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PGI Lucknow: दिल ही नहीं, पैर की भी होती है एंजियोप्लास्टी, डायबिटीक फुट मामले में बेहद उपयोगी है तकनीक

Sun, 26 Nov 2023 12:27 PM IST
ishwar ashish माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ
माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sun, 26 Nov 2023 12:27 PM IST
सार

संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान में डायबिटीक फुट पर सीमएई का आयोजन किया गया। जिसमें विशेषज्ञों ने डायबिटीक फुट पर जानकारी दी।

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Angioplasty of diabetic foot, know what specialist say.
डायबिटिक फुट। - फोटो : istock

विस्तार

आमतौर पर एंजियोप्लास्टी का उपयोग दिल संबंधी समस्या होने पर किया जाता है, लेकिन डायबिटीक फुट (मधुमेह पैर) के मामले में भी यह तकनीक बेहद उपयोगी है। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान में डायबिटीक फुट पर आयोजित सीएमई में कर्नाटक के डायबिटीक फुट सर्जन, मधुमेह अंग बचाव विभाग के एचओडी डॉ. सुनील कारी ने यह जानकारी दी।

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डॉ. कारी ने बताया कि मधुमेह की वजह से रक्त वाहिका में वसा, कोलेस्ट्रॉल, कैल्शियम जम जाता है। ऐसे में दिल की तरह पैर में भी बैलून एंजियोप्लास्टी कर इस्टेंट यानी धातु की जाली वाली ट्यूब डालते हैं। इससे रक्त वाहिका में खून का प्रवाह सामान्य हो जाता है।
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मुंबई के डॉ. सुरेश पुरोहित ने बताया कि हायपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी (एचबीओटी) से भी घाव जल्दी भरता है। जिस अंग में ऑक्सीजन कम होती है, वहां इसका उपयोग किया जाता है। दिल्ली के डॉ. अशोक दामिर ने बताया कि घाव भरने में एंटीबायोटिक के लंबे समय तक इस्तेमाल की कोई भूमिका नहीं होती है और संक्रमण का संकेत मिलने पर ही इसे शुरू करना चाहिए।

कार्यक्रम में ये रहे मौजूद

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प्रोफेसर ज्ञानचंद। - फोटो : अमर उजाला

इससे पहले संस्थान के निदेशक प्रो. आरके धीमन ने सीएमई का शुभारंभ किया। एंडोक्राइन सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रो. गौरव अग्रवाल ने बताया कि डायबिटीक फुट के इलाज की सुविधा हमारे विभाग में बहुत अच्छी है। प्रो. अंकुर भटनागर, डॉ. रजनीकांत, डॉ. सुजीत गौतम सहित एसजीपीजीआई और अन्य संस्थानों के संकाय सदस्यों ने भी मधुमेह पैर प्रबंधन पर अनुभव बताए। डॉ. ज्ञानचंद ने धन्यवाद दिया।

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