{"_id":"699e15cb3c68ae9bd102dde1","slug":"attempt-to-recite-hanuman-chalisa-in-protest-against-namaz-lucknow-news-c-13-1-lko1028-1621543-2026-02-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: नमाज के विरोध में हनुमान चालीसा पाठ की कोशिश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: नमाज के विरोध में हनुमान चालीसा पाठ की कोशिश
विज्ञापन
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में लाल बारादरी भवन को लेकर चल रहा विवाद अब और गहराता जा रहा है। जर्जर स्थिति के कारण भवन के दरवाजे बंद किए जाने के बाद परिसर में लगातार तीसरे दिन भी तनाव और हंगामे की स्थिति बनी रही। मंगलवार को विश्वविद्यालय परिसर में सड़क पर नमाज पढ़े जाने के विरोध में एबीवीपी कार्यकर्ताओं और अन्य छात्रों ने कई स्थानों पर हनुमान चालीसा पाठ करने की कोशिश की। इसके साथ ही लाल बारादरी के पास गंगाजल से शुद्धिकरण का प्रयास भी किया गया।
लाल बारादरी के निकट जतिन शुक्ला, शशि प्रकाश मिश्रा और विवेक मिश्रा की अगुवाई में दर्जनों छात्र माथे पर टीका लगाकर हनुमान चालीसा पाठ के लिए एकत्र हुए। जैसे ही छात्रों ने पाठ शुरू किया, पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
इस दौरान मुख्य कुलानुशासक प्रो. राकेश द्विवेदी के नेतृत्व में प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने छात्रों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन छात्र अपनी मांगों पर अड़े रहे। छात्रों का कहना था कि परिसर में नमाज और इफ्तार कार्यक्रम होने पर कार्रवाई नहीं हुई, जबकि हनुमान चालीसा पर रोक लगाई जा रही है। टैगोर लाइब्रेरी के सामने स्थित पार्क में राष्ट्रीय शिक्षार्थी दल से जुड़े कुछ छात्रों ने गांधी प्रतिमा के पास हनुमान चालीसा पाठ कर नमाज और इफ्तार कार्यक्रम का विरोध जताया।
विज्ञापन
इधर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के पदाधिकारियों ने भी विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश कर प्रदर्शन करने की कोशिश की। पुलिस द्वारा रोके जाने पर उन्होंने कुल सचिव डॉ. भावना मिश्रा को ज्ञापन सौंपा।
छह पूर्व छात्रों के प्रवेश पर रोक, सात को नोटिस
लाल बारादरी परिसर में नमाज पढ़ने, इफ्तार आयोजन और भवन में तोड़फोड़ के आरोप में विश्वविद्यालय प्रशासन ने सात छात्रों को नोटिस जारी किया है। वहीं छह पूर्व छात्रों के विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के लिए पुलिस को पत्र भेजा गया है। विश्वविद्यालय प्रवक्ता प्रो. मुकुल श्रीवास्तव ने बताया कि परिसर में शांति और अनुशासन बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है। नियमों के उल्लंघन के मामलों में आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
मस्जिद नहीं है लाल बारादरी ः प्रोफेसर घोष
राजधानी के वरिष्ठ इतिहासकार प्रोफेसर पीके घोष का कहना है कि लाल बारादरी का इतिहास में मस्जिद होने का कहीं कोई जिक्र नहीं है। इस भवन की बनावट और आर्किटेक्चर मस्जिद के हिसाब से नहीं बना है। इसमें किबला और इसका मुख्य आर्च है ही नहीं। मस्जिद में होने वाला दालान भी नहीं है। खुतबा पढ़ने के लिए मिंबर भी नहीं है। पुराने राजस्व रिकॉर्ड, नक्शे आदि में भी लाल बारादरी के मस्जिद होने का कोई जिक्र नहीं है।
क्या है मस्जिद में किबला
उन्होंने बताया कि मस्जिद में एक दीवार और मुख्य-आर्च मक्का की दिशा में होती है, जिसे किबला कहते हैं। मस्जिद में किबला सऊदी अरब के मक्का शहर में स्थित काबा की दिशा है, जिसकी ओर दुनिया भर के मुसलमान नमाज के दौरान अपना चेहरा रखते हैं। उन्होंने बताया कि इस भवन का निर्माण नवाब नसीरुद्दीन ने उन्नीसवीं सदी में कराया था। असल में यह मस्जिद नहीं बल्कि इमामबाड़ा है। लाल ईंटों से बने 12 दरवाजों वाला भवन होने के कारण इसे लाल बारादरी नाम दिया गया।
विज्ञापन
लाल बारादरी के निकट जतिन शुक्ला, शशि प्रकाश मिश्रा और विवेक मिश्रा की अगुवाई में दर्जनों छात्र माथे पर टीका लगाकर हनुमान चालीसा पाठ के लिए एकत्र हुए। जैसे ही छात्रों ने पाठ शुरू किया, पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
विज्ञापन
इस दौरान मुख्य कुलानुशासक प्रो. राकेश द्विवेदी के नेतृत्व में प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने छात्रों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन छात्र अपनी मांगों पर अड़े रहे। छात्रों का कहना था कि परिसर में नमाज और इफ्तार कार्यक्रम होने पर कार्रवाई नहीं हुई, जबकि हनुमान चालीसा पर रोक लगाई जा रही है। टैगोर लाइब्रेरी के सामने स्थित पार्क में राष्ट्रीय शिक्षार्थी दल से जुड़े कुछ छात्रों ने गांधी प्रतिमा के पास हनुमान चालीसा पाठ कर नमाज और इफ्तार कार्यक्रम का विरोध जताया।
विज्ञापन
इधर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के पदाधिकारियों ने भी विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश कर प्रदर्शन करने की कोशिश की। पुलिस द्वारा रोके जाने पर उन्होंने कुल सचिव डॉ. भावना मिश्रा को ज्ञापन सौंपा।
छह पूर्व छात्रों के प्रवेश पर रोक, सात को नोटिस
लाल बारादरी परिसर में नमाज पढ़ने, इफ्तार आयोजन और भवन में तोड़फोड़ के आरोप में विश्वविद्यालय प्रशासन ने सात छात्रों को नोटिस जारी किया है। वहीं छह पूर्व छात्रों के विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के लिए पुलिस को पत्र भेजा गया है। विश्वविद्यालय प्रवक्ता प्रो. मुकुल श्रीवास्तव ने बताया कि परिसर में शांति और अनुशासन बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है। नियमों के उल्लंघन के मामलों में आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
मस्जिद नहीं है लाल बारादरी ः प्रोफेसर घोष
राजधानी के वरिष्ठ इतिहासकार प्रोफेसर पीके घोष का कहना है कि लाल बारादरी का इतिहास में मस्जिद होने का कहीं कोई जिक्र नहीं है। इस भवन की बनावट और आर्किटेक्चर मस्जिद के हिसाब से नहीं बना है। इसमें किबला और इसका मुख्य आर्च है ही नहीं। मस्जिद में होने वाला दालान भी नहीं है। खुतबा पढ़ने के लिए मिंबर भी नहीं है। पुराने राजस्व रिकॉर्ड, नक्शे आदि में भी लाल बारादरी के मस्जिद होने का कोई जिक्र नहीं है।
क्या है मस्जिद में किबला
उन्होंने बताया कि मस्जिद में एक दीवार और मुख्य-आर्च मक्का की दिशा में होती है, जिसे किबला कहते हैं। मस्जिद में किबला सऊदी अरब के मक्का शहर में स्थित काबा की दिशा है, जिसकी ओर दुनिया भर के मुसलमान नमाज के दौरान अपना चेहरा रखते हैं। उन्होंने बताया कि इस भवन का निर्माण नवाब नसीरुद्दीन ने उन्नीसवीं सदी में कराया था। असल में यह मस्जिद नहीं बल्कि इमामबाड़ा है। लाल ईंटों से बने 12 दरवाजों वाला भवन होने के कारण इसे लाल बारादरी नाम दिया गया।