{"_id":"29ca50472018815f5623bb0f54bba499","slug":"akhilesh-yadav-sacks-82-ministers-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"यूपी के 80 से अधिक दर्जाधारी मंत्री बर्खास्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूपी के 80 से अधिक दर्जाधारी मंत्री बर्खास्त
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sun, 26 Oct 2014 12:06 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तर प्रदेश में संवैधानिक संस्थाओं, आयोगों तथा लगभग एक दर्जन संस्थानों को छोड़कर अखिलेश सरकार ने सभी दर्जा प्राप्त मंत्रियों को शनिवार को बर्खास्त कर दिया। सरकार ने सौ से ज्यादा नेताओं को विभिन्न निगमों व विभागों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष तथा सलाहकार बनाकर मंत्री का दर्जा दे रखा है। बर्खास्त किए गए दर्जाधारी मंत्रियों की सूची फिलहाल जारी नहीं की गई है, पर माना जा रहा है कि 80 से ज्यादा नेताओं पर गाज गिरी है।
विज्ञापन
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग, पिछड़ा वर्ग आयोग, राज्य महिला आयोग, अल्पसंख्यक आयोग, चयन आयोग व भर्ती बोर्ड, संवैधानिक संस्थाओं व आयोगों के साथ-साथ राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष नवीन चंद्र बाजपेयी, भाषा संस्थान के अध्यक्ष गोपाल दास नीरज, हिंदी संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष उदय प्रताप सिंह, हिंदुस्तानी अकादमी के अध्यक्ष सुनील जोगी, यूपी एग्रो के अध्यक्ष तारकेश्वर मिश्र, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष जावेद आब्दी, व्यावसायिक शिक्षा विभाग के सलाहकार फरजंद अहमद, भूतपूर्व सैनिक कल्याण निगम के अध्यक्ष ब्रिगेडियर आर.डी. सिंह, उर्दू अकादमी के चेयरमैन नवाज देवबंदी व उद्यमिता विकास संस्थान के अध्यक्ष को छोड़कर सभी दर्जा प्राप्त मंत्रियों की छुट्टी कर दी गई है।
विज्ञापन
समाजवादी पार्टी में ‘गद्दारों’ को चिह्नित करने की कवायद शुरू करने के साथ ही अखिलेश सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाते हुए कुछ को छोड़कर ज्यादातर दर्जा प्राप्त राज्यमंत्रियों को हटा दिया। इनमें में कई के खिलाफ पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने की शिकायतें थीं तो कुछ के परिजनों की दबंगई की वजह से पार्टी की छवि को नुकसान होने की चर्चा थी। हाल ही में बागपत में दर्जाप्राप्त मंत्री कुलदीप उज्ज्वल के पिता धर्मपाल चौधरी द्वारा पुलिस को सरेआम धमकी दी गई थी जिसे सरकार ने गंभीरता से लिया था। सूत्रों का कहना है कि सपा के महाधिवेशन में इसकी भूमिका तैयार हो गई थी।
विज्ञापन
तय मानी जा रही थी कार्रवाई
पार्टी महासचिव राम गोपाल यादव ने जिस तरह से गद्दारी का मुद्दा उठाया था उससे इस तरह की कार्रवाई तय मानी जा रही थी। जानकारों का कहना है कि मिशन 2017 की तैयारियों में जुटी सपा ने दर्जाधारी मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाकर यह साबित करने की कोशिश की है कि पार्टी विरोधी काम करने वालों के साथ वह किसी तरह की रियायत बरतने के मूड में नहीं है।
हटाने की वजह कहीं अदालत तो नहीं
लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद इसी साल मई में भी सरकार ने 36 दर्जाप्राप्त मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया था। हालांकि बाद में इनमें से कई फिर से कुर्सी से नवाज दिया गया था। भारी संख्या में पार्टी नेताओं को दर्जाधारी मंत्री बनाकर लालबत्ती देने पर पर हाईकोर्ट भी सवाल उठा चुका है। इसके बाद राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई थी लेकिन शीर्ष अदालत ने इस मामले को वापस हाईकोर्ट के सिपुर्द कर दिया था। हाईकोर्ट में अब 21 नवंबर को इसकी सुनवाई भी होनी है। सरकार के इस कदम को हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
इनकी कुर्सी बची
नवीन चंद्र वाजपेयी : उपाध्यक्ष राज्य योजना आयोग
डॉ. गोपाल दास नीरज : अध्यक्ष उ.प्र. भाषा संस्थान
उदय प्रताप सिंह : कार्यकारी उपाध्यक्ष उ.प्र. हिंदी संस्थान
सुनील जोगी : अध्यक्ष हिंदुस्तानी अकादमी, इलाहाबाद
तारकेश्वर मिश्र : अध्यक्ष यूपी एग्रो
जावेद आब्दी : अध्यक्ष प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
फरजंद अहमद : सलाहकार व्यावसायिक शिक्षा परिषद
ब्रिगेडियर आर.डी. सिंह : अध्यक्ष, भूतपूर्व सैनिक कल्याण निगम
नवाज देवबंदी : चेयरमैन उर्दू अकादमी
अध्यक्ष, उद्यमिता विकास संस्थान
उ.प्र. अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग
राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग
राज्य महिला आयोग
अल्पसंख्यक आयोग
चयन आयोग/ भर्ती बोर्ड
संवैधानिक संस्थाएं/ आयोग