यह पता लगाना आसान हो गया है कि खेत में खाद कब और कितनी डालनी है। इससे आपकी आय बढ़ेगी और जीवनशैली भी बदलेगी। खेती में नए-नए शोध भी हो रहे हैं, किसान इसका लाभ उठाएं। एआई के प्रयोग से समस्याओं का बेहतर निदान भी मिलेगा। उन्होंने किसानों से बागवानी व फूलों की खेती करने का आह्वान किया।

सरकारी अनुदान से कम हुई खेती की लागत

कृषि निदेशक डॉ. जितेंद्र कुमार तोमर ने कहा कि सरकार की ओर से किसानों को खाद, बीज, यंत्र सहित हर स्तर पर अनुदान दिया जा रहा है। इससे खेती की लागत कम हुई है। किसान सक्रिय होकर खेती करें तो इससे ज्यादा मुनाफा अन्य किसी कार्य में नहीं है। 

उद्यान निदेशक डॉ. विजय बहादुर द्विवेदी ने कहा कि एकीकृत बागवानी विकास मिशन में किसानों को सहयोग दिया जा रहा है। हाईटेक नर्सरी की स्थापना के लिए सार्वजनिक क्षेत्र में 100 फीसदी अनुदान और निजी क्षेत्र में 50 फीसदी अनुदान की व्यवस्था है। 

इसी तरह टिश्यूकल्चर लैब की स्थापना के लिए निजी क्षेत्र में 40 फीसदी अनुदान की व्यवस्था है। फूलों की खेती पर लघु एवं सीमांत किसानों को 40 हजार और अन्य किसानों को 25 हजार रुपया अनुदान दिया जा रहा है। इसी तरह अन्य तमाम योजनाएं हैं, जिनके जरिए फल, फूल की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।

ओडीओपी से किसान हो रहे मजबूत: डॉ संजय सिंह

उप्र कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ संजय सिंह ने कहा कि योगी सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) से किसानों को आर्थिक मजबूती मिल रही है। प्रदेश सरकार ने हर जिले के मशहूर उत्पादों को बड़ा प्लेटफार्म दिया है। 

प्रतापगढ़ के आंवले का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि आंवला से बने उत्पादों को विदेशों में नयी पहचान मिली है। सिद्धार्थनगर के काला नमक चावल से बने बिस्किट भी अपनी खुशबू से लोगों का मन मोह रहे हैं। इनकी बाजार में मांग तेजी से बढ़ रही है। किसानों को अन्य चावलों की किस्मों से भी बिस्किट बना कर लाभ उठाना चाहिए। 

उन्होंने बताया कि अयोध्या और मुजफ्फरनगर में बने गुड़ से कई अन्य उत्पाद भी बनाए जा रहे हैं, जिनको लोगों ने काफी पसंद किया है। पहले खाली गुड़ बेचकर किसानों को सीमित आय ही होती थी, लेकिन उससे बने उत्पादों ने मूल्य संवर्धन किया और किसानों की आय बढ़ रही है। हाथरस के हींग, कन्नौज के इत्र और कौशाम्बी के केले से बने वस्त्रों ने अपनी अलग पहचान बनायी है।

मूल्य संवर्धन में महिलाओं का है विशेष योगदान

डॉ संजय सिंह ने बताया कि कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन में महिलाओं का बड़ा योगदान है। कई महिलाओं ने छोटे-छोटे समूह बनाकर कृषि उत्पादों से कई अन्य उत्पाद बनाए हैं। आंवले से मुरब्बा, केले से वस्त्र, काला नमक चावल से बिस्कुट के अलावा कई अन्य उत्पादों से मूल्य संवर्धन करके महिलाएं अपने सशक्तिकरण को साकार कर रही हैं।

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