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UP: बिल्डरों का दिमाग ठिकाने लगाएगी सरकार, नहीं कर पाएंगे मनमानी

Thu, 18 Aug 2016 02:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 18 Aug 2016 02:08 AM IST
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apartment act to be amended.
demo pic - फोटो : अमर उजाला

अब बिल्डर ग्राहकों से मनमानी नहीं कर सकेंगे। अपार्टमेंट बनाते समय किए वादे को पूरा नहीं करने वाले बिल्डरों पर प्रदेश सरकार नकेल कसने जा रही है। इसके लिए पुराने अपार्टमेंट एक्ट में संशोधनों के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। हालांकि इस पर अंतिम मुहर विधानमंडल से लगेगी, लेकिन प्रस्ताव में संशोधन के जरिये इस कानून को अधिक पारदर्शी बनाने की पहल की गई है।

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सरकार के इस फैसले से जहां बिल्डरों को तय समय में आवंटियों को फ्लैट हैंडओवर करना होगा, वहीं शर्तों का भी पालन करना अनिवार्य हो जाएगा। प्रस्तावित संशोधनों में मल्टी कॉम्प्लेक्स और शॉपिंग मॉल को बाहर रखा गया है।
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ऐसे होती हैं मनमानियां
बिल्डर ग्राहक को जो नक्शा दिखाता है अक्सर उसे बदल दिया जाता है। समय पर कब्जा नहीं देने और ग्राहकों को दौड़ाने और मूल कीमत से ज्यादा वसूलने की शिकायतें आम हैं। अपार्टमेंट परिसर में पार्किंग, गैराज, छत और अन्य खाली व सम्मिलित जगहों के इस्तेमाल को लेकर भी मौजूदा कानून में जो भ्रामक स्थितियां है उसको खत्म कर अधिक पारदर्शी बनाया जा रहा है।

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ये रहे आपके फायदे के प्रस्ताव

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demo pic

एक साल में 60 फीसदी निर्माण पूरा करना होगा
सरकार 2010 में बने अपार्टमेंट एक्ट में संशोधन करके जनता के हित में एक्ट के प्रावधानों को सरल बनाएगी। इसके तहत अपार्टमेंट बनाने की घोषणा के एक साल के भीतर कम से कम 60 फीसदी निर्माण कार्य पूरा करने को अनिवार्य किया जाएगा। बिल्डर को अब अपार्टमेंट के हर यूनिट के हिसाब से पार्किंग और उसके लिए शुल्क का निर्धारण करना होगा।

एग्रीमेंट नहीं, रजिस्ट्री पर देना होगा कब्जा
संशोधन के बाद बिल्डर सिर्फ रजिस्ट्री पर ही फ्लैट का पजेशन दे सकेंगे। अभी एग्रीमेंट के आधार पर कब्जा दे दिया जाता है और रजिस्ट्री बाद में की जाती है। इससे आवंटियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

आवंटी को नहीं दौड़ा सकेंगे
संशोधन प्रस्ताव लागू होने के बाद बिल्डर कब्जा देने के लिए ग्राहकों को नहीं दौड़ा सकेंगे। उन्हें तय वक्त पर कब्जा देने के लिए पाबंद किया गया है। हालांकि यह समय सीमा केंद्र के रियल एस्टेट बिल के मुताबिक होगी। इसमें फ्लैट पर कब्जा देने की अधिकतम समय सीमा 5 साल तय है।

सुविधाओं को वक्त पर ट्रांसफर करने की पाबंदी

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demo pic - फोटो : amar ujala

अपार्टमेंट के आवंटियों की समिति गठित करने, रखरखाव और सुविधाएं मुहैया कराने से संबंधित प्रावधानों के स्पष्ट नहीं होने से विवाद खड़े होते रहते हैं।

दरअसल बिल्डर सिर्फ फ्लैट पर कब्जा देता है जबकि पूरा परिसर आवंटियों की समिति को ट्रांसफर नहीं करने से सुविधाओं और रखरखाव पर विवाद बना रहता है। नई व्यवस्था में अपार्टमेंट में उपलब्ध सभी सुविधाओं व परिसर के ट्रांसफर के लिए समय सीमा तय होगी।

एक फीसदी से ज्यादा नहीं होगी ट्रांसफर फीस
अभी अपार्टमेंट के विक्रय मूल्य का एक प्रतिशत और अधिकतम 2 प्रतिशत ट्रांसफर फीसतय है। संशोधन प्रस्ताव में ट्रांसफर फीस को एक प्रतिशत ही रखा गया है।

आवंटियों की समिति के पास रहेगी जमानत राशि

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demo pic

अपार्टमेंट के रखरखाव के नाम पर बिल्डर जमानत राशि के नाम पर आवंटियों से एकमुश्त रकम जमा कराते हैं, लेकिन उसका ब्याज नहीं देते हैं। इससे आवंटियों को नुकसान उठाना पड़ता है।

संशोधन में प्रावधान किया गया है कि अपार्टमेंट के आवंटियों की समिति का गठन होने पर सुविधाओं के ट्रांसफर के साथ ही बिल्डर को जमानत राशि भी समिति को ट्रांसफर करनी होगी।

बिल्डरों को भी राहत
डिजाइन में बदलाव पर ग्राहक से नहीं लेनी होगी इजाजत
संशोधन में बिल्डरों को भी राहत दी गई है। अब किसी फ्लैट की डिजाइन में बदलाव पर आवंटी की रजामंदी नहीं लेनी होगी। बिल्डर नक्शा पास करने वाले सक्षम अधिकारी की मंजूरी लेकर डिजाइन में बदलाव कर सकता है।

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