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एआरएम ने गुपचुप सरेंडर कर दीं अनुबंधित बसें, बस मालिक ने प्रबंध निदेशक से की शिकायत

Fri, 03 Jul 2020 03:34 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Fri, 03 Jul 2020 03:34 PM IST
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assistant regional manager surrendered contracted buses
- फोटो : अमर उजाला
परिवहन निगम में अनुबंधित बस संचालन कराने वाले मालिक मुसीबत में फंस गए हैं। लॉकडाउन के चलते क्षेत्रीय स्तर पर अधिकारी ऐसे अनुबंधित बस मालिकों का उत्पीड़न कर रहे हैं। ताजा प्रकरण अयोध्या क्षेत्र का उजागर हुआ है यहां पर सुल्तानपुर डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (एआरएम) ने गुपचुप तरीके से एक मालिक की अनुबंधित बसों को सरेंडर करा दिया।
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इस मामले की मालिक ने गुरुवार को प्रबंध निदेशक डॉ राजशेखर से मुलाकात करके शिकायत पत्र दिया है, जिस पर प्रबंध निदेशक ने क्षेत्रीय प्रबंधक से रिपोर्ट तलब की है। सांठगांठ का आलम यह कि आरटीओ कार्यालय में अनुबंधित बसों के कोई भी दस्तावेज ना होने के बाद भी सरेंडर शुल्क 100 रुपये की रसीद आनन-फानन में काट दी गई।
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अधिकारियों के अनुसार अनुबंधित बस के मालिक उमेश सिंह की तीन बसें अयोध्या डिपो में अनुबंध पर चल रही हैं। अयोध्या जोन के तहत सुल्तानपुर के एआरएम ने बस सरेंडर के कागजात बाद में जमा करने का आश्वासन पर आरटीओ ने सरेंडर की रसीद काट दी। जबकि बिना कागजात किसी भी वाहन की सरेंडर रसीद नहीं काटी जा सकती। इस मामले की मालिक ने में परिवहन आयुक्त धीरज साहू से भी शिकायत की। जिसकी जांच कराकर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया गया है।
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आरएम व एआरएम को नोटिस

अयोध्या के आरटीओ सुभाष कुमार कुशवाहा द्वारा अयोध्या के आरएम धमेंद्र यादव व सुल्तानपुर के एआरएम महेश कुमार की इस लापरवाही पर नोटिस देने की कार्रवाई शुरू कर दी गई। दरअसल दोनों अधिकारी ने विश्वास में लेकर बस सरेंडर की रसीद कटवा ली। अब सरेंडर की रसीद रद्द होगी।

परिवहन निगम की 12147 बसों में से 2683 को सरेंडर कर दिया गया है। इस तरह बस बेड़े में वर्तमान में 9463 निगम और 2684 बसें अनुबंधित हैं।  प्रबंध निदेशक डॉ. राज शेखर ने बताया कि अनलॉक-1 में लगभग 6000 बसों के रोजाना संचालन की जरूरत को देखते हुए असंचालित बसों के टैक्स की देयता से बचने के लिए यह निर्णय लिया गया है।

 

उन्होंने बताया कि सरेंडर की गई बसों में 2194 निगम और 489 अनुबंधित समेत 2683 बसें शामिल हैं। इन बसों को प्रदेश के विभिन्न आरटीओ कार्यालयों में सरेंडर कराया गया है। इससे परिवहन निगम को प्रतिमाह 2.80 करोड़ रुपये की बचत होगी। उन्होंने बताया कि 30 जून को निगम की बसों से 8,85173 लोगों ने यात्रा की। 

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