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अमर उजाला संवाद: घर से ही करनी होगी ग्रीन दिवाली की शुरूआत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sun, 04 Nov 2018 09:06 PM IST
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अमर उजाला संवाद
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ग्रीन दिवाली की चर्चाएं तो बहुत हो रही हैं लेकिन इसकी पहल कम लोग कर रहे हैं। स्कूलों में इसके लिए जागरूकता का पाठ तो पढ़ाया जा रहा है लेकिन घर में आकर इसका प्रभाव कम हो रहा है। यही वजह है कि हमें प्रदूषण में अपने शहर की रेटिंग घटाने, अपने स्वास्थ्य की सुरक्षा, विलुप्त हो रहे पशु-पक्षियों का जीवन बचाने के लिए अपने घर से ही ग्रीन दिवाली की शुरूआत करनी होगी। ‘अमर उजाला संवाद’ में रविवार को विभिन्न क्षेत्रों से ताल्लुक रखने वाली विशेषज्ञ महिलाओं ने इस मुद्दे पर न सिर्फ अपने विचार रखे बल्कि महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।
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अज्ञानता मिटाने को दीया रोशन करें
आईएएस अनीता भटनागर जैन
हम सभी को अज्ञानता को मिटाने के लिए दीया रोशन करना होगा। लोगों के बीच सकारात्मक सोच विकास के लिए पैदा करनी होगी। हमें अपने नहीं पर्यावरण के बारे में सोचना होगा। हम पृथ्वी के ग्लोबल ट्रस्टी हैं। कूड़ा निस्तारण आज एक बड़ी समस्या बन गई है। मैंने बायो डिग्रेबल एक्ट बनाया। मैं जब कानपुर में डीएम थी तो गंगा किनारे से खुद कूड़ा बीनना शुरू किया। बाल पर्यावरण वाहिनी बनाई। ‘हमारी पृथ्वी, हमारा घर’ फिल्म बनाई। जिसकी स्क्रीनिंग यूनेस्को ने भी की थी। हम इसे स्कूलों में दिखाकर युवाओं को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करते हैं। हमें इस तरह से पर्यावरण से जुड़ना होगा, उसके संरक्षण के लिए काम करना होगा। आज प्रदूषण का ही असर है कि 60 फीसदी पशु-पक्षी विलुप्त हो गए हैं। हमें गैर जरूरी चीजें घर लाने से रोकना होगा। तोहफा ही देना है तो पौधा या उसका बीज दीजिए।
-: अनीता भटनागर जैन, अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा विभाग
-: अनीता भटनागर जैन, अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा विभाग
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दिखावे से बचना, प्रेरित करना होगा
डॉ मनमीत कौर
पर्यावरण संरक्षण सिर्फ एक दिन का मुद्दा नहीं है। इसे हमें अपनी आदत का हिस्सा बनाना होगा। आज दिखावा बढ़ा है, जिसकी वजह से हम ज्यादा पटाखे प्रयोग कर रहे हैं। इसकी भी प्रतियोगिता होने लगी है। बच्चों को प्रदूषण रहित दिवाली के लिए प्रेरित कर समाज में सकारात्मक संदेश देना चाहिए।
मेजर मनमीत कौर, नवयुग कन्या महाविद्यालय
मेजर मनमीत कौर, नवयुग कन्या महाविद्यालय
खत्म हो गई मेल-मेलाप की परंपरा
डॉ रेखा रानी
हम अपने घर में फुलझड़ी तक नहीं जलाते हैं। हम दीए जलाते हैं। घर की सफाई की परंपरा है जिससे नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है। दिवाली पर मेल-मिलाप की परंपरा को हम भूल रहे हैं। पटाखा छुटाने तक सीमित हो गए हैं। पटाखे सिर्फ पर्यावरण ही नहीं स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक हैं।
डॉ. रेखा रानी, नवयुग कन्या महाविद्यालय
डॉ. रेखा रानी, नवयुग कन्या महाविद्यालय
अपने घर से करनी होगी शुरूआत
डॉ अजिता सिंह
हम दूसरे को संदेश दें और उससे बदलाव की अपेक्षा करें। इससे बेहतर है कि हम इसकी शुरूआत अपने घर, अपने बच्चों से करें। हम अपने स्कूल में बच्चों से ही ग्रीन रंगोली जैसे आयोजन में प्रतिभाग कराते हैं। ताकि उनमें इसकी आदत पड़े और वो अपने घर में भी इस तरह के प्रयोग करें।
-अजिता सिंह, प्राचार्या
-अजिता सिंह, प्राचार्या
संभल कर रहें गर्भवती महिलाएं
प्रोफेसर सुजाता
पटाखे अन्य लोगों के साथ गर्भवती महिलाओं व बच्चों के लिए काफी नुकसानदायक हैं। इनसे गर्भस्थ शिशु के विकास में भी समस्या होती है और प्रि-मेच्योर डिलेवरी हो सकती है। ऐसे में महिलाओं को खास ध्यान देना चाहिए। ऐसे में कम आवाज के पटाखे प्रयोग करने चाहिए।
-प्रो. सुजाता, क्वीन मेरी अस्पताल
-प्रो. सुजाता, क्वीन मेरी अस्पताल
उत्तराखंड की दिवाली से लें प्रेरणा
डॉ. किरण डंगवाल, एनसीसी ऑफीसर, लविवि
ईको फ्रेंडली दिवाली के बारे में हम उत्तराखंड से सीख सकते हैं। वहां दिवाली पर सूखी लकड़ियों को इकट्ठा कर पर्यावरण शुद्ध रखने की प्रक्रिया की जाती है। नीम के तेल में कपूर डालकर दीया जलाएं तो वह कीड़ों-मच्छरों को भगाता है, पर्यावरण भी शुद्ध रखता है। प्रकृति का उपयोग करें, न कि उपभोग।
-डॉ. किरण डंगवाल, एनसीसी ऑफीसर, लविवि
-डॉ. किरण डंगवाल, एनसीसी ऑफीसर, लविवि