‘इश्क की इंतिहा हो गई, तू मेरी दिलरुबा हो गई...’
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यह उनका चौथा एलबम है, जिसमें कुल 6 गजलें हैं। लॉन्चिंग के बाद डॉ. हरिओम ने अपनी गायकी से श्रोताओं का दिल जीता और माहौल में रूहानियत व रूमानियत का रंग घोल दिया।
मुख्य सचिव राजीव कुमार सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक अफसर मौजूद रहे। डॉ. हरिओम संगीत की दुनिया का ऐसा नाम हैं, जो किसी परिचय का मोहताज नहीं है। उन्होंने प्रशासनिक दक्षता के साथ-साथ गजल-गायकी में एक मुकाम हासिल किया है।
उनके सुरों का जादू रविवार को कुछ यूं चढ़ा कि श्रोता वाहवाह करते नजर आए। मंच पर हारमोनियम संभालते हुए उन्होंने श्रोताओं को सलाम किया और कलाम ‘तुझसे मिलने की आरजू भी है और तू है रूबरू भी...’ पेश किया।
इस पर श्रोता खिलखिला उठे। इसके बाद उन्होंने ठहराव की एक और गजल ‘वो बेवफा है मगर बेवफा नहीं लगता, खफा भी हो तो बजाहिर खफा नहीं लगता...’ सुनाकर वाहवाही लूटी।
ठहराव की गजल के बाद गायक ने अगला नगमा ‘साकी और पैमाने की बात चली, महफिल-महफिल मयखाने की बात चली...’ पेश किया तो माहौल बदल सा गया।
इसी बदली रुमानियत में उन्होंने जब ये नज्म ‘इश्क की इंतिहा हो गयी तू मेरी दिलरुबा हो गयी...’ श्रोताओं को पेश की तो वाहवाही केदौर शुरू हो गए, जो ‘तेरी यादों में शब घुल गयी, आंखों आंखों में सुबह हो गयी...’ शेर के बाद तक चलता रहा।
आइना छोड़िए आइने में क्या रखा है
कीबोर्ड पर विजय सैनी, तबले पर अमित और गिटार पर राकेश आर्या ने संगत की। संचालन स्मृति राज ने किया। कार्यक्त्रस्म में पूर्व आईएएस अनीस अंसारी ने ‘आज की रात मेरे साथ रहो, कुछ न कहो...’ गजल सुनाई।
एलबम में आनंद कौशल और शिवांगी यादव ने अभिनय किया है। डायरेक्शन प्रवीण द्विवेदी का है। कार्यक्रम में आला प्रशासनिक अधिकारी जितेंद्र कुमार, अनीता सिंह, चंचल तिवारी, रजनीश दुबे, आरके चतुर्वेदी मौजूद रहे।
बेगम अख्तर अवार्ड से सम्मानित गायिका सुनीता झींगरन ने डॉ. हरिओम को दो नज्म पेश किए। उन्होंने सुनाया कि ‘हम सबने आपको निगाहों में बस रखा है।
आइना छोड़िए आइने में क्या रखा है।’ इसके बाद कुछ क्षण रुकने के बाद उन्होंने ‘गुलाब ऐसे ही थोड़े गुलाब होता है, कांटों पर चलने से गुलाब होता है...’ पंक्तियां सुनाई तो डॉ हरिओम ने सिर झुककर उन्हें शुक्त्रिस्या अदा किया।
सूखी सरकारी फाइलों से निकला सूफी संगीत
उन्होंने कहा कि हरिओम ने यह सिद्ध कर दिया है कि सरकारी दफ्तरों की सूखी फाइलों से भी अच्छी बातें निकलती हैं। सूफीवाद की नदियां बह सकती हैं।
डॉ. हरिओम की पत्नी व गायिका मालविका हरिओम जब मंच पर आईं तो उन्होंने बताया कि एलबम की शूटिंग डॉ. अनीस अंसारी के घर पर हुई है और आसमा हुसैन मैम ने हमारी काफी मदद की।
आगे कहा कि डॉ. हरिओम के गाने तो बहुत खूबसूरत हैं ही, बल्कि ‘वो’ भी बड़े खूबसूरत हैं। इस पर श्रोता खिलखिला पड़े। डॉ. हरिओम का गजल गायक बनने का सफर बेहद दिलचस्प रहा है।
काबिलियत के दम पर प्रशासनिक गलियारों की व्यस्तता के बीच उन्होंने बॉलिवुड तक का सफर तय किया है। हरिओम ने हिंदी विषय से पीएचडी की है, खास बात यह है कि उनकी पत्नी मालविका भी गायिका हैं। उनकी दो बेटियां हैं और तीन पुस्तके लिखी हैं। जबकि चौथी पर वह काम कर रहे हैं। अपने व्यस्त काम के बावजूद डॉ हरिओम हर रोज दो घंटे का रियाज करते हैं।