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हो जाएं सावधान : पोटाश मिलाने के बाद कलेक्शन सेंटर पहुंच रहा दूध, बिगाड़ता है पाचन तंत्र
Fri, 20 Sep 2019 05:38 PM IST
Amulya Rastogi
ज्ञान सक्सेना, अमर उजाला लखनऊ
ज्ञान सक्सेना, अमर उजाला लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Fri, 20 Sep 2019 05:38 PM IST
सार
- दूध सप्लाई करने वाली कंपनियों के पैकेजिंग प्लांट की जांच में हुआ खुलासा
- दूध को खराब होने से बचाने के लिए मिलाते हैं पोटाश, बिगड़ सकता है पाचन तंत्र
- पोटाश के दूध में घुलनशील होने के कारण रेंडम जांच में भी पकड़ नहीं आती मिलावट
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दूध
- फोटो : PTI
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विस्तार
सेहत तंदुरुस्त बनाने वाले दूध में मिलावट का खेल जारी है। बाजार में बिकने वाले पैक्ड दूध के कलेक्शन सेंटरों पर पोटाश (हाइड्रोजन पराक्साइड) मिला दूध सप्लाई हो रहा है। कलेक्शन सेंटर पर होने वाली जांच से पहले इसे एक निश्चित मात्रा में मिलाया जाता है, ताकि दूध खराब न हो और घुलनशील होने के कारण मिलावट रेंडम जांच में पकड़ भी न आए।
दूध में मिला पोटाश सेहत को नुकसान तो नहीं पहुंचाता पर आपका पाचन तंत्र बिगाड़ सकता है। मिलावट के इस खेल का खुलासा राजधानी में पैक्ड दूध की सप्लाई से जुड़े पैकेजिंग प्लांट में औचक निरीक्षण करने वाली एफएसओ टीम की जांच में हुआ है।
कार्रवाई में शामिल वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी (एफएसओ) ने बताया कि पैकेजिंग प्लांट के कलेक्शन सेंटरों पर सप्लाई पहुंचाने वाले ठेकेदार दो से छह घंटे पहले तक अलग-अलग जगह से दूध जमा करते हैं। सेंटर पहुंचने से पहले दूध खराब न हो जाए, इसके लिए इसमें पोटाश तय मात्रा में मिलाते हैं। यह दूध को बिना गर्म किए रखने पर पनपने वाले लैक्टोबैसिलेस बैक्टीरिया से खराब होने से बचाता है।
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धंधेबाज पोटाश की इतनी मात्रा ही मिलाते हैं कि पैकेजिंग प्लांट में होने वाली जांच के समय तक यह क्षार बनकर दूध में घुल जाए और मिलावट पकड़ न आए। दूध में पोटाश अधिक मात्रा में मिलाने या इसके कुछ समय बाद ही जांच कर मिलावट को पकड़ा जा सकता है। एफएसडीए के जिम्मेदार भी मानते हैं कि पैकजिंग यूनिट व दूधियों की ओर से घरों में पहुंचाए जा रहे दूध में पोटाश की मिलावट को निश्चित समय बाद पकड़ पाना बड़ी चुनौती है।
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दूध में मिला पोटाश सेहत को नुकसान तो नहीं पहुंचाता पर आपका पाचन तंत्र बिगाड़ सकता है। मिलावट के इस खेल का खुलासा राजधानी में पैक्ड दूध की सप्लाई से जुड़े पैकेजिंग प्लांट में औचक निरीक्षण करने वाली एफएसओ टीम की जांच में हुआ है।
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कार्रवाई में शामिल वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी (एफएसओ) ने बताया कि पैकेजिंग प्लांट के कलेक्शन सेंटरों पर सप्लाई पहुंचाने वाले ठेकेदार दो से छह घंटे पहले तक अलग-अलग जगह से दूध जमा करते हैं। सेंटर पहुंचने से पहले दूध खराब न हो जाए, इसके लिए इसमें पोटाश तय मात्रा में मिलाते हैं। यह दूध को बिना गर्म किए रखने पर पनपने वाले लैक्टोबैसिलेस बैक्टीरिया से खराब होने से बचाता है।
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धंधेबाज पोटाश की इतनी मात्रा ही मिलाते हैं कि पैकेजिंग प्लांट में होने वाली जांच के समय तक यह क्षार बनकर दूध में घुल जाए और मिलावट पकड़ न आए। दूध में पोटाश अधिक मात्रा में मिलाने या इसके कुछ समय बाद ही जांच कर मिलावट को पकड़ा जा सकता है। एफएसडीए के जिम्मेदार भी मानते हैं कि पैकजिंग यूनिट व दूधियों की ओर से घरों में पहुंचाए जा रहे दूध में पोटाश की मिलावट को निश्चित समय बाद पकड़ पाना बड़ी चुनौती है।
बैक्टीरिया मुक्त दूध सप्लाई का दावा
राजधानी के ग्रामीण इलाकों में चल रहे कंपनियों के पैकेजिंग प्लांट से बैक्टीरिया मुक्त दूध सप्लाई का दावा किया जाता है। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी एसके मिश्रा बताते है कि ठेकेदार दूध पैकेजिंग प्लांट पहुंचाते हैं। इसे लेने से पहले रेंडम आधार पर मिलावट परखी जाती है। पैकेजिंग प्लांट के कलेक्शन सेल तक मिलावटी दूध खपाने की आशंका सबसे ज्यादा होती है।
इसके बाद जमा दूध चिलिंग प्लांट पहुंचाकर इसे पाश्चराइड कर बैक्टीरिया विहीन बनाया जाता है। इसमें जांच के बाद जमा दूध को 70 से 72 डिग्री तक गर्म कर फिर -3 से -4 डिग्री तक ठंडा किया जाता है। इससे लैक्टोबैसिलेस बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं। इसके बाद ही दूध पैक कर बाजार में भेजा जाता है।
मुनाफे को जानलेवा मिलावट से भी गुरेज नहीं
पोटाश व पानी के अलावा धंधेबाज मुनाफे के लिए जानलेवा सिंथेटिक दूध भी खपाने से गुरेज नहीं करते। यह दूध ग्लूकोज, रिफाइंड आयल, कार्बोनेट (खाने का सोडा), फार्मलीन, यूरिया, डिटरजेंट पाउडर व घटिया मिल्क पाउडर को केमिकल के साथ मिलाकर तैयार किया जाता है। मांग के सापेक्ष घटती दूध की सप्लाई के कारण धंधेबाजों को कमाई का यह सबसे मुफीद तरीका लगता है।
एफएसडीए के अधिकारी बताते हैं कि प्रदेश में सिंथेटिक दूध की सप्लाई के मामले अभी तक आगरा, हरियाणा व दिल्ली से सटे नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जुड़े कुछ इलाकों में लैब जांच बाद सामने आए हैं। राजधानी सहित आस-पास के जिलों में एक साल से सिंथेटिक दूध की लैब जांच से कोई भी फेल नमूना रिपोर्ट नहीं आई है।
इसके बाद जमा दूध चिलिंग प्लांट पहुंचाकर इसे पाश्चराइड कर बैक्टीरिया विहीन बनाया जाता है। इसमें जांच के बाद जमा दूध को 70 से 72 डिग्री तक गर्म कर फिर -3 से -4 डिग्री तक ठंडा किया जाता है। इससे लैक्टोबैसिलेस बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं। इसके बाद ही दूध पैक कर बाजार में भेजा जाता है।
मुनाफे को जानलेवा मिलावट से भी गुरेज नहीं
पोटाश व पानी के अलावा धंधेबाज मुनाफे के लिए जानलेवा सिंथेटिक दूध भी खपाने से गुरेज नहीं करते। यह दूध ग्लूकोज, रिफाइंड आयल, कार्बोनेट (खाने का सोडा), फार्मलीन, यूरिया, डिटरजेंट पाउडर व घटिया मिल्क पाउडर को केमिकल के साथ मिलाकर तैयार किया जाता है। मांग के सापेक्ष घटती दूध की सप्लाई के कारण धंधेबाजों को कमाई का यह सबसे मुफीद तरीका लगता है।
एफएसडीए के अधिकारी बताते हैं कि प्रदेश में सिंथेटिक दूध की सप्लाई के मामले अभी तक आगरा, हरियाणा व दिल्ली से सटे नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जुड़े कुछ इलाकों में लैब जांच बाद सामने आए हैं। राजधानी सहित आस-पास के जिलों में एक साल से सिंथेटिक दूध की लैब जांच से कोई भी फेल नमूना रिपोर्ट नहीं आई है।
खुद भी जांचें दूध शुद्ध है कि नहीं
दूध का अपना घनत्व होता है। इस कारण शुद्ध दूध में उंगली डालने पर वह चिपका रहेगा, जबकि पानी मिला दूध ऐसा नहीं करेगा। इसी तरह फार्मोलीन की मिलावट की जांच के लिए दूध को गर्म कर इसमें रैजोलिक एसिड डालें। ऐसा करने पर दूध का रंग लाल होने लगे तो मिलावट की पुष्टि हो जाती है। इसके अलावा शुद्ध दूध सूती कपड़े पर गिरने के कुछ सेकंड बाद छनकर नीचे गिर जाएगा। पानी मिला दूध कपड़े पर डालते ही सीधे छनकर गिरेगा। हालांकि, दूध में यूरिया, कार्बोनेट केमिकल डिटर्जेंट की मिलावट की जांच सिर्फ लैब में की जा सकती है।
बिगड़ सकता है पाचन तंत्र
पोटाश मिला दूध शरीर में एसीडिटी बढ़ाकर कुछ समय तक पाचन तंत्र बिगाड़ सकता है। इससे कुछ समय तक खट्टी डकार आने और बिना कुछ खाए पेट भरा लगने की समस्या हो सकती है।
डॉ. राकेश सिंह, वरिष्ठि फिजिशियन
पैकेजिंग प्लांट के कलेक्शन सेंटर में सप्लाई से पहले दूध में पोटाश मिलाने की बात जांच में सामने आई है। इसे रोकने को अब दूध पहुंचाने वाले ठेकेदारों की जोर से जमा किए जा रहे दूध की रेंडम जांच एफएसओ की विशेष टीम से कराई जाएगी। दूध के नमूनों की लैब जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी पर सप्लाई फर्म के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी।
एसके मिश्रा, सीएसएफओ
बिगड़ सकता है पाचन तंत्र
पोटाश मिला दूध शरीर में एसीडिटी बढ़ाकर कुछ समय तक पाचन तंत्र बिगाड़ सकता है। इससे कुछ समय तक खट्टी डकार आने और बिना कुछ खाए पेट भरा लगने की समस्या हो सकती है।
डॉ. राकेश सिंह, वरिष्ठि फिजिशियन
पैकेजिंग प्लांट के कलेक्शन सेंटर में सप्लाई से पहले दूध में पोटाश मिलाने की बात जांच में सामने आई है। इसे रोकने को अब दूध पहुंचाने वाले ठेकेदारों की जोर से जमा किए जा रहे दूध की रेंडम जांच एफएसओ की विशेष टीम से कराई जाएगी। दूध के नमूनों की लैब जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी पर सप्लाई फर्म के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी।
एसके मिश्रा, सीएसएफओ