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लखनऊ : काला इमामबाड़ा की जमीन पर बनी छह जर्जर दुकानें अचानक ढहीं, दुकानदार बोले रची गई साजिश
Mon, 21 Dec 2020 10:29 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Mon, 21 Dec 2020 10:29 PM IST
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जमींदोज हुई मार्केट।
- फोटो : amar ujala
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लखनऊ में ठाकुरगंज में काला इमामबाड़ा की जमीन पर 40 साल पहले बनी छह जर्जर दुकानें सोमवार सुबह अचानक ढह गईं। इससे आसपास के इलाके में अफरातफरी मच गई। गनीमत रही कि दुकान के बाहर सो रहा रामचंद्र का परिवार बाल-बाल बच गया। हादसे में लाखों रुपये के ऑटो पार्ट्स मलबे में दबकर खराब हो गए। सूचना पर पहुंची पुलिस व अग्निशमन की टीम ने क्रेन व जेसीबी की मदद से सामान को बाहर निकाला। दुकानदारों ने साजिशन दुकान गिराने की तहरीर थाने में दी है। पुलिस जांच कर रही है।
एसीपी चौक इंद्र प्रकाश सिंह के मुताबिक, कोनेश्वर चौराहे पर काला इमामबाड़ा ट्रस्ट की खाली जमीन पर दर्जनभर से अधिक दुकानों का निर्माण 40 फीट गड्ढे में पिलर देकर किया गया था। सुबह करीब आठ बजे छह दुकानें भरभराकर गिर गईं। हादसे के वक्त दुकान के अंदर कोई नहीं था। अचानक तेज धमाके की आवाज सुनकर राहगीर रुक गए। पलटकर देखा तो धुएं का गुबार था और दुकानें जमींदोज हो चुकी थीं। राहगीरों की सूचना पर पुलिस और पीड़ित दुकानदार मौके पर पहुंचे।
इनकी दुकानें हुईं जमींदोज
पुलिस के मुताबिक, हादसे में छह दुकानें जमींदोज हो गईं। इनमें लाजपत नगर निवासी कमल की दो दुकानें। मलिहाबाद के राहुल, एसके ऑटो पार्ट्स, माली खां सराय निवासी अवनीश अग्निहोत्री और चौक के वीरेंद्र की एक-एक दुकानें शामिल हैं। दुकानदारों के मुताबिक, किराए लेने के लिए दुबग्गा की रहने वाली मिथिलेश चौहान नाम की महिला आती थी।
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एसीपी चौक इंद्र प्रकाश सिंह के मुताबिक, कोनेश्वर चौराहे पर काला इमामबाड़ा ट्रस्ट की खाली जमीन पर दर्जनभर से अधिक दुकानों का निर्माण 40 फीट गड्ढे में पिलर देकर किया गया था। सुबह करीब आठ बजे छह दुकानें भरभराकर गिर गईं। हादसे के वक्त दुकान के अंदर कोई नहीं था। अचानक तेज धमाके की आवाज सुनकर राहगीर रुक गए। पलटकर देखा तो धुएं का गुबार था और दुकानें जमींदोज हो चुकी थीं। राहगीरों की सूचना पर पुलिस और पीड़ित दुकानदार मौके पर पहुंचे।
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इनकी दुकानें हुईं जमींदोज
पुलिस के मुताबिक, हादसे में छह दुकानें जमींदोज हो गईं। इनमें लाजपत नगर निवासी कमल की दो दुकानें। मलिहाबाद के राहुल, एसके ऑटो पार्ट्स, माली खां सराय निवासी अवनीश अग्निहोत्री और चौक के वीरेंद्र की एक-एक दुकानें शामिल हैं। दुकानदारों के मुताबिक, किराए लेने के लिए दुबग्गा की रहने वाली मिथिलेश चौहान नाम की महिला आती थी।
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हादसे की सूचना मिलते ही उड़ गई नींद
आटोपार्ट्स व्यवसायी कमल, राहुल और अवनीश के मुताबिक, हादसे की सूचना मिलते ही उनकी नींद उड़ गई। आननफानन दुकान पर पहुंचे तो मंजर देख बदहवाश हो गए। बताया कि दुकान में काफी सामान व कुछ नकद भी रखा था। दुकानें धंसने से सारा माल मलबे के साथ गहरे गड्ढे में चला गया। डिब्बे खुलने से सारा ऑयल बह चुका था। पीड़ितों ने बताया कि जर्जर दुकानों की मरम्मत कराने की कोशिश पर हर बार ट्रस्ट ने आपत्ति कर रोक लगा दी। विरोध पर ट्रस्ट पुलिस से शिकायत कर देते थे।
जर्जर हो चुके थे पिलर, अधिक थी गहराई
स्थानीय लोगों ने बताया कि तीन मंजिला ऊंचे पिलर खड़े करके दुकानें बनीं थीं। पिलर जर्जर हो चुके थे। गड्ढों की गहराई काफी अधिक थी और मिट्टी भी नहीं भरी गई थी। वहीं, सूचना पर एकमात्र रॉयल फैमिली ऑफ अवध की अध्यक्ष प्रिंसेस फरहाना मालिक ने मौके पर पहुंचकर घटना पर दुख जताया। उन्होंने बताया कि कुछ वर्ष पहले काला इमामबाड़ा पहले क्षतिग्रस्त हो गया था। देखरेख के लिए उन्होंने कई बार शासन व प्रशासन को पत्र लिखा। पिछले साल प्रधानमंत्री को भी चिट्ठी लिखी थी, लेकिन मामला सिफर रहा।
बाल-बाल बचा परिवार
हादसे में दुकान के बाहर रहने वाला रामचंद्र का परिवार बाल-बाल बच गया। रामचंद्र के मुताबिक, वह पत्नी रामदुलारी, बेटे वीरेंद्र और बेटी सुषमा व नाती वीर संग लेटे थे। पत्नी बाहर बर्तन साफ कर रही थी। बेटी व नाती सो रहे थे। अचानक मलबा गिर गया। इससे बेटे की बाइक क्षतिग्रस्त हो गई जबकि पत्नी को हल्की चोटें आई हैं।
जर्जर हो चुके थे पिलर, अधिक थी गहराई
स्थानीय लोगों ने बताया कि तीन मंजिला ऊंचे पिलर खड़े करके दुकानें बनीं थीं। पिलर जर्जर हो चुके थे। गड्ढों की गहराई काफी अधिक थी और मिट्टी भी नहीं भरी गई थी। वहीं, सूचना पर एकमात्र रॉयल फैमिली ऑफ अवध की अध्यक्ष प्रिंसेस फरहाना मालिक ने मौके पर पहुंचकर घटना पर दुख जताया। उन्होंने बताया कि कुछ वर्ष पहले काला इमामबाड़ा पहले क्षतिग्रस्त हो गया था। देखरेख के लिए उन्होंने कई बार शासन व प्रशासन को पत्र लिखा। पिछले साल प्रधानमंत्री को भी चिट्ठी लिखी थी, लेकिन मामला सिफर रहा।
बाल-बाल बचा परिवार
हादसे में दुकान के बाहर रहने वाला रामचंद्र का परिवार बाल-बाल बच गया। रामचंद्र के मुताबिक, वह पत्नी रामदुलारी, बेटे वीरेंद्र और बेटी सुषमा व नाती वीर संग लेटे थे। पत्नी बाहर बर्तन साफ कर रही थी। बेटी व नाती सो रहे थे। अचानक मलबा गिर गया। इससे बेटे की बाइक क्षतिग्रस्त हो गई जबकि पत्नी को हल्की चोटें आई हैं।