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Lucknow News: मोहनलालगंज में खेती की जमीन सबसे सस्ती और सबसे महंगी भी

Mon, 01 Jun 2026 02:07 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 01 Jun 2026 02:07 AM IST
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Agricultural land is the cheapest and also the most expensive in Mohanlalganj.
प्रतीकात्मक।
लखनऊ। कृषि भूमि की प्रस्तावित नई सर्किल दरों ने मोहनलालगंज तहसील को अनोखी स्थिति में लाकर खड़ा किया है। जिले की सबसे सस्ती और सबसे महंगी, दोनों ही श्रेणियों की कृषि भूमि इसी तहसील में प्रस्तावित हैं। इसके चलते एक ही तहसील के भीतर जमीनों के मूल्यांकन में तीन गुना से भी अधिक का अंतर आ गया है।
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मोहनलालगंज के कनेरी, कोडरा रायपुर, खदुदीखेड़ा, गोविंदपुर, जमौरिया, जहांगीरपुर, दयालपुर, नटौली और नंदौली जैसे गांवों में सामान्य कृषि भूमि की प्रस्तावित दर 30 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर है। यह पूरे जिले में सबसे कम है। वहीं, इसी तहसील के गौरा, बेंदौवा, भसंडा, सिठौली कला और हुलासखेड़ा गांवों में जनपदीय मार्ग व आबादी से सटी भूमि की दर 98 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गई है।
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सदर और सरोजनीनगर के महंगे इलाके



जिले के अन्य महंगे क्षेत्रों में सरोजनीनगर तहसील के बरकताबाद जहांगीराबाद में दर 97 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर प्रस्तावित है। वहीं, सदर तहसील के पपनामऊ में 95 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर और सरोजनीनगर के जैतीखेड़ा, नीवां, परवर पूर्व व परवर पश्चिम जैसे गांवों में 91 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर तय की गई है।
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भूमि मूल्यांकन के यह नए आंकड़े साफ दर्शाते हैं कि राजधानी के तेजी से विकसित हो रहे कॉरिडोर और पारंपरिक ग्रामीण इलाकों के बीच जमीन के सरकारी दामों में एक बड़ी खाई बन चुकी है। प्रस्ताव लागू होने पर उच्च दर वाले क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री महंगी हो जाएगी और स्टांप शुल्क का बोझ भी बढ़ेगा, जबकि कम दर वाले गांव अब भी जिले में सस्ती जमीन के विकल्प बने रहेंगे।


नई सर्किल दरों से पहले बाजार में बढ़ी हलचल, कल तक दर्ज होंगी आपत्तियां



प्रस्तावित सर्किल दरों को लेकर रियल एस्टेट क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है। दरों का अध्ययन करने के लिए जमीन मालिकों, कॉलोनाइजरों और प्रॉपर्टी कारोबारियों में जमीन और मकानों के मूल्यांकन पर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कई लोग अपने क्षेत्र की प्रस्तावित दरों का मौजूदा बाजार मूल्य से मिलान कर रहे हैं, जबकि कारोबारी वर्ग संभावित प्रभाव का आकलन करने में जुटा है। डीएम विशाख जी ने बताया कि दो जून तक प्राप्त सुझावों और आपत्तियों पर विचार के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। तीन जून को आपत्तियों पर सुनवाई होगी। सर्किल दरों का निर्धारण सीधे तौर पर संपत्ति के पंजीकरण मूल्य और स्टांप शुल्क को प्रभावित करता है, इसलिए प्रस्तावित बदलावों को लेकर लोगों की विशेष रुचि बनी हुई है।
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