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Lucknow News: प्राथमिक उपचार तक ही सीमित हैं सभी सीएचसी
Thu, 01 Aug 2024 03:33 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Thu, 01 Aug 2024 03:33 AM IST
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श्रावस्ती। जिले में संचालित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर न तो विशेषज्ञ चिकित्सक तैनात हैं और न ही पर्याप्त जांच की सुविधाएं। इससे मरीजों की हालत बिगड़ने पर चिकित्सकों के सामने रेफर करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं होता हैं। इससे कई मरीजों की समय से इलाज न मिलने के कारण रास्ते में मौत हो जाती है।
जिले के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए आठ सीएचसी हैं। इसमें से पांच सीएचसी हाईवे व व्यस्त मार्ग पर स्थित हैं। जहां आए दिन हादसे होते रहते हैं। लेकिन सीएचसी में आधी-अधूरी सुविधा के कारण मरीजों को प्राथमिक उपचार ही मिल पाता है। ज्यादातर मरीजों को संयुक्त जिला चिकित्सालय भिनगा या मेडिकल काॅलेज बहराइच रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में कई बार समय पर उपचार न मिलने के कारण मरीजों की मौत भी हो जाती है। बौद्ध परिपथ पर स्थित इकौना सीएचसी मात्र तीन चिकित्सकों के भरोसे है। यदि दुर्घटना में घायल मरीज यहां आता है तो उसे प्राथमिक उपचार के बाद सीटीस्कैन, अल्ट्रासाउंड जैसी जांच के लिए भिनगा या बहराइच रेफर कर दिया जाता है। यही हाल गिलौला सीएचसी का भी है। तुलसीपुर ताल बघौड़ा मार्ग पर स्थित सिरसिया सीएचसी में एक्स रे व खून जांच की ही सुविधा है। जबकि यह क्षेत्र भारत-नेपाल सीमा से सटा होने के कारण यहां मरीजों की संख्या अधिक होती है। लेकिन ज्यादातर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद भिनगा रेफर किया जाता है। भिनगा-बहराइच मार्ग पर स्थित सोनवा सीएचसी व मल्हीपुर बाबागंज मार्ग के पास मल्हीपुर सीएचसी, भंगहा व लक्ष्मनपुर सीएचसी का भी कमोबेश यही हाल है। जहां पर न तो जांच के पर्याप्त साधन हैं और न ही विशेषज्ञ चिकित्सक। ऐसे में चिकित्सकों के पास गंभीर मरीजों को रेफर करने के अलावा दूसरा रास्ता नहीं होता है।
गर्भवती महिलाओं के लिए ही संबद्ध हैं अल्ट्रासाउंड सेंटर
जिले के किसी भी सीएचसी पर अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था नहीं है। जबकि गर्भवती महिलाओं को माह में एक, नौ, 16 व 24 तारीख को कैंप लगाकर निशुल्क प्राइवेट अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर जांच कराई जाती है। ऐसे में अन्य मरीजों के साथ ही गर्भवती महिलाओं को भी अन्य दिनों में जांच के लिए पैसे खर्च कर प्राइवेट जांच करानी पड़ती हैं।
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जिले को तीन सोनोग्राफी व तीन अल्ट्रासाउंड मशीनें मिल चुकी हैं। पत्राचार किया गया है। जब तक मशीनें स्थापित होंगी तब तक रेडियोलाजिस्ट व अन्य स्टाफ की तैनाती हो सकती है। - डॉ. एपी सिंह, सीएमओ
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जिले के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए आठ सीएचसी हैं। इसमें से पांच सीएचसी हाईवे व व्यस्त मार्ग पर स्थित हैं। जहां आए दिन हादसे होते रहते हैं। लेकिन सीएचसी में आधी-अधूरी सुविधा के कारण मरीजों को प्राथमिक उपचार ही मिल पाता है। ज्यादातर मरीजों को संयुक्त जिला चिकित्सालय भिनगा या मेडिकल काॅलेज बहराइच रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में कई बार समय पर उपचार न मिलने के कारण मरीजों की मौत भी हो जाती है। बौद्ध परिपथ पर स्थित इकौना सीएचसी मात्र तीन चिकित्सकों के भरोसे है। यदि दुर्घटना में घायल मरीज यहां आता है तो उसे प्राथमिक उपचार के बाद सीटीस्कैन, अल्ट्रासाउंड जैसी जांच के लिए भिनगा या बहराइच रेफर कर दिया जाता है। यही हाल गिलौला सीएचसी का भी है। तुलसीपुर ताल बघौड़ा मार्ग पर स्थित सिरसिया सीएचसी में एक्स रे व खून जांच की ही सुविधा है। जबकि यह क्षेत्र भारत-नेपाल सीमा से सटा होने के कारण यहां मरीजों की संख्या अधिक होती है। लेकिन ज्यादातर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद भिनगा रेफर किया जाता है। भिनगा-बहराइच मार्ग पर स्थित सोनवा सीएचसी व मल्हीपुर बाबागंज मार्ग के पास मल्हीपुर सीएचसी, भंगहा व लक्ष्मनपुर सीएचसी का भी कमोबेश यही हाल है। जहां पर न तो जांच के पर्याप्त साधन हैं और न ही विशेषज्ञ चिकित्सक। ऐसे में चिकित्सकों के पास गंभीर मरीजों को रेफर करने के अलावा दूसरा रास्ता नहीं होता है।
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गर्भवती महिलाओं के लिए ही संबद्ध हैं अल्ट्रासाउंड सेंटर
जिले के किसी भी सीएचसी पर अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था नहीं है। जबकि गर्भवती महिलाओं को माह में एक, नौ, 16 व 24 तारीख को कैंप लगाकर निशुल्क प्राइवेट अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर जांच कराई जाती है। ऐसे में अन्य मरीजों के साथ ही गर्भवती महिलाओं को भी अन्य दिनों में जांच के लिए पैसे खर्च कर प्राइवेट जांच करानी पड़ती हैं।
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जिले को तीन सोनोग्राफी व तीन अल्ट्रासाउंड मशीनें मिल चुकी हैं। पत्राचार किया गया है। जब तक मशीनें स्थापित होंगी तब तक रेडियोलाजिस्ट व अन्य स्टाफ की तैनाती हो सकती है। - डॉ. एपी सिंह, सीएमओ