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अमर उजाला संगम: गोमती किनारे सजा संस्कृतियों का संसार, लोगों ने चखे विविध व्यंजन; कुमार विश्वास ने बांधा समां

Wed, 24 Dec 2025 11:18 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Wed, 24 Dec 2025 11:18 PM IST
सार

Amar Ujala Sangam: अमर उजाला द्वारा संगम का आयोजन गोमती रिवर फ्रंट पर किया गया। इस दो दिवसीय आयोजन के पहले दिन विविध तरह के कार्यक्रम हुए। 

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Amar Ujala Sangam: A world of cultures adorned the banks of the Gomti River, people tasted the delicacies; Ku
कार्यक्रम में पहुंचे कुमार विश्वास। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोमती का किनारा और सर्दी की गुनगुनी धूप के बीच बुधवार को देशभर की संस्कृतियों का ऐसा अद्भुत संसार सजा कि देखने वाले भी मोहित हुए बिना नहीं रह सके। बंगाल से गुजरात और कश्मीर से उड़ीसा, राजस्थान, पंजाब, महाराष्ट्र, उत्तराखंड और केरल तक की संस्कृतियां एक ही प्रांगण में आकर ऐसे मिलीं कि पूरा भारत मानो एक ही जगह इकट्ठा हो गया हो। मौका था अमर उजाला और संस्कृति विभाग की ओर से दो दिवसीय ‘संगम संस्कृतियों का’ के आयोजन का। गोमतीनगर में समतामूलक चौराहे के निकट रिवर फ्रंट पर सजे इस महोत्सव में दिनभर चलीं सांस्कृतिक गतिविधियों की अंतिम प्रस्तुति के रूप में देश के प्रख्यात कवि कुमार विश्वास ने देर रात तक श्रोताओं को अपनी कविताओं की धुन पर झुमाया। कुमार विश्वास ने लखनऊ से जुड़े अपने किस्से भी सुनाए। हिंमाशु बाजपेयी के साथ बात करते हुए उन्होंने पहले के लखनऊ और अभी के लखनऊ की चर्चा भी की। 

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पहले दिन विभिन्न समाजों के स्टॉलों पर उनकी संस्कृतियों और स्वादिष्ट व्यंजनों ने अतिथियों का स्वागत किया, तो वहीं सांस्कृतिक मंच पर भारतीय संस्कृति के अलग-अलग रंगों ने गीत-संगीत और नृत्य की छटा बिखेरी। प्रदेश के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने सुबह दीप प्रज्ज्वलन कर आयोजन का शुभारंभ किया। उन्होंने अलग-अलग समाज के स्टाॅलों का निरीक्षण भी किया। सांस्कृतिक मंच की शुरुआत वाद्ययंत्रों के साथ वैदिक मंत्रोच्चार से हुई। इसके बाद शुरू हुआ देशभर के राज्यों से जुड़े लखनऊ में रहने वाले समाजों की ओर से सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का सिलसिला। यह सिलसिला शाम तक चला। दोपहर बाद पहुंचे उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी स्टॉलों का निरीक्षण किया और विभिन्न समाजों के लोगों से मुलाकात की। यहां लगी प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया और बिहार की मधुबनी पेंटिंग की तारीफ की। उन्होंने कहा कि संस्कृतियों का संगम कराकर अमर उजाला प्रतिवर्ष देश की अलग-अलग संस्कृतियों का मिलन कराता है।
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सांस्कृतिक मंच पर कलाकारों की प्रस्तुतियों के साथ ही ओपन माइक के तहत अन्य कलाकारों और शहर के अलग-अलग विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला, जिन्होंने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। गरबा और डांडिया के माध्यम से कलाकारों का जोश दिखा तो वहीं आल्हा, पुरबिहा गायन और बिरहा के साथ ही बीहू, जोहारी, भरतनाट्यम, कथक, बुंदेलखंडी व राई नृत्य ने सभी का दिल जीत लिया।
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बच्चों के लिए अलग से किड्स जोन भी था, जिसमें नन्हे-मुन्नों ने रेलगाड़ी, ऊंट, घोड़ा और बग्घी की सवारी का आनंद उठाया। शाम को अपराजिता की प्रस्तुति खूब सराही गई। इसमें विभिन्न बोलियों के लोकगीतों की प्रस्तुतियों और भाव नृत्य ने लोगों को भावविभोर कर दिया। पहले दिन के आयोजनों में अंतिम और बेहद खास प्रस्तुति रही देश के ख्यातिलब्ध कवि और गीतकार कुमार विश्वास की। उन्होंने अपने मुक्तकों, कविताओं और गीतों से ऐसा समा बांधा कि श्रोता तालियों से उनका अभिवादन करते रहे। बृहस्पतिवार को आयोजन का दूसरा दिन है।
 

संस्कृतियों के इंद्रधनुषी रंगों और सुरों से सजी महफिल

Amar Ujala Sangam: A world of cultures adorned the banks of the Gomti River, people tasted the delicacies; Ku
अमर उजाला संगम का आयोजन - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
 ढलते सूरज के साथ संगम कार्यक्रम और भी खूबसूरत होता गया। जब विभिन्न समाज के कलाकारों ने अपने-अपने समाज की मनमोहक प्रस्तुतियां पेश की तो शाम इंद्रधनुषी रंगों और सुरों से महफिल सज गई। दक्षिण का रेशम उत्तर की ऊनी विरासत का हमसफर बन रहा था। पूरब की बोली का भोलापन, पश्चिम की धुनों की गहराई में उतरकर नया रंग घोल रहा था। कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।

बुंदेलखंडी परंपरा की दिखी अनूठी झलक
शाम को बुंदेलखंडी समाज की ओर से मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां पेश की गईं। कृति जैन की खूबसूरत बुंदेली राई नृत्य व अन्य प्रस्तुतियों ने शाम को और भी खूबसूरत बना दिया। वहीं, गायन में आज दिन सोने को महराज..., छोटी-छोटी महल बनायों जैसे विवाह गीतों में अनूठी परंपरा की खूबसूरत झलक दिखी। कलाकारों में आशा तिवारी, सुधा गुप्ता, रजनी, अनिता आलोक जैन, अनिता जैन, अर्चना गुप्ता, श्रद्धा लिटौरिया, अंजू अग्निहोत्री शामिल रहे।

राधा-कृष्ण के प्रेम की अद्भुत झलक
ब्रज के कलाकारों ने जब राधा-कृष्ण के प्रेम पर आधारित नृत्य किया, तो हर कोई प्रेम के रंग में रंग गया। कलाकारों ने राधाकृष्ण के बीच की मीठी नोकझोंक और अटूट प्रेम को नृत्य से मंच पर जीवंत कर दिया। ब्रज समाज की ओर से गोपाल कौशिक, नीतू, हेमंत, नीरज, सुनील, अवधेश, बुरा, सोनू, सोनम, कुमकुम, रीमा और अनुराधा ने प्रतिभाग किया। वहीं, उड़िया समाज की ओर से सौम्या श्री ने अपने मनमोहक नृत्य से कार्यक्रम में घुंघरू और कला का जादू बिखेर दिया।

लय और ताल की जुगलबंदी

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अमर उजाला संगम कार्यक्रम में पहुंचे डिप्टी सीएम केशव मौर्य - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
केरल समाज के कलाकारों ने भरतनाट्यम और कथक की खूबसूरत प्रस्तुतियां दीं। पैरों की थाप और हाथों की भंगिमा ब्रज की गलियों से दक्षिण के मंदिरों तक नृत्य की एक जादुई यात्रा कराई। वहीं, दुर्गा स्तुति में मां का अद्भुत रूप देखने को मिला। लय और ताल की जुगलबंदी ने हर किसी का मन मोह लिया। स्वर्णिमा सिंह, आराध्या सिंह, मीमांसा कृष्णा, संचयिता बेरा, मानवी श्रीवास्तव, रिचा अधिकारी, अल्का त्रिपाठी इसमें शामिल रहीं।

खड़के डांडिया, थिरके पैर
गुजराती समाज की ओर से जब गरबा और डांडिया की प्रस्तुतियां पेश की गईं तो पूरा गोमती नदी तट ढोल की थाप और डांडिया की खनक से गुंजायमान हो गया। लोक संस्कृति का सतरंगी रंग देखकर लगा जैसे तट पर छोटा गुजरात उतर आया है। इसमें प्रतिमा, जया, शिखा, अर्चना और आकांक्षा ने प्रतिभाग किया।

 

संगम में गुरुवार को भी होगा मस्ती और मनोरंजन का मिश्रण

 अमर उजाला और संस्कृति विभाग की ओर से गोमती रिवर फ्रंट स्थित फूड वैली में चल रहे संगम संस्कृतियों का कार्यक्रम में दूसरे दिन बृहस्पतिवार को भी बहुत कुछ खास होगा। यहां सुबह 10:30 बजे से लेकर रात तक मंच पर विभिन्न समाज और संस्था की ओर से रंगारंग कार्यक्रमों की प्रस्तुति होगी। शाम में चर्चित कलाकार कुमार सत्यम सूफी संगीत का जादू जगाएंगे। रात में कवि सम्मेलन में नामचीन कवियों का भी जमावड़ा होगा। संगम में प्रवेश और पार्किंग पूरी तरह से निशुल्क है। रजिस्ट्रेशन कराने पर लकी ड्रा में शामिल होने का मौका भी मिलेगा।

ये कार्यक्रम होंगे मुख्य आकर्षण
- जैन समाज की ओर से श्रद्धा जैन की मंगलाचरण प्रस्तुति।
- जैन समाज की खुशी जैन की ओर से भक्ति नृत्य।
- सिंधी समाज की ओर से सिंधी भजन।
- मुस्लिम समाज की ओर से लखनऊ घराने का कथक।
- इस्कॉन के अपरिमेय दास की ओर से परीक्षा के तनाव से मुक्ति पर कार्यशाला।
- केजीएमयू से पूर्वोत्तर विद्यार्थियों की ओर से कार्यक्रम।
- लखनऊ विश्वविद्यालय के विदेशी विद्यार्थियों का कार्यक्रम।
- संजय त्रिपाठी की ओर से एक दिन की छुट्टी नाटक।
- डॉ. अपूर्वा अवस्थी की ओर से कन्नौजी कहानी।
- संस्कृति विभाग और समाज कल्याण की ओर से बुजुर्गों की रामलीला।
- अवधी समाज की ओर से अवध के लोकगीत।
- संस्कृति विभाग की ओर से कार्यक्रम
- उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक करेंगे गोमती आरती।
- उत्तर प्रदेश की विभिन्न बोलियों के लोकगीतों की प्रस्तुति, गीत एवं भाव नृत्य संगम।
- शाम में सूफी गायक कुमार सत्यम की प्रस्तुति।
- निलोत्पल मृणाल, कलीम कैसर, शबीना अदीब, हिमांशी बावरा, मनु वैशाली, रामायण धर द्विवेदी और मुकेश श्रीवास्तव का कवि सम्मेलन।




 
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