भव्य होगा अलीगंज हनुमान मंदिर: मुख्यमंत्री पर्यटन विकास सहभागिता योजना का लखनऊ से होगा श्रीगणेश
अलीगंज हनुमान मंदिर दिव्य और भव्य होगा। मंदिर पर वैदिक काल की झलक दिखेगी। मुख्य द्वार खास होगा। मंदिर में नौवीं व दसवीं शताब्दी के हिंदू राजाओं के महलों की तर्ज पर झरोखे बनाए जाएंगे। दीवारों पर नक्काशी होगी।
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अलीगंज का नया हनुमान मंदिर प्रदेश के धार्मिक पर्यटन स्थलों में से एक होगा। इसे मुख्यमंत्री की पर्यटन विकास सहभागिता योजना के तहत विकसित किया जाएगा। इस पर स्वीकृति दे दी गई। प्रथम चरण में 191 लाख रुपये से इसके द्वार को भव्य बनाया जाएगा, जिस पर वैदिक कालीन झलक दिखेगी। नौवीं व दसवीं शताब्दी काल के हिंदू राजाओं के महलों की तर्ज पर झरोखे बनाए जाएंगे। दीवारों पर नक्काशी की जाएगी, जो मंदिर की भव्यता में चार चांद लगाएगी।
मुख्यमंत्री पर्यटन विकास सहभागिता योजना के तहत प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों में पर्यटन स्थल विकसित किए जाएंगे। पर्यटन विभाग में इसके लिए 68 प्रस्ताव आ चुके हैं। मंगलवार को लखनऊ की योजना को स्वीकृति दे दी गई। 50 फीसदी राशि राज्य सरकार और 50 प्रतिशत मंदिर ट्रस्ट खर्च करेगा। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि इस योजना के तहत जनप्रतिनिधि, संस्था व संगठन भी प्रस्ताव दे सकते हैं।
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पर्व पर भीड़ प्रबंधन में मददगार होगा तीन द्वार
- मंदिर प्रोजेक्ट से जुड़े आर्किटेक्ट आशीष श्रीवास्तव बताते हैं कि मुख्य द्वार में तीन द्वार होंगे। इससे भीड़ का प्रबंधन आसान होगा। इसे त्योहारों के दौरान प्रवेश व निकासी के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा। यह 85 फीट चौड़ा और 35 फीट ऊंचा होगा। द्वार के पास 17 से 18 फीट चौड़ी सड़क छोड़ी गई है।
- वैदिक कालीन इतिहास के अध्ययन के बाद इसके डिजाइन को इस तरह तय किया गया है ताकि उस काल की झलक दिखे। आमतौर पर अवध के वास्तु में मुगलकालीन झलक मिलती है। हमने इससे हटकर काम किया है। द्वार पर बने झरोखे व नक्काशी खास होंगे।
- बीच की खाली जगह को लैंडस्केप, संकेतकों व विशेष लाइटों से सजाया जाएगा। दुकानों को कुछ पीछे करके भक्तों व पर्यटकों के लिए ज्यादा खुली जगह निकाली जाएगी।
- प्रथम चरण में द्वार के काम को पूरा करके अगले चरण में मंदिर के भीतर के डिजाइन पर काम होगा। गौरतलब है कि आशीष श्रीवास्तव ने ही कैसरबाग हेरिटेज जोन को संजाया-संवारा। रिवरफ्रंट के सौंदर्यीकरण की शुरुआत का श्रेय भी इन्हें जाता है। हजरतगंज का जो स्वरूप हम देख रहे हैं, वह भी इन्हीं की देन है।
इतिहास और किंवदंतियों में मंदिर
-डॉ. योगेश प्रवीण की पुस्तक लखनऊनामा के अनुसार इस मंदिर को सुगंधित द्रव्य विक्रेता लाला जाटमल ने 1783 में बनवाया था। मंदिर का मुख्य मंडप उसी समय बनकर तैयार हुआ था।
-गीता प्रेस गोरखपुर की ओर से प्रकाशित पुस्तक कल्याण के श्री हनुमान अंक में दर्ज तथ्यों के मुताबिक, 19वीं शताब्दी के आरंभ में नवाब शुजाउद्दौला की पत्नी आलिया बेगम की ओर से बसाए गए मोहल्ले अलीगंज में श्री हनुमान मंदिर है, जहां जेठ के प्रत्येक मंगल को होने वाले आयोजन में विभिन्न धर्मों के लोग शामिल होते हैं।
- किंवदंती है कि 1792 से 1802 के बीच अवध के तत्कालीन नवाब मुहम्मद अली शाह की बेगम रबिया बेगम को सपने में हनुमान जी ने दर्शन दिया था। कहा जाता है कि जब वह गर्भवती थीं तो फिर सपना देखा। बच्चे के जन्म के बाद वे स्वप्न में दिखाए गए स्थल इस्लामबाड़ी गईं और वहां खोदाई करवाई तो वहां मूर्ति मिली। जिस हाथी पर मूर्ति को लेकर लोग लौट रहे थे, वो अलीगंज पहुंच कर रुक गया और आगे बढ़ा ही नहीं। जैसे ही मूर्ति उतारी गई, हाथी चल पड़ा। वहीं, मौजूद एक साधु ने कहा कि बेगम साहिबा हनुमान जी गोमती पार नहीं जाना चाहते हैं। तब यहीं मूर्ति स्थापित कराई गई। तब गोमती अपनी वर्तमान स्थिति से हटकर अलीगंज के निकट बहती थी।