अमित शाह आज लखनऊ में, दलित एजेंडे पर रहेगा पूरा जोर, समझेंगे विरोधियों की ताकत
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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह बुधवार को लखनऊ में विरोधियों की ताकत और अपनी कमजोरी की थाह लेंगे। साथ ही इनसे निपटने का रास्ता तलाशकर पार्टी के सामने यूपी में खड़ी चुनौतियों से पार पाने का फॉर्मूला तलाशेंगे, ताकि लोकसभा चुनाव के रूप में आने वाली बड़ी परीक्षा में भाजपा इस बार भी अच्छे नंबरों से पास हो जाए।
शाह के इस एक दिनी दौरे के एजेंडे में दलित सांसदों के विद्रोही स्वरों से बनी परिस्थितियों से निपटने और कार्यकर्ताओं की संतुष्टि के उपाय तलाशना भी शामिल है। वह संगठन और सरकार के लोगों से बातचीत करने के अलावा मंत्रियों के एक वर्ष के कामकाज का जायजा लेंगे।
शाह के इस दौरे को सरकार और संगठन के भावी पुनर्गठन से भी जोड़कर देखा जा रहा है। विधान परिषद की 13 सीटों में 11 पर भाजपा के भाग्यशाली उम्मीदवारों के चुनाव पर मनन-मंथन होना है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के नेता ओमप्रकाश राजभर, पार्टी के विधायकों और अपना दल के विधायकों की नाराजगी दूर करने का काम भी उनके एजेंडे में रहेगा।
संकेत यह भी है कि शाह के इस दौरे में मिले फीडबैक के आधार पर ही संगठन और सरकार में पुनर्गठन का काम आगे बढ़ेगा। इसके बाद मंत्रियों व पदाधिकारियों की जिम्मेदारी में फेरबदल हो सकता है।
तैयारी में जुटे भाजपाई, बैठकें जारी
दौरे के मद्देनजर सोमवार से शुरू हुआ सरकार और संगठन स्तर पर बैठकों का सिलसिला मंगलवार को भी देर तक जारी रहा। सोमवार की रात मुख्यमंत्री आवास पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ. महेन्द्र नाथ पांडेय, राष्ट्रीय सह महामंत्री संगठन शिवप्रकाश और प्रदेश महामंत्री संगठन सुनील बंसल के बीच लंबी बातचीत हुई।
मंगलवार को कई मंत्रियों ने डॉ. पांडेय और सुनील बंसल से मुलाकात की। माना जा रहा है कि इन मुलाकातों का उद्देश्य मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल से खुद को सुरक्षित रखना है।
दलितों की लामबंदी पर ध्यान
संगठन के स्तर पर हुई बैठकों में चुनावी तैयारियों, संगठनात्मक ढांचे की दुरुस्ती, दलित मुद्दे पर चुनौतियों से निपटने की रणनीति और डैमेज कंट्रोल के उपायों का खाका भी खींचा गया। इसे शाह के सामने रखा जाएगा।
इनमें प्रदेश सरकार के मंत्रियों का आंबेडकर जयंती पर दलित बहुल गांवों में प्रवास, बूथों पर होने वाले समरसता कार्यक्रम और 5 मई तक चलने वाले ग्राम स्वराज अभियान की तैयारियां शामिल हैं। सांसदों के एक रात किसी दलित के घर बिताने के अभियान की तैयारियों पर भी चर्चा हुई है।