{"_id":"65da35f5ae57dc58cb0027d9","slug":"allotment-order-canceled-land-returned-to-gram-sabha-after-20-years-raebareli-news-c-101-1-slko1033-111153-2024-02-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: आवंटन आदेश निरस्त, 20 साल बाद भूमि ग्रामसभा को वापस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: आवंटन आदेश निरस्त, 20 साल बाद भूमि ग्रामसभा को वापस
Sun, 25 Feb 2024 12:01 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Sun, 25 Feb 2024 12:01 AM IST
विज्ञापन
रायबरेली। लखनऊ-प्रयागराज हाईवे पर सदर तहसील क्षेत्र के चक निजाम गांव में जमीन का पट्टा मिलते ही बिना आदेश के ही बैनामा कर दिया गया। मुकदमे की सुनवाई करते हुए एसडीएम सदर मिथलेश त्रिपाठी ने भूमि आवंटन आदेश को निरस्त करने के साथ ही 20 साल बाद आवंटित जमीन को ग्राम सभा में दर्ज कराने के आदेश दिए हैं। उन्होंने बिना आदेश के किए गए बैनामे को शून्य घोषित करते हुए दाखिल खारिज आदेश भी निरस्त कर दिया है। तहसीलदार और लेखपाल को जमीन पर कब्जा करने के आदेश दिए हैं।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (राजस्व) संतोष बहादुर सिंह ने बताया कि सदर तहसील के चकनिजाम में विवादित गाटा संख्या 317, रकबा 0.155 हे. गांवसभा की जमीन थी, जिसका आवंटन काटीहार मजरे चकनिजाम निवासी रामधनी पुत्र रामपाल के नाम किया गया था। भूमि आवंटन के बाद ही नौ फरवरी 2004 को संबंधित जमीन का बैनामा बिना सक्षम अधिकारी के आदेश के ऊंचाहार के चिनगांव निवासी तरऊ पुत्र दुजई को कर दिया गया।
उन्होंने बताया कि मामले में सहायक शासकीय अधिवक्ता ने वर्ष 2016 में आवंटन आदेश को निरस्त किए जाने के लिए एसडीएम कोर्ट में वाद दायर किया। मुकदमे की सुनवाई करते हुए एसडीएम ने रामधनी को मिले भूमि आवंटन के पट्टे को खारिज कर दिया गया है। एसडीएम ने नौ फरवरी 2004 के बैनामे को शून्य घोषित करते हुए 27 फरवरी 2004 को किए गए दाखिल खारिज आदेश को भी निरस्त कर कर दिया है। सदर तहसीलदार व संबंधित लेखपाल को जमीन का कब्जा करने और ग्रामसभा के खाते में संबंधित जमीन को दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (राजस्व) संतोष बहादुर सिंह ने बताया कि सदर तहसील के चकनिजाम में विवादित गाटा संख्या 317, रकबा 0.155 हे. गांवसभा की जमीन थी, जिसका आवंटन काटीहार मजरे चकनिजाम निवासी रामधनी पुत्र रामपाल के नाम किया गया था। भूमि आवंटन के बाद ही नौ फरवरी 2004 को संबंधित जमीन का बैनामा बिना सक्षम अधिकारी के आदेश के ऊंचाहार के चिनगांव निवासी तरऊ पुत्र दुजई को कर दिया गया।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि मामले में सहायक शासकीय अधिवक्ता ने वर्ष 2016 में आवंटन आदेश को निरस्त किए जाने के लिए एसडीएम कोर्ट में वाद दायर किया। मुकदमे की सुनवाई करते हुए एसडीएम ने रामधनी को मिले भूमि आवंटन के पट्टे को खारिज कर दिया गया है। एसडीएम ने नौ फरवरी 2004 के बैनामे को शून्य घोषित करते हुए 27 फरवरी 2004 को किए गए दाखिल खारिज आदेश को भी निरस्त कर कर दिया है। सदर तहसीलदार व संबंधित लेखपाल को जमीन का कब्जा करने और ग्रामसभा के खाते में संबंधित जमीन को दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
विज्ञापन