युवा कुंभ में लेखक अमीश त्रिपाठी बोले, पश्चिम से सीखें पर पश्चिमी न बनें
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ज्ञान हमें कहीं से भी मिले, लेना चाहिए। फिर वो भारतीय प्रांत हों या फिर पश्चिमी देश। हां, इस बात का ध्यान रखें कि पश्चिम से सीखते हुए भी हम अपनी परंपरा और संस्कृति को कायम रखें न कि पश्चिमी बन जाएं।
मशहूर लेखक अमीश त्रिपाठी ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में युवाओं को यह सीख दी। प्रदेश सरकार और लखनऊ विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित युवा कुंभ के मौके पर हुए विमर्श के दौरान उन्होंने ये विचार व्यक्त किए। इस दौरान उन्होंने युवाओं की शंकाओं का समाधान भी किया।
प्रो. राकेश उपाध्याय से बात करते हुए अमीश त्रिपाठी ने बताया कि घर-परिवार में माता-पिता से कहानियां सुनकर अपने इतिहास को जानने की इच्छा थी। पढ़ाई के बाद बैंकिंग जॉइन की, लेकिन इसके बाद शिव पर आधारित उपन्यास से उन्हें असली पहचान और सुकून मिला। उन्होंने कहा कि हमारी शिक्षा प्रणाली में पश्चिम की बातें पढ़ाई जा रही हैं। भारत में छह ऋतुएं होती हैं, लेकिन हमारी किताबें पश्चिमी देशों की चार ऋतुएं पढ़ा रही हैं।
हिंदी में अच्छे लेखक पर मार्केटिंग व अनुवाद की जरूरत
अमीश त्रिपाठी ने कहा कि आज अंग्रेजी का बोलबाला है, लेकिन हिंदी में काफी अच्छे लेखक हैं। नरेंद्र कोहली उनमें से एक हैं। उनके अनुसार हिंदी के लेखकों को मार्केटिंग और अच्छे अनुवाद की जरूरत है। अपनी मार्केटिंग उन्हें खुद ही करनी होगी, तभी उनकी पहचान बनेगी।
प्राचीन काल से भारतीय परंपरा में सशक्त रहीं महिलाएं
अमीश ने कहा कि महिलाओं के सशक्तीकरण की बात आज हो रही है, लेकिन भारतीय परंपरा में हमेशा से वे सशक्त रही हैं। हमारी परंपरा में महिला और पुरुष में कभी भी भेद नहीं रहा है। कहा गया है कि जहां पर महिलाओं की इज्जत नहीं है, वहां पर भगवान भी दया नहीं करते।
काशी में रहकर परंपरा को महसूस करता हूं
एक सवाल के जवाब में अमीश त्रिपाठी ने कहा कि जब मौका मिलता है तो काशी जाकर प्राचीन परंपरा का पालन कर रहे लोगों के साथ रहकर उसे महसूस करने का प्रयास करता हूं। इस परंपरा को अपनी कहानियों में शब्दों के माध्यम से बताने का प्रयास करता हूं।
ठीक नहीं बाल विवाह, दी जाए यौन शिक्षा
युवाओं के सवालों का जवाब देते हुए अमीश त्रिपाठी ने कहा कि हमारी परंपराएं अच्छी रही हैं, लेकिन अति की हर जगह मनाही है। इसलिए बाल विवाह प्रथा भी सही नहीं है। उन्होंने यौन शिक्षा देने की वकालत की।
संयुक्त परिवार की परंपरा टूटने को उन्होंने दुखद बताया और समय के हिसाब से समाधान तलाशने को कहा। भारतीय ग्रंथों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि हमारे यहां श्रुत और स्मृति दोनों प्रकार की रचनाएं हैं। श्रुत रचनाएं जीवन के बारे में बताती हैं, इसमें नियम नहीं होते बल्कि जीवन के बारे में बातें होती हैं जबकि स्मृति में नियम हैं, जैसे मनु स्मृति। आधुनिक समय में हमारा संविधान ही स्मृति ग्रंथ है।
सिर्फ इतना कहूंगा कि हनुमान जी सभी के लिए पूज्य
विमर्श कार्यक्रम के दौरान अमीश त्रिपाठी से इस समय हनुमान जी की जाति और धर्म को लेकर होने वाली टिप्पणियों पर भी सवाल किया गया। इस पर उन्होंने कहा कि वे किसी प्रकार की राजनीतिक टिप्पणी से बचते हैं। इसलिए सिर्फ इतना कहूंगा कि वे सभी के लिए पूज्य हैं।