सहयोगी दलों की नाराजगी दूर करने लखनऊ आएंगे अमित शाह, चुनावी कामयाबी का भी खींचेंगे खाका
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लोकसभा उपचुनाव में मिले झटके से सतर्क भाजपा अध्यक्ष अमित शाह इसी सप्ताह लखनऊ में संगठन और सरकार के कील-कांटे दुरुस्त करेंगे। लोकसभा चुनाव की तैयारियों का खाका खींचने के साथ ही भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर सहित अपना दल के विधायकों से भी बातचीत करके नाराजगी दूर करेंगे।
हालांकि शाह का अधिकृत कार्यक्रम अभी लखनऊ नहीं पहुंचा है। पर, सूत्रों के अनुसार अब उनका 10 के बजाय 11 अप्रैल को आना संभावित है। वह 11 और 12 दो दिन लखनऊ में रुक सकते हैं। शाह इस दौरे में सरकार और संगठन के कामकाज की समीक्षा करेंगे।
विधान परिषद चुनाव, दलित मुद्दे पर बनी परिस्थितियों के मद्देनजर डैमेज कंट्रोल केतरीके, मंत्रियों की परफारमेंस के साथ मंत्रिमंडल व संगठन के पुनर्गठन सहित अन्य कई तात्कालिक मुद्दों पर बातचीत करके समीकरण दुरुस्त करेंगे।
पिछले दिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और सरकार की समन्वय बैठक में गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव के पीछे कार्यकर्ताओं की नाराजगी और सरकार के काम जमीन तक न पहुंचा पाने का मुद्दा उठा था। कुछ मंत्रियों और पदाधिकारियों के कामकाज को लेकर भी संघ ने सवाल उठाए थे।
बृज और पश्चिम क्षेत्र की समन्वय बैठकों में कई जगह भाजपा सांसदों व विधायकों तथा मंत्रियों के बीच शीतयुद्ध की बातें सामने आई हैं। दूसरे दलों से आकर पार्टी में विधायक और मंत्री बने लोगों के समानान्तर सत्ता स्थापित करने की शिकायतें भी आ चुकी हैं।
अफसरों के रवैये पर भाजपा विधायक कई बार नाराजगी जता चुके हैं। दलित वर्ग केचार सांसदों की चिट्ठियां भी भाजपा के लिए चिंता का सबब बनी हुई हैं।
दलितों व पिछड़ों पर नजर
ताजा घटनाओं के मद्देनजर शाह लखनऊ दौरे में सहयोगियों की भाजपा के साथ पहली जैसी लामबंदी मजबूत रखने की तैयारियों को अंजाम देंगे। साथ ही दलितों और पिछड़ों सहित कुछ और चेहरों का मंत्रिमंडल और अन्य सरकारी संस्थाओं में समायोजन कराकर समीकरण दुरुस्त कराने की कोशिश करेंगे।
मंत्रिमंडल में नए चेहरों को शामिल करने के साथ मौजूदा चेहरों की जिम्मेदारी में फेरबदल, कुछ का कद कम करने और कुछ का बढ़ाने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा संभावित है। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर मुख्य संगठन के साथ मोर्चा व प्रकोष्ठों की टीम पर भी फैसला हो सकता है।
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