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अलीगंज अग्निकांड : एसआईटी जांच पूरी, दोषियों पर जल्द होगी कार्रवाई
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अलीगंज स्थित इसी बिल्डिंग में लगी थी आग।
- फोटो : फाइल फोटो
लखनऊ। अलीगंज स्थित एनीमेशन सेंटर में आग लगने से 15 लोगों की मौत के मामले की जांच कर रही दो सदस्यीय एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है। सूत्रों के मुताबिक एसआईटी ने शासन को घटना के लिए जिम्मेदार विभागों और अधिकारियों-कर्मचारियों के नाम सौंप दिए हैं। जल्द रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी जाएगी, जिसके बाद बड़े पैमाने पर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक एसआईटी ने अपनी जांच रिपोर्ट में घटनास्थल से जुटाए गए सुबूतों, संबंधित विभागों से तलब की गईं रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच में सामने आए तथ्यों को शामिल किया है। इसके आधार पर आग लगने की वजहों के साथ अवैध बिल्डिंग पर कार्रवाई नहीं करने वाले विभागों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों को चिह्नित किया गया है। इन सभी के खिलाफ कठोर दंड की संस्तुति की गई है। रिपोर्ट में लखनऊ विकास प्राधिकरण के कुछ सेवानिवृत्त अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं, जिन्होंने बिल्डिंग के अवैध निर्माण के दौरान कोई कार्रवाई नहीं की।
इसके अलावा विद्युत सुरक्षा निदेशालय के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए विस्तृत जांच कराने की सिफारिश की गई है। बता दें कि जिस बिल्डिंग में आग लगी थी उसका बिजली का स्वीकृत भार 20 किलोवाट था, जबकि इस्तेमाल 35 किलोवाट से अधिक हो रहा था। इसके बावजूद बिजली विभाग के किसी भी अधिकारी ने बिल्डिंग मालिक के खिलाफ कार्रवाई नहीं की।
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आग लगने से 15 लोगों की मौत के बाद राज्य सरकार ने पूरे प्रकरण की जांच के लिए दो सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था, जिसमें अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और एडीजी जोन लखनऊ प्रवीण कुमार को सदस्य बनाया गया था। एसआईटी ने दो बार घटनास्थल का मौका मुआयना करने के साथ संबंधित विभागों के अधिकारियों से जवाब-तलब भी किया था और उनसे जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के बारे में रिपोर्ट मांगी थी।
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उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक एसआईटी ने अपनी जांच रिपोर्ट में घटनास्थल से जुटाए गए सुबूतों, संबंधित विभागों से तलब की गईं रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच में सामने आए तथ्यों को शामिल किया है। इसके आधार पर आग लगने की वजहों के साथ अवैध बिल्डिंग पर कार्रवाई नहीं करने वाले विभागों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों को चिह्नित किया गया है। इन सभी के खिलाफ कठोर दंड की संस्तुति की गई है। रिपोर्ट में लखनऊ विकास प्राधिकरण के कुछ सेवानिवृत्त अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं, जिन्होंने बिल्डिंग के अवैध निर्माण के दौरान कोई कार्रवाई नहीं की।
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इसके अलावा विद्युत सुरक्षा निदेशालय के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए विस्तृत जांच कराने की सिफारिश की गई है। बता दें कि जिस बिल्डिंग में आग लगी थी उसका बिजली का स्वीकृत भार 20 किलोवाट था, जबकि इस्तेमाल 35 किलोवाट से अधिक हो रहा था। इसके बावजूद बिजली विभाग के किसी भी अधिकारी ने बिल्डिंग मालिक के खिलाफ कार्रवाई नहीं की।
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आग लगने से 15 लोगों की मौत के बाद राज्य सरकार ने पूरे प्रकरण की जांच के लिए दो सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था, जिसमें अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और एडीजी जोन लखनऊ प्रवीण कुमार को सदस्य बनाया गया था। एसआईटी ने दो बार घटनास्थल का मौका मुआयना करने के साथ संबंधित विभागों के अधिकारियों से जवाब-तलब भी किया था और उनसे जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के बारे में रिपोर्ट मांगी थी।