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यूपी का रण : अपराध नियंत्रण का दावा और कसौटी पर कानून-व्यवस्था, पृष्ठभूमि में सपा-बसपा सरकार

Sat, 25 Dec 2021 06:03 AM IST
दुष्यंत शर्मा सैयद यासिर रजा, लखनऊ 
सैयद यासिर रजा, लखनऊ  Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 25 Dec 2021 06:03 AM IST
सार

औद्योगीकरण, निवेश, रोजगार, शिक्षा व्यवस्था, सेहत... ये मुद्दे हर चुनाव में अहम होते हैं और सरकार की छवि बनाते-बिगाड़ते भी हैं। मगर कानून-व्यवस्था एक ऐसा मुद्दा है, जो किसी भी सरकार की सबसे बड़ी चिंता होती है। खासकर तब जब उसी को मुद्दा बनाकर वह सत्ता हासिल करती है। सरकार ने अपराध पर लगाम लगाने का पुरजोर दावा किया है, मगर मतदाता इसे मायावती और अखिलेश शासन की कानून-व्यवस्था की स्थिति से परखेगा और निर्णय लेगा।

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An eye on the social, political and law n order situation of the state on the pretext of the upcoming UP election
सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

वैसे तो कानून-व्यवस्था के लिए लोग बसपा सुप्रीमो मायावती के शासन को याद करते हैं। मायावती की छवि सख्त प्रशासक की थी। माफिया के खिलाफ कार्रवाई करने के साथ वे अपनों पर भी कार्रवाई करने में नहीं हिचकती थीं। मगर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति ने माफिया और अपराधियों में खौफ पैदा किया है। बेटियों की सुरक्षा के लिए चलाए गए एंटी रोमियो स्क्वॉयड अभियान के चलते भी महिलाओं के खिलाफ अपराध में कमी आई है।

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अखिलेश सरकार में अपराधों की स्थिति और कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाकर सत्ता में आई योगी सरकार ने अपराधियों के खिलाफ कोई मुरव्वत नहीं करते हुए उनके एनकाउंटर करने पर अधिक जोर दिया। मेरठ में चोरी के वाहनों को काटकर बेचने वाले बाजार पर शिंकजा कसा। बाजार चला रहे 31 से ज्यादा माफिया की 40 करोड़ की संपत्ति कुर्क की गई। मुख्तार अंसारी, विजय मिश्रा, अतीक अहमद जैसे माफिया व अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की गई। 1800 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई। दावा किया गया कि इससे प्रदेश का माहौल बेहतर हुआ और निवेश बढ़ने के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा हुए। 
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हालांकि, कानपुर के बिकरू कांड, सोनभद्र के उभ्भा कांड, बुलंदशहर में इंस्पेक्टर सुबोध की हत्या, रायबरेली में पांच लोगों की हत्या और लखीमपुर में किसानों पर गाड़ी चढ़ाने जैसी बड़ी घटनाओं ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया। हाथरस में दलित युवती से दुष्कर्म और हत्या के मामले ने भी सरकार को कठघरे में खड़ा किया। अफसरों ने तो बिना परिवार की मर्जी से रात में अंतिम संस्कार कर दिया। पर, इन सबके बावजूद आम लोगों के अनुसार कानून-व्यवस्था की रेटिंग बेहतर हुई है।
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पहले बात अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा सरकार की। अखिलेश के सत्ता में आने के कुछ ही दिनों बाद मुजफ्फरनगर दंगे ने एक बदनुमा दाग लगा दिया। प्रतापगढ़ में सीओ जियाउल हक की हत्या की घटना हो या फिर मथुरा का जवाहर बाग कांड... इनसे अखिलेश की सरकार कठघरे में रही...

  • अखिलेश सरकार ने वीमेन पावर लाइन-1090 की शुरुआत की, जहां महिलाएं एवं लड़कियां बिना किसी डर के अपनी शिकायत दर्ज करा सकती थीं। उनकी पहचान गोपनीय रखी जाती है।
  • इसी तरह किसी भी घटना पर पुलिस तत्काल मौके पर पहुंचे, इसके लिए यूपी -100 सेवा को नया रूप दिया गया। पहले जो 100 नंबर जिला स्तर पर काम करता था, उसे केंद्रीयकृत किया गया और लखनऊ में यूपी -100 की शुरुआत की गई।
  • हालांकि ,चुनाव हुए तो अखिलेश कानून-व्यवस्था की कसौटी पर पास नहीं हो पाए।
  • वहीं, मायावती राज में मंत्री हो, अधिकारी हो, माफिया हो या अपराधी, सभी उनके नाम से ही खौफ खाते थे।
  • उन्होंने दाग लगने पर अपने ही मंत्रियों और विधायकों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।
  • रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के खिलाफ मायावती ने जो कार्रवाई की, वह आज भी नजीर है। अपने ही मंत्रियों और विधायकों के खिलाफ कार्रवाई करने में भी वह नहीं हिचकती थीं।
  • हालांकि, मायावती के शासनकाल के अंतिम दिनों में एक के बाद एक तीन सीएमओ की हत्या हुई। इसने सरकार की काफी किरकिरी कराई। नतीजा यह निकला कि 2012 में मायावती को हार का सामना करना पड़ा।

मुद्दा : लॉ एंड ऑर्डर

यूपी सरकार के दावे...
  • महिलाओं के खिलाफ अपराधों में कमी तो आई ही, हत्या, लूट और डकैती की वारदातें भी कम हुईं (एनसीआरबी-2020 की रिपोर्ट)
  • 9.7% कमी आई है दुष्कर्म के मामलों में पिछले एक साल में, वर्ष 2013 से तुलना करें तो 9.2% की कमी
  • 4% कम रहे छेड़खानी के मामले, राष्ट्रीय औसत 13 फीसदी रहा, वर्ष 2013 के मुकाबले 9.2 फीसदी की कमी
  • 21 फीसदी की कमी आई महिला उत्पीड़न के मामलों में, वर्ष 2013 से तुलना करें तो 64 फीसदी कम
  • 506% की कमी आई दहेज हत्या के मामलों में
  • 36वें स्थान पर है तेजाब हमलों के मामले में यूपी
  • 29वें स्थान पर है बच्चों के खिलाफ अपराध में
  • (28.9 फीसदी राष्ट्रीय औसत के मुकाबले 17.9 फीसदी रहा यूपी में)
  • 11.6 फीसदी कम केस दर्ज हुए पॉक्सो में     वर्ष 2019 के मुकाबले
  • यूपी में सर्वाधिक अपराधियों पर दोषसिद्ध हुए।
महिलाओं  की सुरक्षा महिलाओं के हाथ...
महिलाओं से जुड़े अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए महिलाओं को ही मैदान में उतारा गया। मिशन शक्ति के तहत लखनऊ में पिंक पेट्रोलिंग शुरू की गई। इसके अलावा भी कई इंतजाम किए गए। पिंक बूथ बनाए गए। थानों में महिला डेस्क बनाए गए।

...लेकिन हकीकत यह भी है कि यूपी में महिला अपराध सबसे ज्यादा हैं

प्रदेश                                 केस
यूपी                                    49,385
प. बंगाल                             36,439
राजस्थान                            34,535
महाराष्ट्र                              31,954
असम                                 26,352

वर्ष 2016 में 49,262 केस सामने आए थे महिला अपराध के

 

पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने कहा - पुलिसिंग मॉडर्न हुई जनता का भरोसा भी बढ़ा पर अब भी काफी बदलाव की जरूरत

पहले पश्चिमी यूपी अपराध ग्रस्त क्षेत्र के रूप में कुख्यात था। सोनभद्र, चंदौली व मिर्जापुर में नक्सलवादी चरमपंथियों का बोलबाला था। अपहरण का गिरोह सक्रिय था। डकैती, लूट, फिरौती के लिए अपहरण से जनता आतंकित थी। कभी-कभी तो अपराधियों का पलड़ा पुलिस पर भारी पड़ता नजर आता था। मगर, वृहद कार्ययोजना के साथ दक्ष अफसरों ने सुनियोजित तरीके से अभियान चलाकर अपराध व अपराधियों पर प्रभावी नियंत्रण किया। इससे जनता में सुरक्षा की भावना आई और पुलिस का मनोबल बढ़ा।

खाकी नई तकनीक और आधुनिकीकरण की ओर तो बढ़ी, लेकिन कभी-कभी मानवाधिकार हनन के मामले भी सामने आए। महिलाओं पर हो रहे अत्याचार और अपराध की शिकायतें भी मिलीं। साइबर क्राइम भी कई गुना बढ़ा है। परंतु संतोष का विषय है कि यूपी पुलिस के अधिकारियों ने कार्यशालाएं और प्रशिक्षण अभियान चलाकर सुनिश्चित किया कि ऐसे मामले पंजीकृत हों और सही तरीके से विवेचना हो सके। आज यूपी पुलिस की तारीफ हो रही है कि किस तरह से उसने आधुनिक आविष्कारों एवं तकनीकों से पुलिसिंग को अत्याधुनिक बनाया है। जिस टेक्नोलॉजी की सर्वाधिक चर्चा है, वह है ड्रोन। इसकी मदद से मेले, धरना प्रदर्शन, जुलूस के दौरान रियल टाइम सूचना कंट्रोल रूम तक पहुंच जाती है। ज्यादातर कंट्रोल रूम भी स्मार्ट हो गए हैं।

बिग डाटा एनालिटिक्स और मशीन लर्निंग का भरपूर प्रयोग हो रहा है। चेहरा पहचानने वाले सॉफ्टवेयर के जरिए वीआईपी ड्यूटी के दौरान आपराधिक एवं अवांछनीय व्यक्तियों को भली-भांति पहचाना जा सकता है। संदिग्ध वस्तुओं एवं बम आदि को निष्कि्रय कराने में रोबोटिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है।

आरोपियों के दोषमुक्त होने वाले मामलों की हो समीक्षा
इसके बावजूद जो चुनौतियां आ रही हैं, वे अत्यंत गंभीर हैं। यह बताया जाता है कि न्यायालय में आशातीत सफलता प्राप्त नहीं हो रही है। इसके लिए अभियोजन शाखा को और एक्टिव होना पड़ेगा। आरोपियों के दोषमुक्त होने के हर मामले में यह समीक्षा की जाए कि किन परिस्थितियों में ऐसा हुआ। यह पता किया जाए कि किस स्तर पर कमी रही। विवेचना के स्तर पर कमी रही हो या फिर अभियोजन पक्ष के, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। महत्वपूर्ण मामलों में प्राथमिकता के आधार पर अभियोजन सुनिश्चित किया जाए और यह भी सुनिश्चित किया जाए कि गवाह व पैरवी ऐसी हो कि दोषियों को जल्द से जल्द दंडित किया जा सके। इससे जनता में पुलिस के प्रति विश्वास का भाव जागृत होता है।

साइबर पुलिस को तकनीकी रूप से और दक्ष होना होगा
साइबर फ्राॅड के तरीके बदल रहे हैं। मादक पदार्थों की बिक्री इंटरनेट पर हो रही है। इंटरनेट से मानव तस्करी और वेश्यावृत्ति की शिकायतें भी मिल रही हैं। इसके लिए साइबर पुलिस को तकनीकी रूप से और दक्ष होना होगा, ताकि युवा वर्ग को इससे सुरक्षित किया जा सके।

महिलाओं से जुड़े मामलों में लचर विवेचना पर हो कार्रवाई
महिलाओं के संबंध में 1090 के सकारात्मक परिणाम आए, लेकिन छेड़खानी व तेजाब फेंकने जैसी घटनाएं अब भी हो रही हैं। इन सब पर अधिक कार्रवाई की आवश्यकता है। निर्भया कांड के बाद 13 क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट में यह तथ्य जोड़ा गया कि अगर यौन अपराधों में पंजीकरण से लेकर विवेचना में कर्तव्य के प्रति उदासीनता दिखे तो दोषी पुलिसकर्मी पर आईपीसी की धारा 166ए के तहत कार्रवाई होनी चाहिए, जो अभी नहीं हो रही है।

खाकी को दागदार करने वालों पर हो सख्ती
गोरखपुर में एक व्यवसायी की हत्या, लखनऊ में एक व्यक्ति की गोमती नगर में मुठभेड़ के नाम पर हत्या होना, पुलिस कर्मचारियों के अश्लील वीडियो का वायरल होना, यह दिखाता है कि कहीं न कहीं आंतरिक सतर्कता और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। ये घटनाएं खाकी पर एक बदनुमा धब्बा हैं। ऐसी पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए। जहां कहीं भी त्रुटि हो उस पर प्रभावी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि यूपी की पुलिस दुनिया की विशाल फोर्स ही नहीं बल्कि सर्वश्रेष्ठ फोर्स भी हो। 

इनसे हुई  किरकिरी...


बिकरू कांड : आठ पुलिसकर्मियों की हत्या
2 जुलाई 2020 की आधी रात को कानपुर के बिकरू गांव में गैंगस्टर विकास दुबे और उसके गुर्गों ने डीएसपी और एसओ समेत 8 पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी। पुलिस ने विकास दुबे समेत छह बदमाशों को ढेर कर दिया था। इसी मामले में विकास दुबे के साथी अमर दुबे की पत्नी खुशी दुबे को जेल भेजने को लेकर पुलिस की आलोचना भी हुई। विपक्ष ने तो ब्राह्मणों को प्रताड़ित करने तक का आरोप लगाया। इस मामले में 45 आरोपी जेल में बंद हैं।

उभ्भा कांड :  विवाद में 11 आदिवासी मारे गए
17 जुलाई 2019 को सोनभद्र जिले के उभ्भा गांव में एक सोसाइटी की जमीन पर कब्जे को लेकर हुए विवाद में दबंगों ने गोली मारकर 11 आदिवासियों की हत्या कर दी। इस प्रकरण में 70 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें से आधे से ज्यादा रिहा भी हो चुके हैं। इस मामले में भी जमकर राजनीति हुई।  प्रियंका गांधी को मौके पर जाने से रोक दिया गया था।

उन्नाव कांड :  विधायक फंसे दुष्कर्म व हत्या में
उन्नाव के माखी थाना क्षेत्र में 4 जून 2017 को नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म का सनसनीखेज मामला सामने आया। आरोप भाजपा के तत्कालीन विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर लगा। कुलदीप के साथियों ने पीड़िता के पिता की जमकर पिटाई की। झूठा मुकदमा कायम कराकर उसे जेल भेजवा दिया। उनकी जेल में मौत हो गई। मामला सीबीआई को सौंपा गया। सीबीआई ने उसी दिन कुलदीप सेंगर को गिरफ्तार कर लिया था। सेंगर अभी जेल में है।

अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी ने कहा- अपराध और अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस

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अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी - फोटो : amar ujala

अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी का कहना है कि कानून-व्यवस्था को  चुस्त-दुरुस्त रखने के साथ-साथ अपराध और अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की पॉलिसी अपनाई गई। पुलिस कर्मियों और उनके परिवारीजनों को मूलभूत  सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। वे कहते हैं, पुलिस कर्मियों की बुनियादी जरूरतों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के  साथ निर्णय लिए। उन निर्णयों को तत्परता के साथ पूरा कराया जा रहा है।

कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर सख्ती का संदेश देने के लिए क्या कदम उठाए गए?
कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए सख्त कानून बनाए गए। मसलन हिंसा या उपद्रव के दौरान हुए नुकसान की भरपाई दंगाइयों से कराए जाने के लिए कानून  बनाए गए। अवैध धर्मांतरण को रोकने के लिए कानून बनाया गया। यातायात के  क्षेत्र में भी काफी काम किए गए हैं। पूरे प्रदेश में ई-चालान की सुविधा शुरू की गई। अब तक 65 लाख से अधिक वाहनों का ई-चालान पूरे प्रदेश में किया  जा चुका है। यातायात नियमों को तोड़ने वालों से 334 करोड़ रुपये जुर्माने के रूप में वसूले गए हैं।

पुलिस में सुधार के लिए क्या व्यवस्थाएं की गईं?
जहां तक आम लोगों की सुरक्षा का सवाल है तो इसके लिए विशेष सुरक्षा बल का गठन किया गया। एसडीआरएफ का गठन किया गया। पीएसी में निष्क्रिय हो चुकी बटालियन को फिर से सक्रिय किया गया। वहीं पुलिस कर्मियों की मूलभूत सुविधाओं का भी ध्यान रखा गया। पुलिस कर्मियों के पास रहने के लिए आवास नहीं थे। इसके लिए 317 थानों पर पुरुषों और महिलाओं के लिए बैरक हॉस्टल व विवेचना कक्ष बनवाए गए। पुलिस लाइन में महिलाओं और पुरुषों के लिए 44-44  बैरक बनवाए गए। 35 ट्रांजिट हॉस्टल बनवाए गए। पीएसी कर्मियों के लिए 200 की क्षमता वाले 31 बैरक बनवाए गए। अभी 4893 करोड़ रुपये की लागत के 816 ऐसे निर्माण कार्य चल रहे हैं। सभी मंडलों के मुख्यालय पर विधि विज्ञान प्रयोगशाला का निर्माण भी एक बड़ा कदम है।

क्या उल्लेखनीय कार्य हो रहे हैं, जो बदलाव लाएंगे?
आने वाले दिनों में पुलिस की स्थिति और बेहतर हो, इसके लिए काम किए जा रहे हैं। मसलन, प्रदेश में विधि विज्ञान संस्थान की स्थापना की जा रही है।  संस्थान में नए वर्ष में पाठ्यक्रम शुरू कराया जाएगा। इसके लिए पदों का सृजन कर दिया गया है। महिला पीएसी बटालियन भी लखनऊ, बदायूं ओर गोरखपुर में शुरू की जा रही है, जो आने वाले दिनों में बदलाव की कहानी कहते दिखेंगी।

पुलिस का रिस्पॉन्स टाइम सुधारने के लिए क्या किया गया?
यूपी-112 को मजबूत किया गया है। नई गाड़ियां उपलब्ध कराई गईं। रिस्पॉन्स  टाइम को 10 मिनट से भी कम किया गया है। कोविड काल में यूपी-112 की पीआरवी ने 6 लाख 46 हजार से अधिक लोगों को मदद पहुंचाई।

 

डीजीपी मुकुल गोयल कहते हैं- कानून-व्यवस्था अब कोई मुद्दा नहीं

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एक बैठक करते डीजीपी मुकुल गोयल - फोटो : amar ujala

कानून-व्यवस्था में सुधार हुआ है, इससे कोई इनकार नहीं कर सकता।  अपराधियों पर कार्रवाई हुई। एनकाउंटर हुए। पुलिस की एक अलग छवि उभरकर आई। ...तो कई सवाल अब भी हैं। साइबर अपराध बढ़ा है। महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े सवाल भी उठते ही रहते हैं। तो कई मामले ऐसे भी आए जिनसे पुलिस की बेहतर होती छवि दरकी। खाकी के दामन पर दाग लगे। पेश है इन्हीं सब मुद्दों पर पुलिस महानिदेशक मुकुल गोयल से बातचीत के प्रमुख अंश....

कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर कितना बदलाव आया है?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में कानून-व्यवस्था के क्षेत्र में जो काम हुए हैं, उनका असर जमीन पर दिख रहा है। मौजूदा समय में कानून-व्यवस्था कोई मुद्दा नहीं है। अपराधियों में भय है। जिन अपराधियों ने दुस्साहस किया, पुलिस ने उन्हें उन्हीं की भाषा में जवाब दिया है। बीते साढे़ चार साल की बात करें तो अब तक 155 इनामी अपराधी मुठभेड़ों में मारे गए। सैकड़ों अपराधी पकड़े गए। गुंडा एक्ट और गैंगस्टर एक्ट के तहत बड़ी संख्या में कार्रवाई की गई। संपत्तियां जब्त की गईं।

महिला सुरक्षा को लेकर सवाल उठते रहते हैं?
एनसीआरबी का डाटा बताता है कि प्रदेश में महिलाओं से जुड़े अपराधों में कमी  आई है। महिलाओं की सुरक्षा के लिए सरकार ने जो इंतजाम किए, इससे पहले कभी नहीं हुए। वीमेन पावर लाइन-1090, पिंक पेट्रोलिंग, पिंक बूथ, एंटी रोमियो स्क्वायड, थानों में महिला डेस्क की स्थापना, मिशन शक्ति कार्यक्रम के तहत चलाए गए अभियानों से महिलाओं को न सिर्फ  लाभ हुआ है, बल्कि उनमें जागरूकता भी आई है। इसके बाद भी जहां कहीं खामियां मिलती हैं, उन्हें दूर किया जाता है। 

थानों में भ्रष्टाचार की शिकायतों पर अंकुश क्यों नहीं लग पा रहा है?
यह ऐसा क्षेत्र है जहां सुधार की अब भी सबसे अधिक गुंजाइश है। ऐसा भी नहीं है कि सभी थाने भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। जिन थानों के बारे में शिकायतें  मिलती हैं, वहां के इंचार्ज और पर्यवेक्षण अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। सुधार के लिए ही ऑनलाइन एफआईआर सिस्टम लागू किया गया। पुलिस वेरिफिकेशन के लिए भी ऑनलाइन व्यवस्था है।

खाकी पर लगे दागों से कैसे छुटकारा मिलेगा?
गोरखपुर की घटना में जो भी पुलिसकर्मी शामिल थे, वह सलाखों के पीछे हैं। नोएडा की घटना में भी कार्रवाई की गई है। आईपीएस अधिकारी ने जिन लोगों पर आरोप लगाए थे, उनकी जांच डीजी स्तर के अधिकारी से कराई गई। जो लोग दोषी पाए  गए उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ और कार्रवाई की जा रही है। जहां तक सवाल महोबा के मामले का है तो जिस आईपीएस अफसर की वजह से व्यापारी ने आत्महत्या की, उस पर एक लाख का इनाम घोषित किया गया है। अभी मणिलाल पाटीदार फरार है। उसे पकड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। कार्रवाई हर मामले में की गई है और आगे भी की जाएगी। 

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