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Lucknow News: जांच के बाद मामला रफा-दफा, फिर खुल जाते सील अस्पताल
Thu, 02 May 2024 03:33 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Thu, 02 May 2024 03:33 AM IST
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रायबरेली। जिले में कुकुरमुत्ते की तरह फैले अवैध व मानकविहीन निजी अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई सिर्फ जांच तक ही सिमटकर रह गई है। मरीजों की मौत के नाम पर मात्र खानापूरी की जा रही है। जांच में मामलों को रफा-दफा करके संचालकों को क्लीनिक चिट यह कह कर दे दिया जा रहा है कि जांच में कार्रवाई के लिए साक्ष्य नहीं मिले। कई सील किए गए अस्पतालों को मात्र इसी कारण खोल दिया गया कि जांच में आरोप सिद्ध ही नहीं हुए।
मासूम राघव का हाथ सड़ने और मौत के मामले में मंडलायुक्त के निर्देश पर सील किए गए सत्यम अस्पताल को जांच पूरी होने के बाद खोल दिया गया। जांच में आरोप सिद्ध नहीं हो सके। शर्मा नर्सिंगहोम में सरेनी की अनीता की मौत के बाद कई दिनों तक खूब हंगामा हुआ। बाद में जांच में आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी।
फीनिक्स अस्पताल में डीह की शांती की मौत के मामले में भी जांच कमेटी आरोपों को सिद्ध करने में नाकाम रही। सैनिक हॉस्पिटल के मामले में भी जांच कमेटी कार्रवाई करने में नाकाम नजर आई। जिले के निजी अस्पतालों में अब तक कई मौतें हुईं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सीलिंग, जांच और आरोप सिद्ध न होने के कारण दोबारा हॉस्पिटलों को क्लीनचिट थमा दी जा रही है। ऐसे में मरीजों और उनके तीमारदारों के हिस्से में सिर्फ परेशानी और भागदौड़ ही आती है।
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फर्जी डॉक्टर की सर्जरी मामले में जांच अधूरी
बीती 22 अप्रैल को हरचंदपुर के उपमा सुर्जरानी पाली क्लीनिक में प्रसूता विशाखा का सिजेरियन फर्जी डॉक्टर ने किया था। विरोध प्रदर्शन के बाद पीडि़त की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया, लेकिन स्वास्थ्य विभाग अब तक जांच पूरी करने में नाकाम है।
पुलिस भी एसीएमओ की जांच कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। इसी रिपोर्ट के आधार पर मामले में पुलिसिया कार्रवाई होनी है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार मनमाना रवैया अपनाए हैं। जांच टीम प्रभारी व एसीएमओ डॉ. अरविंद का कहना है कि काम अधिक होने के कारण अब फुरसत मिली है। जल्द ही जांच पूरी कर रिपोर्ट अधिकारियों को सौंपी जाएगी।
एक साल में 200 नोटिसें जारी पर कार्रवाई में
स्वास्थ्य विभाग ने झोलाछाप और अवैध अस्पतालों के खिलाफ बाकायदा नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। इसके बाद भी जिले में 400 से अधिक झोलाछाप रोजाना मरीजों की जान के दुश्मन बने हुए हैं। निरीक्षण के नाम पर सिर्फ जेब मोटी करने का काम हो रहा है। एक साल में करीब 200 लोगों को नोटिस थमाया गया, लेकिन कार्रवाई के नाम पर नोटिसें गुम हो गईं। विभागीय अफसरों के इस कारनामे को रोकने के लिए आला अफसर भी सुस्त रवैया अपनाए हैं।
अस्पतालों के खिलाफ जो भी शिकायतें आती हैं, उनकी जांच एसीएमओ व नोडल डॉ. अरविंद कुमार को दे दिया जाता है। जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाती है। झोलाछाप के खिलाफ भी अभियान शुरू कराया गया है। मानकविहीन अस्पतालों पर कार्रवाई होगी।
डॉ. वीरेंद्र सिंह, सीएमओ
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मासूम राघव का हाथ सड़ने और मौत के मामले में मंडलायुक्त के निर्देश पर सील किए गए सत्यम अस्पताल को जांच पूरी होने के बाद खोल दिया गया। जांच में आरोप सिद्ध नहीं हो सके। शर्मा नर्सिंगहोम में सरेनी की अनीता की मौत के बाद कई दिनों तक खूब हंगामा हुआ। बाद में जांच में आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी।
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फीनिक्स अस्पताल में डीह की शांती की मौत के मामले में भी जांच कमेटी आरोपों को सिद्ध करने में नाकाम रही। सैनिक हॉस्पिटल के मामले में भी जांच कमेटी कार्रवाई करने में नाकाम नजर आई। जिले के निजी अस्पतालों में अब तक कई मौतें हुईं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सीलिंग, जांच और आरोप सिद्ध न होने के कारण दोबारा हॉस्पिटलों को क्लीनचिट थमा दी जा रही है। ऐसे में मरीजों और उनके तीमारदारों के हिस्से में सिर्फ परेशानी और भागदौड़ ही आती है।
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फर्जी डॉक्टर की सर्जरी मामले में जांच अधूरी
बीती 22 अप्रैल को हरचंदपुर के उपमा सुर्जरानी पाली क्लीनिक में प्रसूता विशाखा का सिजेरियन फर्जी डॉक्टर ने किया था। विरोध प्रदर्शन के बाद पीडि़त की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया, लेकिन स्वास्थ्य विभाग अब तक जांच पूरी करने में नाकाम है।
पुलिस भी एसीएमओ की जांच कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। इसी रिपोर्ट के आधार पर मामले में पुलिसिया कार्रवाई होनी है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार मनमाना रवैया अपनाए हैं। जांच टीम प्रभारी व एसीएमओ डॉ. अरविंद का कहना है कि काम अधिक होने के कारण अब फुरसत मिली है। जल्द ही जांच पूरी कर रिपोर्ट अधिकारियों को सौंपी जाएगी।
एक साल में 200 नोटिसें जारी पर कार्रवाई में
स्वास्थ्य विभाग ने झोलाछाप और अवैध अस्पतालों के खिलाफ बाकायदा नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। इसके बाद भी जिले में 400 से अधिक झोलाछाप रोजाना मरीजों की जान के दुश्मन बने हुए हैं। निरीक्षण के नाम पर सिर्फ जेब मोटी करने का काम हो रहा है। एक साल में करीब 200 लोगों को नोटिस थमाया गया, लेकिन कार्रवाई के नाम पर नोटिसें गुम हो गईं। विभागीय अफसरों के इस कारनामे को रोकने के लिए आला अफसर भी सुस्त रवैया अपनाए हैं।
अस्पतालों के खिलाफ जो भी शिकायतें आती हैं, उनकी जांच एसीएमओ व नोडल डॉ. अरविंद कुमार को दे दिया जाता है। जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाती है। झोलाछाप के खिलाफ भी अभियान शुरू कराया गया है। मानकविहीन अस्पतालों पर कार्रवाई होगी।
डॉ. वीरेंद्र सिंह, सीएमओ