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अलीगंज अग्निकांड : बैकडेट में वापस ले लिया था बिल्डिंग के ध्वस्तीकरण का आदेश
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अलीगंज अग्निकांड।
- फोटो : File photo
लखनऊ। अलीगंज भीषण अग्निकांड मामले में नया मोड़ आ गया है। पड़ताल में सामने आया है कि अग्निकांड के आरोपी भवन स्वामी वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला और उनके भाई सुरेंद्र शुक्ला के सेक्टर-डी स्थित मकान के अवैध निर्माण को गिराने का आदेश बैकडेट में वापस ले लिया गया था। इस फर्जीवाड़े का खुलासा होने पर एलडीए के तत्कालीन विहित प्राधिकारी दुर्गेश श्रीवास्तव और तत्कालीन पेशकार विमलेश कुमार गौतम के खिलाफ कैसरबाग थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
इंस्पेक्टर कैसरबाग अंजनी कुमार मिश्र के मुताबिक, एलडीए के पेशकार धीरेंद्र मोहन की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज की गई है। मामले की छानबीन की जा रही है। एफआईआर में कहा गया है कि अलीगंज के सेक्टर-डी स्थित मकान संख्या एमएस-102 के अवैध निर्माण को गिराने का वाद आठ जनवरी 2016 को दर्ज हुआ था। सुनवाई के दौरान 10 मई 2016 को तत्कालीन पीठासीन अधिकारी ने अवैध निर्माण गिराने का आदेश भी पारित कर दिया था।
इसके बाद 20 मई 2017 को वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला की ओर से एक प्रत्यावेदन पत्र दिया गया। इसमें उन्होंने संबंधित प्रकरण में नोटिस मिलने की जानकारी देते हुए स्वीकृत मानचित्र के अनुसार निर्माण का दावा किया। यही नहीं, वीरेंद्र की ओर से 23 मई 2017 को एक और प्रत्यावेदन दिया गया। इसमें कहा गया कि उन्हें न्यायालय की ओर से कोई नोटिस ही नहीं मिला था। कहा गया कि उनके खिलाफ एकपक्षीय आदेश जारी किया गया है। उन्होंने एकपक्षीय आदेश को निरस्त करते हुए सुनवाई का मौका देने की मांग की।
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आरोप है कि दोनों प्रत्यावेदन विरोधाभासी हैं। तत्कालीन विहित प्राधिकारी दुर्गेश श्रीवास्तव और पेशकार विमलेश कुमार गौतम ने वीरेंद्र को लाभ पहुंचाने के लिए मिलीभगत कर बैकडेट में ध्वस्तीकरण का आदेश वापस ले लिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए एलडीए के अधिकारियों ने प्रकरण में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए, जिसके बाद प्राथमिकी दर्ज कराई गई। इस मामले ने फिर एलडीए के कर्मचारियाें की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अग्निकांड की जांच एसआईटी ने की थी। इस घटना में 15 लोगों की मौत हो गई थी। वर्तमान में एक आरोपी अभी गिरफ्तार नहीं हो सका है।
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इंस्पेक्टर कैसरबाग अंजनी कुमार मिश्र के मुताबिक, एलडीए के पेशकार धीरेंद्र मोहन की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज की गई है। मामले की छानबीन की जा रही है। एफआईआर में कहा गया है कि अलीगंज के सेक्टर-डी स्थित मकान संख्या एमएस-102 के अवैध निर्माण को गिराने का वाद आठ जनवरी 2016 को दर्ज हुआ था। सुनवाई के दौरान 10 मई 2016 को तत्कालीन पीठासीन अधिकारी ने अवैध निर्माण गिराने का आदेश भी पारित कर दिया था।
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इसके बाद 20 मई 2017 को वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला की ओर से एक प्रत्यावेदन पत्र दिया गया। इसमें उन्होंने संबंधित प्रकरण में नोटिस मिलने की जानकारी देते हुए स्वीकृत मानचित्र के अनुसार निर्माण का दावा किया। यही नहीं, वीरेंद्र की ओर से 23 मई 2017 को एक और प्रत्यावेदन दिया गया। इसमें कहा गया कि उन्हें न्यायालय की ओर से कोई नोटिस ही नहीं मिला था। कहा गया कि उनके खिलाफ एकपक्षीय आदेश जारी किया गया है। उन्होंने एकपक्षीय आदेश को निरस्त करते हुए सुनवाई का मौका देने की मांग की।
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आरोप है कि दोनों प्रत्यावेदन विरोधाभासी हैं। तत्कालीन विहित प्राधिकारी दुर्गेश श्रीवास्तव और पेशकार विमलेश कुमार गौतम ने वीरेंद्र को लाभ पहुंचाने के लिए मिलीभगत कर बैकडेट में ध्वस्तीकरण का आदेश वापस ले लिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए एलडीए के अधिकारियों ने प्रकरण में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए, जिसके बाद प्राथमिकी दर्ज कराई गई। इस मामले ने फिर एलडीए के कर्मचारियाें की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अग्निकांड की जांच एसआईटी ने की थी। इस घटना में 15 लोगों की मौत हो गई थी। वर्तमान में एक आरोपी अभी गिरफ्तार नहीं हो सका है।

अलीगंज अग्निकांड।- फोटो : File photo

अलीगंज अग्निकांड।- फोटो : File photo