फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   arthritis is curable with sorisis medicine

Lucknow News: सोरायसिस की दवा से रूमेटाइड अर्थराइटिस का भी इलाज

Wed, 14 Dec 2022 08:30 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 14 Dec 2022 08:30 AM IST
विज्ञापन
arthritis is curable with sorisis medicine
एसजीपीजीआई में शोध दिवस के मौके पर मंगलवार को शिक्षकों और विद्यार्थियों ने अपने शोधपत्रों के माध्यम से विभिन्न रोगों की पहचान और इलाज के तरीके बताए। क्लीनिकल इम्यूनोलॉजी विभाग की प्रमुख प्रो. अमिता अग्रवाल, डॉ. संयुक्ता और शोध छात्रा शिविका ने सोरायसिस के इलाज में काम आने वाले रसायन आईएल-36 आरए के माध्यम से बच्चों के रूमेटाइड अर्थराइटिस का इलाज करने का तरीका तलाशा है।
विज्ञापन

लैब में साबित होने के बाद अब इसका परीक्षण मरीजों पर करने की तैयारी है। इस मौके पर संस्थान के निदेशक प्रो. आरके धीमान ने शोध को बढ़ावा देने के लिए आंतरिक अनुसंधान का बजट पांच लाख से बढ़ाकर 10 लाख करने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि अब संस्थान के शिक्षक पीजीआई के साथ ही अन्य संस्थानों में जाकर पीएचडी कर सकेंगे। संस्थान की गवर्निंग बॉडी से पीएचडी के प्रावधान पास हो चुके हैं। अभी तक शिक्षकों को पीएचडी करने के लिए कम से कम एक साल का अवकाश लेना होता था। नई व्यवस्था के अंतर्गत छुट्टी नहीं लेनी होगी।
विज्ञापन

अब ये पीजीआई के साथ ही अन्य संस्थानों में भी पीएचडी में दाखिला ले सकेंगे। संस्थान के रिसर्च सेल के प्रमुख प्रो. यूसी घोषाल ने बताया कि शोध को बढ़ावा देने के लिए शोध छात्रों की संख्या में लगातार वृद्धि कर रहे हैं। शोध दिवस में शोधपत्र प्रस्तुत करने वाले 22 उत्कृष्ट शोध पत्रों को बुधवार को होने वाले स्थापना दिवस समारोह में पुरस्कृत किया जाएगा। इस मौके पर लोहिया संस्थान की निदेशक प्रो. सोनिया नित्यानंद, बालाजी विद्यापीठ के कुलपति डॉ. एससी परीजा और अमेरिका से आए डॉ. राजन सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित किया।
विज्ञापन
विज्ञापन

पहले ही हो सकेगी टीबी के मरीजों की पहचान
यदि ऐसे व्यक्तियों की पहचान करना संभव हो जाए, जिनको भविष्य में टीबी होने की आशंका है तो इस पर रोक लगाई जा सकती है। पीजीआई के क्लीनिकल इम्युनोलॉजी विभाग के वैज्ञानिक डॉ. सुधीर सिन्हा, प्रो. अमिता अग्रवाल, डॉ. कोमल सिंह, राजेश और डॉ. प्रेरणा कपूर ने ऐसा ही बायोमार्कर तलाशा है। इन्होंने बताया कि टीबी के 40 मरीज और 120 लोगों पर यह शोध किया गया। इसमें देखा गया कि टीबी मरीज के परिवार के 9 से 10 फीसदी लोगों में मरीजों की तरह बी सेल का रिस्पॉन्स मिला। जिनमें बी सेल का रिस्पांस टीबी के मरीजों की तरह होता है, उनमें भी टीबी होने की आशंका रहती है। इनका समय रहते इलाज कर इन्हें रोग के दुष्प्रभाव से बचाया जा सकता है।
एटेक्सिया के मरीजों में कम होगा जांच खर्च
आनुवंशिकी विभाग के शोध विज्ञानी संदीप सिंह और डॉ. अंशिका श्रीवास्तव ने एटेक्सिया के परीक्षण को सस्ता करने का उपाय खोजा है। एटेक्सिया बीमारी में मस्तिष्क के सेरिबेलम के क्षतिग्रस्त होने की वजह से शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है। यह 40 प्रकार की होती है। बीमारी का प्रकार जाने बिना इलाज संभव नहीं है। इसके लिए मॉलीक्युलर जांच होती है। सभी जीन के परीक्षण में खर्च बहुत ज्यादा आता है। खर्च कम करने के लिए चार वर्ग में जांच को बांटा गया है। इसमें पहले कॉमन जीन का परीक्षण किया गया। इसमें पाया गया कि 60 से 70 फीसदी लोगों में केवल इसी जीन के परीक्षण से बीमारी के प्रकार का पता लग जाता है। इस तकनीक से इलाज का खर्च 15 हजार से घटकर पांच हजार हो जाता है।

ब्लड कैंसर की दवा खोजने की राह आसान
क्लीनिकल हिमेटोलॉजी विभाग के डॉ. अरुणिम शाह, डॉ. शोभिता, डॉ. नरेश त्रिपाठी, डॉ. एसीपी चतुर्वेदी ने एक्यूट मायलोइड ल्यूकेमिया के लिए जिम्मेदार जीन का पता लगाने में कामयाबी हासिल की है। इस खोज के बाद ऐसी दवा बनाने में मदद मिलेगी जो इन जीन को अधिक बनने से रोक सके।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed