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Ansal API: इंटीग्रेटेड टाउनशिप की आड़ में हुआ फर्जीवाड़ा, मालिकाना हक 368.50 एकड़ का, पास कराया 477 एकड़

Mon, 10 Mar 2025 06:03 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Mon, 10 Mar 2025 06:03 AM IST
सार

Ansal API scam: अंसल एपीआई के प्रमोटर्स प्रणव अंसल व सुशील अंसल के अलावा कंपनी के वाइस प्रेसीडेंट विनय यादव के खिलाफ भी केस दर्ज कराया गया है। 
 

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Ansal API: Fraud happened under the guise of Integrated Township, ownership of 368.50 acres, got 477 acres pas
विवादों में अंसल एपीआई। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

अंसल प्रॉपर्टी एंड इन्फ्रास्टक्चर (अंसल एपीआई) ने प्रदेश की पहली इंटीग्रेटेड टाउनशिप ताज सुशांत सिटी की आड़ में कई फर्जीवाड़े किए। 368.50 एकड़ भूमि का मालिकाना हक था। लेकिन, धोखाधड़ी से 477 एकड़ भूमि में टाउनशिप का नक्शा पास करा लिया। नक्शा पास कराने के बाद विकास शुल्क नहीं दिया। सड़क, पार्क, एसटीपी भी नहीं बनाए।

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अंसल एपीआई के प्रमोटर्स प्रणव अंसल व सुशील अंसल के अलावा कंपनी के वाइस प्रेसीडेंट विनय यादव के खिलाफ कूटरचित दस्तावेज व धोखाधड़ी के आरोप में एडीए के नगर नियोजक प्रभोत कुमार पाल ने केस दर्ज कराया है। पुलिस को तीनों आरोपियों की तलाश है। इधर, प्रोजेक्ट में निवेश करने वाले 2 हजार से अधिक लोगों की रकम डूब रही है। भूखंड व भवनों की खरीद के 10 से 12 साल बाद भी कब्जा नहीं मिला।
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अंसल होम बायर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष केजी अग्रवाल ने बताया कि अंसल ने सर्किल रेट में भी फर्जीवाड़ा किया है। इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अवगत कराया है। अंसल ने अधूरा प्रोजेक्ट राजदरबार ग्रुप को हस्तांतरित किया। दोनों ही ग्रुप घर खरीदारों संग मनमानी कर रहे हैं। दोनों के विरुद्ध होम बायर्स एसोसिएशन ने एक ओर केस दर्ज कराने के लिए मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है।
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डीएम ने जारी की 4.33 करोड़ की आरसी
अंसल एपीआई ने ताज सुशांत सिटी का नक्शा पास कराने के बाद एडीए को विकास शुल्क अदा नहीं की। 4.33 करोड़ रुपये विकास शुल्क वसूली के लिए एडीए ने डीएम के माध्यम से अंसल ग्रुप प्रमोटर्स के खिलाफ रिकवरी सर्टिफिकेट (आरसी) जारी कराई। इसके अलावा बड़ी संख्या में निवेशकों ने अंसल एपीआई के खिलाफ रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (रेरा) की शरण ली है।


अंसल एपीआई की राह पर एक दर्जन बिल्डर्स
अंसल एपीआई की राह पर एक दर्जन से अधिक बिल्डर्स हैं। जिन्होंने न तय समय में प्रोजेक्ट पूरा किया। न निवेशकों को कब्जा मिला। विकास शुल्क डिफॉल्टर्स में रुनकता स्थित मौजा अकबरा में आस्था सिटी, मौजा घटवासन में पुष्पांजलि सिटी, ताजगंज में हेजल गार्डन, मौजा बसई में टीडीआई सिटी-3, चमरौली में निखिल पार्क रॉयल, मौजा रजरई में पुष्पांजलि प्लानेट, मौजा बाईंपुर में गणपति क्लासिक और रजरई में पुष्पांजलि आर्किड-2 आदि शामिल हैं। इनके ऊपर 50 करोड़ रुपये से अधिक विकास शुल्क एडीए का बकाया है।
 

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