फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   akhilesh goverment again pass crore rupees in supplimentry budget.

जेब नहीं हुई थी खाली, सीएम ने फिर भर डाली

Wed, 19 Nov 2014 11:38 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 19 Nov 2014 11:38 AM IST
विज्ञापन
akhilesh goverment again pass crore rupees in supplimentry budget.

14,856 करोड़ रुपये का अब तक का सबसे बड़ा अनुपूरक बजट पेश कर 2017 में यूपी की सत्ता पर फिर काबिज होने के सपने देख रही सपा सरकार बजट प्रबंधन में कौशल नहीं दिखा पाई।

विज्ञापन


विकास के नाम पर आम बजट में अरबों-खरबों रुपये लेने के बावजूद खर्च में सुस्ती दिखाने वाले कई विभागों की झोली फिर भर गई। बजट देने में सरकार की दरियादिली में विभाग की कार्यक्षमता (परफार्मेंस) पीछे छूट गई, मंत्रियों का कद हावी रहा।
विज्ञापन


बजट से सियासत की गोटी बिछाने के चक्कर में सरकार ने बजट प्रबंधन की जिम्मेदारी से ज्यादा इत्तेफाक न रखने का संदेश भी दे दिया।

विशेषज्ञों का कहना है कि सुस्ती दिखाने वाले विभागों पर दरियादिली दिखाकर माहौल बदलने की उम्मीद कर रही सरकार का दांव उल्टा भी पड़ सकता है।

सरकार जनता को तो यह संदेश दे सकती है कि वह उससे जुड़ी योजनाओं के लिए खूब बजट दे रही है। अगर पैसा खर्च नहीं हो पाया तो बची रकम को सरेंडर करने की नौबत आएगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

सीएजी की रिपोर्ट में सामने आया सच

akhilesh goverment again pass crore rupees in supplimentry budget.

सीएजी की मार्च 2013 की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2012-13 में 30 योजनाओं में 3135.64 करोड़ का अनुपूरक अनुदान प्राप्त किया जो अनावश्यक सिद्ध हुआ। वजह, मूल बजट ही खर्च नहीं किया जा सका था।

39 मामलों में इस तरह अनुदान दिया गया कि वित्त वर्ष की समाप्ति पर 100-100 करोड़ से अधिक की बचत मिली। 131 ऐसे मामले मिले जिसमें 10 करोड़ या कुल बजट का 20 प्रतिशत तक बजट बच गया।

सात विभागों में ऐसी भी योजनाएं रही जिसमें 500 करोड़ से ज्यादा की बचत हुई। 15 अनुदानों के अंतर्गत 19 ऐसे मामले मिले जिसमें पांच वर्षों से लगातार बचत होती रही।

विभिन्न कारणों से 20012-13 में 190 योजनाओं अथवा कार्यक्रमों में कुल प्राविधानित 4062.83 करोड़ रुपये में से 3358.92 करोड़ यानी 83 प्रतिशत की धनराशि सरेंडर करनी पड़ी। इनमें 76 योजनाओं व कार्यक्रमों के लिए दिया गया पूरा बजट शामिल है।

कुछ तो ऐसे हैं जो बजट की 50 फीसदी स्वीकृतियां भी जारी नहीं कर पाए। खर्च तो बहुत दूर की कौड़ी है। समाज कल्याण विभाग तो स्वीकृत राशि का सिर्फ 3.4 फीसदी ही खर्च कर सका।

प्रबंधन के लिहाज से उचित नहीं बजट

akhilesh goverment again pass crore rupees in supplimentry budget.

आम बजट में मिली रकम खर्च करने में फिसड्डी विभागों पर भी अनुपूरक बजट में सरकार की मेहरबानी से जानकार इत्तेफाक नहीं रखते।

बजट के विशषज्ञों का कहना है कि यह बजट प्रबंधन के लिहाज से उचित नहीं है। उनका कहना है कि इस तरह के अनुपूरक आवंटन से वित्त वर्ष के अंत में बड़ी मात्रा में पैसा सरेंडर करने की नौबत आ सकती है।

इसे बजट प्रबंधन के लिहाज से बिलकुल भी आदर्श स्थिति नहीं माना जा सकता। सीएजी भी कई बार इस तरह की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा कर चुकी है।

नगर विकास विभाग, ऊर्जा, माध्यमिक शिक्षा, अल्पसंख्यक कल्याण जैसे भारी-भरकम बजट वाले विभागों में अभी भी बड़ा हिस्सा खर्च होने के लिए पड़ा हुआ है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed