नीति आयोग बैठक में अखिलेश ने फेंका 'इक्का'
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उत्तर प्रदेश ने केंद्र प्रायोजित योजनाओं में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी को 90 फीसदी तक बढ़ाने की मांग है। साथ ही केंद्रीय योजनाओं के बजट का 50 फीसदी राज्यों को एकमुश्त देने को कहा है।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने केंद्र के स्तर पर लखनऊ मेट्रो की मंजूरी अटकी होने, राष्ट्रीय राजमार्गों की बदहाली तथा बिजली व कोयले से जुड़े मामलों का अब तक निपटारा न होने का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नीति आयोग के गवर्निंग काउंसिल की पहली बैठक के दौरान उत्तर प्रदेश की तरफ से यह मांग उठाई गई है।
प्रधानमंत्री के आवास, 7, रेसकोर्स रोड पर रविवार को आयोजित बैठक के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा कि राज्यों के पास काम बेहद ज्यादा होते हैं, जबकि उस अनुपात में वित्तीय स्रोत कम होते हैं, इसलिए केंद्र प्रायोजित योजनाओं में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी को बढ़ा कर कम से कम 90 फीसदी की जाए।
इसके साथ ही उन्होंने राज्यों को फंड आवंटित करने की प्रक्रिया को भी और पारदर्शी बनाने का अनुरोध किया।
राज्यों पर योजनाएं न थोपे केंद्र
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय योजनाओं के साथ थोपे जाने वाली शर्तों को भी लचीला बनाने का अनुरोध करते हुए कहा कि इन योजनाओं के साथ ऐसी शर्तें थोप दी जाती हैं जिन्हें बहुत से राज्य तो पूरा ही नहीं कर पाते। जब शर्तें ही पूरी नहीं होगी तो उन्हें इन योजनाओं का लाभ कैसे मिलेगा। इसलिए योजना के साथ जुड़ी शर्तें भी आसान हो ताकि उसे हर राज्य पूरा कर ले।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबका साथ, सबका विकास नारे का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा तभी संभव हो सकेगा जब आर्थिक रूप से कमजोर राज्यों के लिए कुछ विशेष प्रावधान किए जाएंगे।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि राज्यों को फंड के आवंटन के दौरान कोई विशेषाधिकार नहीं होना चाहिए और जो भी आवंटन हो पारदर्शी ढंग से हो।
केंद्र पर कटाक्ष: विकास के पहल अभी इरादे तक ही सीमित
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास के लिए केंद्र ने अब तक जो पहल की है वे अभी इरादों तक ही सीमित हैं। दूसरी ओर समाजवादी सरकार उस तरह के अनेक काम अपने स्तर से पहले से ही कर रही है।
उन्होंने इसके लिए अपनी सरकार की कौशल विकास, सोलर पार्कों की स्थापना, डिजिटल डिवाइड दूर करने, आईटी सेवाओं को बढ़ाने, नई बैंक शाखाओं की स्थापना तथा बालिका शिक्षा व महिला कल्याण से जुड़ी योजनाओं की जानकारी दी।
इन सवालों का चाहिए जवाब
मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति आयोग के नए स्वरूप से यह स्पष्ट नहीं हो रहा कि राज्यों और केंद्र के मंत्रालयों के बीच किस प्रकार तालमेल कायम होगा। यह भी साफ नहीं हो रहा कि पिछड़े तथा कमजोर राज्यों को प्राथमिकता देते हुए उन्हें संसाधनों का हस्तांतरण कैसे होगा व कौन सी संस्था करेगी।
इसके अलावा आयोग की शासी परिषद और राष्ट्रीय विकास परिषद के गठन का स्वरूप लगभग समान है। ऐसे में परिषद के बारे में भी स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। दोनों संस्थाओं को समानान्तर बनाए रखना औचित्यपूर्ण नहीं है। इसी तरह अंतर्राज्यीय परिषद व क्षेत्रीय परिषदें गठित हैं। इन पर भी स्थिति साफ होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल में लखनऊ में मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई थी। उचित होगा कि क्षेत्रीय परिषदों को प्रभावशाली बनाया जाए। अलग-अलग सेक्टरों के लिए स्थायी कार्यदल बनें जिसमें राज्यों की भी भागीदारी हो।
पंचवर्षीय योजनाएं बनाए रखना जरूरी
अखिलेश ने कहा कि जब तक नीति आयोग की नई व्यवस्थाएं जमीन पर नहीं आती तब तक पंचवर्षीय योजना व्यवस्था को बनाए रखना चाहिए। कहा कि दूरगामी नतीजे वाली रणनीति के अंतर्गत 10-15 वर्षों की दीर्घकालीन योजनाएं तो बनाएं, लेकिन पंचवर्षीय योजनाओं का भी अपना ही महत्व है।
नीति आयोग को दिए गए सुझाव
- नीति आयोग में एक उप समिति हो जिसमें आयोग के सदस्य एवं राज्यों का प्रतिनिधित्व हो। यह उप समिति तय समय में अपनी रिपोर्ट शासी परिषद को दे। परिषद के अनुमोदन के बाद आयोग उस पर कार्यवाही करे।
- बजट का बड़ा अंश केंद्र अपने पास रोकने के बजाए राज्यों को आवंटित करे। केंद्रीय प्लान बजट का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा राज्यों को एकमुश्त दिया जाए ताकि प्रदेश स्थानीय जरूरतों व प्राथमिकताओं के मद्देनजर योजनाएं लागू कर सकें।
-वित्तीय संसाधनों के आवंटन में विवेक की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। राज्यों के बीच संसाधनों का बंटवारा पारदर्शी होना चाहिए।