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Lucknow News: अटल को किया याद, विभूतियों का सम्मान
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लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में मंगलवार को अलग-अलग क्षेत्रों की छह विभूतियों को सम्मानि
लखनऊ। अटल सांस्कृतिक संगम के अंतिम दिन समापन अवसर पर मंगलवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी को याद किया गया। साथ ही पूर्व में हुईं निबंध लेखन और काव्य लेखन प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत भी किया गया। संगोष्ठी और शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति हुई। इस अवसर पर अलग-अलग क्षेत्रों की छह विभूतियों को सम्मानित किया गया।
स्कॉलेस इंटरनेशनल फोरम व कमला शिक्षण सेवा संस्थान की ओर से आयोजित समारोह का शुभारंभ अयोध्या धाम स्थित सिद्धपीठ श्री हनुमन्निवास के धर्माचार्य मिथिलेशनंदिनीशरण महाराज ने किया। पहले सत्र में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी पर चर्चा के दौरान आचार्य मिथिलेशनंदिनीशरण महाराज ने कहा कि अटल जी में पक्ष और विपक्ष दोनों से वार्ता करने की योग्यता थी और सदन में बड़ी से बड़ी समस्या आने पर अटल जी उसका हल भी निकाल देते थे। अनेक विरोधाभासों के बावजूद सभी को साथ लेकर चलने का हुनर अटल जी में था जो उन्हें अन्य राजनेताओं से अलग करता था। उन्होंने कहा कि मैं कुंवारा हूं लेकिन ब्रह्मचारी नहीं हूं... कहने का साहस केवल अटल जी के ही बस की बात थी।
इस दौरान उन्होंने मौजूद विद्यार्थियों से कहा कि उन्हें ज्ञान प्राप्ति के लिए अपने आचार्य की अधीनता स्वीकार करनी होगी और अपने शरीर को प्रयोगशाला न बनने दें। इस दौरान वरिष्ठ कवि बुद्धिनाथ मिश्र ने अटल को समर्पित गीत सुनाया। संचालन कवि कुलदीप कलश ने और संयोजन गीतकार रामायण धर द्विवेदी ने किया। संगोष्ठी को आईआरएस उग्रसेन धर द्विवेदी, मनोज कांत, मनीष त्रिपाठी, सर्वेश चंद्र द्विवेदी और संजय चौधरी ने भी संबोधित किया। भारत भाव के अटल सिद्धांत विषय पर एक अन्य सत्र में साहित्यकार अमरनाथ ललित और विजय मनोहर तिवारी के बीच चर्चा हुई।
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इन विभूतियों का हुआ सम्मान
आचार्य मिथिलेशनंदिनीशरण महाराज और मंचासीन अतिथियों ने इस अवसर पर मेजर जनरल हर्ष कक्कड़, राजेश सिंह दयाल, विजय मनोहर तिवारी, अपर्णा मिश्रा, रंजीत यादव ''खाकी वाले गुरु जी'' और रामेश्वर प्रसाद द्विवेदी ''प्रलयंकर'' को सम्मानित किया।
शास्त्रीय गायन ने मोहा मन, विजेताओं का सम्मान
डॉ. शालिनी वेद त्रिपाठी और उनके ग्रुप की ओर से शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति दी गई। निबंध लेखन और काव्य लेखन प्रतियोगिता के विजेताओं का सम्मान भी किया गया। दोनों प्रतियोगिताओं में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को क्रमश: 21 हजार, 15 हजार और 7.5 हजार रुपये का पुरस्कार व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
क्या कहें गीत हम फिर गाने लगे...
आयोजन के सबसे अंत में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। वरिष्ठ कवि डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र ने पढ़ा- ऐसा लगता है मैं मरूंगा नहीं...। वरिष्ठ गीतकार डॉ. सुरेश ने सुनाया- जाने पहचाने भी बेगाने लगे, क्या कहें गीत हम फिर गाने लगे...। डॉ. कमलेश राय, डॉ. सूरज राय सूरज, डॉ. अनुज नागेंद्र, डॉ. विनम्र सेन सिंह, डॉ. गौरव ''''मासूम'''' और डॉ. गौरव दुबे ने भी काव्यपाठ किया।
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स्कॉलेस इंटरनेशनल फोरम व कमला शिक्षण सेवा संस्थान की ओर से आयोजित समारोह का शुभारंभ अयोध्या धाम स्थित सिद्धपीठ श्री हनुमन्निवास के धर्माचार्य मिथिलेशनंदिनीशरण महाराज ने किया। पहले सत्र में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी पर चर्चा के दौरान आचार्य मिथिलेशनंदिनीशरण महाराज ने कहा कि अटल जी में पक्ष और विपक्ष दोनों से वार्ता करने की योग्यता थी और सदन में बड़ी से बड़ी समस्या आने पर अटल जी उसका हल भी निकाल देते थे। अनेक विरोधाभासों के बावजूद सभी को साथ लेकर चलने का हुनर अटल जी में था जो उन्हें अन्य राजनेताओं से अलग करता था। उन्होंने कहा कि मैं कुंवारा हूं लेकिन ब्रह्मचारी नहीं हूं... कहने का साहस केवल अटल जी के ही बस की बात थी।
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इस दौरान उन्होंने मौजूद विद्यार्थियों से कहा कि उन्हें ज्ञान प्राप्ति के लिए अपने आचार्य की अधीनता स्वीकार करनी होगी और अपने शरीर को प्रयोगशाला न बनने दें। इस दौरान वरिष्ठ कवि बुद्धिनाथ मिश्र ने अटल को समर्पित गीत सुनाया। संचालन कवि कुलदीप कलश ने और संयोजन गीतकार रामायण धर द्विवेदी ने किया। संगोष्ठी को आईआरएस उग्रसेन धर द्विवेदी, मनोज कांत, मनीष त्रिपाठी, सर्वेश चंद्र द्विवेदी और संजय चौधरी ने भी संबोधित किया। भारत भाव के अटल सिद्धांत विषय पर एक अन्य सत्र में साहित्यकार अमरनाथ ललित और विजय मनोहर तिवारी के बीच चर्चा हुई।
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इन विभूतियों का हुआ सम्मान
आचार्य मिथिलेशनंदिनीशरण महाराज और मंचासीन अतिथियों ने इस अवसर पर मेजर जनरल हर्ष कक्कड़, राजेश सिंह दयाल, विजय मनोहर तिवारी, अपर्णा मिश्रा, रंजीत यादव ''खाकी वाले गुरु जी'' और रामेश्वर प्रसाद द्विवेदी ''प्रलयंकर'' को सम्मानित किया।
शास्त्रीय गायन ने मोहा मन, विजेताओं का सम्मान
डॉ. शालिनी वेद त्रिपाठी और उनके ग्रुप की ओर से शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति दी गई। निबंध लेखन और काव्य लेखन प्रतियोगिता के विजेताओं का सम्मान भी किया गया। दोनों प्रतियोगिताओं में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को क्रमश: 21 हजार, 15 हजार और 7.5 हजार रुपये का पुरस्कार व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
क्या कहें गीत हम फिर गाने लगे...
आयोजन के सबसे अंत में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। वरिष्ठ कवि डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र ने पढ़ा- ऐसा लगता है मैं मरूंगा नहीं...। वरिष्ठ गीतकार डॉ. सुरेश ने सुनाया- जाने पहचाने भी बेगाने लगे, क्या कहें गीत हम फिर गाने लगे...। डॉ. कमलेश राय, डॉ. सूरज राय सूरज, डॉ. अनुज नागेंद्र, डॉ. विनम्र सेन सिंह, डॉ. गौरव ''''मासूम'''' और डॉ. गौरव दुबे ने भी काव्यपाठ किया।

लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में मंगलवार को अलग-अलग क्षेत्रों की छह विभूतियों को सम्मानि

लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में मंगलवार को अलग-अलग क्षेत्रों की छह विभूतियों को सम्मानि

लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में मंगलवार को अलग-अलग क्षेत्रों की छह विभूतियों को सम्मानि

लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में मंगलवार को अलग-अलग क्षेत्रों की छह विभूतियों को सम्मानि

लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में मंगलवार को अलग-अलग क्षेत्रों की छह विभूतियों को सम्मानि

लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में मंगलवार को अलग-अलग क्षेत्रों की छह विभूतियों को सम्मानि

लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में मंगलवार को अलग-अलग क्षेत्रों की छह विभूतियों को सम्मानि