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Holi 2020: तीन मार्च से शुरू होगा होलाष्टक, होलिका दहन के लिए ये है श्रेष्ठ मुहूर्त
Thu, 27 Feb 2020 01:21 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Thu, 27 Feb 2020 01:21 PM IST
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होलिका दहन इस बार 9 मार्च को होगा, जबकि होली 10 को खेली जाएगी। होलाष्टक तीन मार्च से शुरू हो जाएगा, जो 9 मार्च तक रहेगा। इस दौरान कई क्षेत्रों में विवाह आदि शुभ कार्य वर्जित माना गया है। भद्रा का मान दोपहर में खत्म हो जाएगा, जिसके चलते होलिका दहन 9 मार्च की रात 11:26 बजे से पहले करना श्रेयस्कर रहेगा। वहीं, खाटू श्याम धाम पर 10 को फूलों की होली खेली जाएगी।
लखनऊ के गोमतीनगर निवासी आचार्य प्रदीप ने बताया कि 8 मार्च की रात 1:40 बजे से पूर्णिमा का मान शुरू हो जाएगा, जो 9 मार्च की रात 11:26 बजे तक रहेगा। उसके बाद प्रतिपदा लग जाएगी। उन्होंने बताया कि होलिका दहन के तीन मुख्य नियम होना जरूरी है।
पहला पूर्णिमा की तिथि हो। दूसरा रात का समय हो और तीसरा भद्रा बीत चुकी हो। चूंकि भद्रा 9 मार्च की दोपहर 12:32 बजे तक ही रहेगी। इसीलिए भद्रा भी अड़ंगा नहीं लगाएगी। अलीगंज के ज्योतिषी एसएस नागपाल ने बताया कि फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से पूर्णिमा तक होलाष्टक मनाया जाएगा।
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होलाष्टक 3 मार्च से 9 मार्च तक रहेगा। कई स्थानों पर होलाष्टक शुरू होने पर पेड़ की डाल काटकर रंग-बिरंगे कपड़े बांधकर डाल को जमीन में दबा देते हैं। इस दिन आम की मंजरी तथा चंदन को मिलाकर खाने का भी महत्व है। होलाष्टक के दौरान कुछ क्षेत्रों में विवाह आदि शुभ मंगल कार्य वर्जित माने जाते हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
बढ़ने लगा है होलिका का आकार
महाशिवरात्रि बीतने के साथ ही अब गली-मोहल्लों और चौराहों पर विराजी गई होलिका का आकार बढ़ने लगा है। बसंत पंचमी पर अरंड की डाल के साथ जगह-जगह रखी गई होलिका में अब धीरे-धीरे लकड़ियां बढ़ने के साथ उसका स्वरूप विशालकाय होने लगा है। आने वाले दिनों में अब उपलों का जुटाव शुरू होगा। आचार्य प्रदीप ने बताया कि होलिका पूजन में डुंडिका देवी का पूजन सूर्यास्त के बाद अबीर-गुलाल व जल से करना श्रेष्ठ है। उपले, नये अनाज की बालियां चढ़ाने के साथ गन्ना भूनना चाहिये। नये अनाज की बालियां भूनकर लानी चाहिये।
महाशिवरात्रि बीतने के साथ ही अब गली-मोहल्लों और चौराहों पर विराजी गई होलिका का आकार बढ़ने लगा है। बसंत पंचमी पर अरंड की डाल के साथ जगह-जगह रखी गई होलिका में अब धीरे-धीरे लकड़ियां बढ़ने के साथ उसका स्वरूप विशालकाय होने लगा है। आने वाले दिनों में अब उपलों का जुटाव शुरू होगा। आचार्य प्रदीप ने बताया कि होलिका पूजन में डुंडिका देवी का पूजन सूर्यास्त के बाद अबीर-गुलाल व जल से करना श्रेष्ठ है। उपले, नये अनाज की बालियां चढ़ाने के साथ गन्ना भूनना चाहिये। नये अनाज की बालियां भूनकर लानी चाहिये।