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अब तो शिक्षक भी नहीं आते
टीम डिजिटल/लखनऊ
Updated Tue, 10 Dec 2013 03:43 PM IST
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सरकार के एक राज्यमंत्री हैं। वैसे तो इस विभाग में तीन-तीन राज्यमंत्री हैं, लेकिन ये कुछ दूसरे किस्म के हैं।
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इनको विभाग में रुतबा चाहिए, पर ठहरे राज्यमंत्री सो यह कायम नहीं हो पा रहा है। शिक्षकों के तबादले के समय इनकी थोड़ी-बहुत चल गई थी।
सो इन्हें लगा कि विभाग में इनकी अहमियत बड़ी है। इसी झोंके में वे विभागीय अफसरों को सीधे निर्देशित करने लगे। अब भला अधिकारी तो अधिकारी ही ठहरे।
वे कैबिनेट मंत्री को छोड़कर कहां किसी की सुनने वाले। विभाग में इनकी कार्यशैली को लेकर खूब चर्चाएं चल रही हैं।
कहते हैं कि इनके सीधे कहने पर जब कुछ काम नहीं हुए तो इनके यहां आने वालों की संख्या भी कम हो गई है।
इनके कार्यालय के बाहर इसको लेकर खूब चर्चाएं हैं। कुछ कर्मचारी तो यहां तक कह रहे हैं कि पहले वाले दिन अच्छे थे।
शिक्षक अपना काम कराने के लिए ही चले आते थे, लेकिन अब तो वे भी नहीं आ रहे हैं।