घाटा होने के बाद ही सही, विभाग तो जागा
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सरकारी बस अड्डों के समीप बने निजी बस व टैक्सी स्टैंड हटाए जाएंगे। यह निर्णय परिवहन निगम को हो रहे आर्थिक नुकसान को देखते हुए लिया गया है।
निगम के बस अड्डों से एक किलोमीटर की परिधि में कोई भी प्राइवेट टैक्सी व बस स्टैंड नहीं रह जाएंगे। सरकार ने सभी डीएम व एसएसपी को अभियान चलाकर सख्ती बरतने के निर्देश दिए हैं।
मायावती सरकार ने 28 मार्च, 2008 को एक अधिसूचना कर 460 नेशनल व स्टेट हाईवे पर प्राइवेट सवारी वाहनों को भी परमिट देने का निर्णय किया था।
कुछ दिनों पहले ही अखिलेश सरकार ने मायावती के इस निर्णय को पलटते हुए निजी सवारी वाहनों को इन मार्गों पर परमिट देने पर रोक लगा दी है। यानी इन मार्गों पर अब केवल परिवहन निगम की ही बसें चल सकेंगी।
सरकारी आदेश के तहत परिवहन निगम के बस अड्डों के एक किलोमीटर की परिधि में निजी सवारी वाहन संचालक अपना स्टैंड नहीं बना सकते हैं।
मुख्य सचिव जावेद उस्मानी ने इसके औपचारिक आदेश जिलों को भेज दिए हैं। इसमें डीएम व एसएसपी को इसके खिलाफ अभियान चलाने का आदेश दिया गया है।
वे परिवहन निगम व परिवहन विभाग के अफसरों के साथ संयुक्त अभियान चला सकते हैं।
साथ ही परिवहन अधिकारियों को यह निर्देश दिए गए हैं कि वे अभियान की प्रगति रिपोर्ट प्रमुख सचिव परिवहन को प्रतिदिन देंगे।
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