केंद्रीय मंत्री ने अखिलेश को 'चूरन' देकर लौटाया!
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2016 तक सूबे के शहरी इलाकों को 22 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों को 16 घंटे बिजली देने की प्रदेश सरकार की योजना को पलीता लग सकता है।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व केंद्रीय बिजली मंत्री पीयूष गोयल की बहुप्रतीक्षित मुलाकात के बाद भी प्रदेश को उम्मीद के हिसाब से मदद नहीं मिल सकी। यूपी की बोली में कहा जाए तो पीयूष गोयल ने अखिलेश को 'चूरन' थमाकर टरका दिया।
दरअसल, प्रदेश सरकार की ओर से बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के नेटवर्क को विकसित करने के लिए पावर सिस्टम डवलपमेंट फंड से 2635 करोड़ रुपये की सहायता की मांग रखी गई थी। लेकिन केंद्र ने महज 500 करोड़ देने की सहमति दी। कई दूसरे मदों में भी मुख्यमंत्री की मांग पर केंद्र ने केवल भरोसा ही दिया।
बिजली व कोयला को लेकर केंद्र व राज्य के बीच महीनों चली तकरार के बाद प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक के हस्तक्षेप के बाद दिल्ली में यह मुलाकात संभव हो पाई। पिछले महीने पीयूष गोयल की यात्रा टल गई थी।
मुख्यमंत्री ने सूबे में बिजली-व्यवस्था में सुधार के लिए अलग-अलग मद में भारी-भरकम मदद की लिस्ट थमा दी। गोयल ने भी कई कार्यों में केंद्र से भरपूर मदद का आश्वासन दिया।
केंद्र सरकार ने किया सहयोग का वादा
ग्रामीण इलाके में कृषि व घरों के फीडर को अलग-अलग करने के लिए दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत 75 फीसदी राशि केंद्र सरकार देगी।
प्रदेश में 854 वितरण सब स्टेशन लगाने पर भी चर्चा हुई। इस काम में भी केंद्र सरकार ने सहयोग देने का वादा किया है। बैठक में दादरी पावर प्लांट से उत्तर प्रदेश को और अधिक बिजली आवंटित करने पर भी विचार किया गया।
वेस्टर्न कॉरिडोर के निर्माण की हर माह समीक्षा
ट्रांसमिशन प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार और पावर ग्रिड मिलकर हर महीने वेस्टर्न कॉरिडोर के निर्माण कार्य की समीक्षा करेगी।
वर्ष 2016 दिसंबर तक वेस्टर्न कॉरिडोर का काम पूरा किया जाना है और इसके निर्माण से सबसे अधिक फायदा उत्तर प्रदेश को मिलेगा।
प्रदेश को क्या मिला
- झांसी और जालौन में 250-250 मेगावाट की दो सोलर परियोजनाओं की होगी स्थापना
- घाटमपुर थर्मल परियोजना को लेकर पर्यावरण और वन मंजूरी में आ रही दिक्कतों को जल्द सुलझाया जाएगा
- 4000 मेगावाट बिजली आपूर्ति के लिए पावर पर्चेज एग्रीमेंट (पीपीए) होगा। इसमें प्रदेश सरकार के हित में नियमों में मिलेगी ढील