भाजपा के घोषणा पत्र में संकल्प चुनावी, दिशा राष्ट्रवाद
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भाजपा के लोक कल्याण संकल्प पत्र के रूप में जारी घोषणा पत्र के वादे व संकल्प भले ही विधानसभा चुनाव के लिहाज से किए गए हों, लेकिन उनकी दिशा राष्ट्रवाद की ही दिखाई दे रही है।
यूपी की सत्ता पर काबिज होने के लिए सोशल इंजीनियरिंग के जरिए हर वर्ग को जोड़ने की कोशिश की गई है। उन नामों को आगे लाकर योजनाएं चलाने का संकल्प जताया गया है जो क्रांतिकारी, समाज सुधारक, राष्ट्रभक्त के साथ-साथ अपने-अपने समाज के लिए सम्मान व स्वाभिमान के प्रतीक बन चुके हैं। बाबा साहब अंबेडकर और दीनदयाल उपाध्याय के साथ ही एकलव्य और भामाशाह के नाम से नए काम शुरू किए जाएंगे।
केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ सभी को मुहैया कराने के लिए प्रत्येक चार गांव पर ‘चंद्रेशखर आजाद ग्रामीण विकास सचिवालय’ स्थापित करने की बात कही गई है। इससे लोगों को जिला मुख्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
रोशन सिंह के नाम पर पुलिसकर्मियों को आवास
पुलिसकर्मियों व उनके परिवार वालों को प्रदेश के कई शहरों में सभी जरूरी सुविधाओं से युक्त आवास मुहैया कराने के लिए क्रांतिकारी ‘शहीद रोशन सिंह रेजिडेंशियल टाउनशिप’ शुरू की जाएगी।
इन महापुरुषों के नाम पर ये योजनाएं
अहिल्याबाई से लेकर झलकारीबाई तक के नाम से योजना
अवंतीबाई और झलकारी बाई ने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वहीं, अहिल्याबाई होल्कर ने अपने शासन में शिक्षा और संस्कृति व सांस्कृतिक कार्यों को काफी महत्व दिया था।
भाजपा ने सभी लड़कियों को स्नातक तक मुफ्त शिक्षा देने के लिए ‘अहिल्याबाई कन्या नि:शुल्क शिक्षा योजना’ शुरू करने की बात कही है। वहीं, महिलाओं की सुरक्षा के लिए अवंती बाई, झलकारी बाई और ऊदा देवी के नाम पर तीन नई पुलिस बटालियनें बनाई जाएंगी।
एक तरफ कबीर तो दूसरी तरफ एकलव्य
संकल्प पत्र में आंचलिक भाषाओं व लोक विधाओं के विकास के लिए कबीर दास के नाम पर ‘कबीर अकादमी’ की स्थापना की बात कही गई है। वहीं खेल और खिलाड़ियों को सुविधाएं मुहैया कराने के लिए 500 करोड़ रुपये के ‘एकलव्य क्रीड़ा कोष’ की स्थापना की जाएगी।
अंबेडकर के नाम पर गरीब परिवारों के लिए शिक्षा कोष
गरीब परिवारों के छात्रों की उच्च शिक्षा के लिए 500 करोड़ के कोष से ‘बाबा साहेब अंबेडकर छात्रवृत्ति’ देने के साथ ही महामना पंडित मदनमोहन मालवीय संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी।
भूमिहीन कृषि मजदूरों को दो लाख रुपये तक बीमा के लिए ‘दीनदयाल सुरक्षा बीमा योजना’ की बात कही गई है। बढ़ई, मोची, दर्जी जैसे काम करने वालों के लिए ‘विश्वकर्मा श्रम सम्मान’ शुरू किया जाएगा।
इसके लिए 1000 करोड़ रुपये के कोष की स्थापना की जाएगी। व्यापारियों की समस्याओं के समाधान और हितों की रक्षा के लिए ‘भामाशाह व्यापार कल्याण बोर्ड’ बनाया जाएगा।