अब बहुत ही कम पैसों में यूपी में होगी एंजियोप्लास्टी
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डॉ.राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आरएमएलआईएमएस) दिल की बीमारी से जूझ रहे गरीब मरीजों के लिए राहत की खबर लेकर आया है। वहां दिल की धमनियों की रुकावट दूर करने के लिए 50 हजार रुपये में एंजियोप्लास्टी संभव है।
लोहिया इंस्टीट्यूट के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ.भुवन चंद्र तिवारी ने बताया कि कम खर्च में एंजियोप्लास्टी की सुविधा इंडियन स्टेंट के कारण संभव हो सकी है। एंजियोग्राफी करने से पहले मरीज को बता दिया जाता है कि कौन-कौन से स्टेंट वह लगवा सकते हैं।
इसमें इंडियन स्टेंट लगभग 40 हजार रुपये और विदेशी स्टेंट 70 से 85 हजार रुपये तक के होते हैं। मरीज की सहमति के अनुसार ही उसे स्टेंट लगाया जाता है। डॉ.भुवन ने बताया कि कई भारतीय कंपनियां ये स्टेंट बना रही हैं।
ड्रग कोटेड इन स्टेंट की कीमत विदेशी की मुकाबले आधी है लेकिन गुणवत्ता उतनी ही है। लोहिया इंस्टीट्यूट में अपने 80 से 90 फीसदी मरीजों में ये यही स्टेंट लगाए हैं। इनके परिणाम अच्छे आए हैं।
उन्होंने बताया कि 2011 में पहली एंजियोप्लास्टी के दौरान मरीज को इंडियन स्टेंट लगाया था। फॉलोअप के लिए आए मरीज ने बताया कि वो अभी भी 40 किलोमीटर रोज साइकिल चलाता है। इस दौरान उसे कोई भी दिक्कत नहीं होती है।
अब आसान तरीके से हो सकेगी एंजियोग्राफी
लोहिया इंस्टीट्यूट के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.नवीन जामवाल ने हाथ के रास्ते एंजियोग्राफी को मरीजों के लिए सुलभ बताया है।
उन्होंने बताया कि दिल की धमनियों की रुकावट को दूर करने के लिए उपयोग में लाई जाने वाली कार्डिएक कैथराइजेशन तकनीक में मरीज को चार घंटे तक बिना हिले-डुले पीठ के बल लेटे रहना पड़ता है।
जिससे अधिक खून न निकले। इसमें ग्रोइन (जांघ को शरीर से जोड़ने वाला हिस्सा)क्षेत्र में चीरा लगाकर उसके जरिए कैथेटर डाला जाता है। लेकिन हाथ के रास्ते (ट्रांस रेडियल इंटरवेंशन) में खून निकलने का खतरा कम रहता है।
1500 से अधिक रोगियों का हाथ के रास्ते (रिस्ट रूट) से इलाज कर चुके डॉ. जामवाल ने बताया कि एंजियोग्राफी कराने वाले मरीजों के अध्ययन में पाया गया है कि ग्रोइन रूट से एंजियोग्राफी कराने वाले 1.8 फीसदी मरीजों में रक्तस्राव की समस्या होती है।
जबकि रेडियल रूट से ये संभावना सिर्फ 0.8 फीसदी मरीजों में होती है। ऐसे में मरीजों को हाथ के रास्ते एंजियोग्राफी करने से परेशानी कम होती और इलाज का खर्च भी कम आता है। डॉ. भुवन चंद्र तिवारी ने बताया कि बीते तीन माह में लोहिया इंस्टीट्यूट में 500 से अधिक मरीजों की एंजियोग्राफी की जा चुकी है।
जागरूकता के लिए देंगे प्रशिक्षण
डॉ.नवीन जामवाल ने बताया कि हाथ से एंजियोग्राफी के बारे में प्रदेश में जागरूकता बहुत कम है। लखनऊ में ही सिर्फ 20 हजार एंजियोग्र्राफी होती हैं लेकिन अधिकतर मरीजों में ग्रोइन क्षेत्र से ही एंजियोग्राफी की जाती है।
इस तकनीक से ग्रोइन से कैथेटर डालने पर रक्तस्राव अधिक होने की दिक्कत भी होती थी। क्योंकि त्वचा के अधिक नीचे होने के कारण धमनी से रक्तस्राव को रोकने के लिए आवश्यक दबाव बनाने में दिक्कत होती है। इसलिए मरीजों को स्वस्थ्य होने के लिए कुछ घंटे तक पूरी तरह से लेटे रहने की जरूरत होती है।
जबकि रेडियल धमनी छोटी और त्वचा की सतह के बिलकुल नीचे होने के कारण रक्तस्राव रोकने के लिए दबाव बनाने पर जल्दी प्रतिक्रिया मिलती है। लेकिन इस रेडियल रूट से एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी करने वाले विशेषज्ञों की कमी के कारण मरीजों को इसका लाभ कम मिल रहा है। कलाई के माध्यम से एंजियोग्र्र्राफी को बढ़ावा देने के लिए कार्यशालाओं को आयोजन भी किया जाएगा।