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यूपी : छात्रवृत्ति योजना में 3.5 लाख छात्रों का आवेदन निरस्त
Tue, 16 Mar 2021 11:48 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Tue, 16 Mar 2021 11:48 AM IST
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छात्रवृत्ति
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छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना में करीब 3.5 लाख छात्रों के आवेदन पत्र निरस्त कर दिए गए हैं। जाति व आय प्रमाणपत्र का मिलान न होने और नैक व एनबीए ग्रेडिंग न होने से इन्हें योजना के दायरे से बाहर कर दिया गया है। समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, डाटा की जांच मंगलवार सुबह 8 बजे तक जारी रहेगी। इसलिए यह संख्या और बढ़ने की उम्मीद है।
छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना में सत्र 2020-21 में 56 लाख छात्रों ने आवेदन किया है। ऑनलाइन आवेदन करने वाले प्रत्येक छात्र का डाटा एनआईसी अपने सॉफ्टवेयर से चेक करती है। सोमवार देर शाम तक 3.5 लाख छात्रों का डाटा निरस्त किया जा चुका है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, इसके मुख्य कारण पिछले साल का रिजल्ट अपलोड न करना, आय व जाति प्रमाणपत्र का संबंधित वेबसाइट से मिलान न हो पाना और पिछली कक्षा में न्यूनतम अंकों की अर्हता पूरी न कर पाना आदि हैं।
इस साल से निजी विश्वविद्यालयों व तकनीकी संस्थानों के लिए योजना का लाभ लेने के लिए नेशनल असिस्टमेंट एंड एक्रीडिटेशन काउंसिल (नैक) और नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रीडिटेशन (एनबीए) की ग्रेडिंग जरूरी है। जिन विश्वविद्यालयों और संस्थानों के पास इनकी ग्रेडिंग नहीं है, उनके छात्रों को भी योजना के दायरे से बाहर कर दिया गया है। समाज कल्याण विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि सामान्य व अनुसूचित जाति वर्ग के ही 1.70 लाख विद्यार्थियों का डाटा निरस्त हो चुका है। सभी वर्गों में यह संख्या 3.5 लाख को पार कर चुकी है।
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छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना में सत्र 2020-21 में 56 लाख छात्रों ने आवेदन किया है। ऑनलाइन आवेदन करने वाले प्रत्येक छात्र का डाटा एनआईसी अपने सॉफ्टवेयर से चेक करती है। सोमवार देर शाम तक 3.5 लाख छात्रों का डाटा निरस्त किया जा चुका है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, इसके मुख्य कारण पिछले साल का रिजल्ट अपलोड न करना, आय व जाति प्रमाणपत्र का संबंधित वेबसाइट से मिलान न हो पाना और पिछली कक्षा में न्यूनतम अंकों की अर्हता पूरी न कर पाना आदि हैं।
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इस साल से निजी विश्वविद्यालयों व तकनीकी संस्थानों के लिए योजना का लाभ लेने के लिए नेशनल असिस्टमेंट एंड एक्रीडिटेशन काउंसिल (नैक) और नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रीडिटेशन (एनबीए) की ग्रेडिंग जरूरी है। जिन विश्वविद्यालयों और संस्थानों के पास इनकी ग्रेडिंग नहीं है, उनके छात्रों को भी योजना के दायरे से बाहर कर दिया गया है। समाज कल्याण विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि सामान्य व अनुसूचित जाति वर्ग के ही 1.70 लाख विद्यार्थियों का डाटा निरस्त हो चुका है। सभी वर्गों में यह संख्या 3.5 लाख को पार कर चुकी है।
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