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राजस्थान का विधायक बताकर दिया था 120 करोड़ के टेंडर का लालच, पेन ड्राइव में दिया डिजाइन

Thu, 13 Aug 2020 04:53 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 13 Aug 2020 04:53 PM IST
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ACP swatantra singh will investigate tender scam in animal husbandry department
प्रतीकात्मक तस्वीर
पशुपालन विभाग का टेंडर दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये ठगने वाले शातिरों में से एक सुनील गुर्जर उर्फ मोंटी गुर्जर ने गुजरात के कारोबारी नीलम नरेंद्र भाई पटेल से खुद को राजस्थान का विधायक बताया था। उसने गुजरात में रॉयल फर्टीलाइजर एंड केमिकल्स कंपनी के मालिक कलीम अहमद के जरिए नीलम नरेंद्र भाई पटेल से संपर्क किया और टेंडर दिलाने के नाम पर छह करोड़ छह लाख रुपये हड़प लिए। पुलिस आयुक्त सुजीत पांडेय ने बताया कि ठगी के प्रकरण की जांच एसीपी स्वतंत्र कुमार सिंह को सौंपी गई है। जल्द शिकायतकर्ता के बयान दर्ज किए जाएंगे।
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पुलिस के मुताबिक, सुनील गुर्जर उर्फ मोंटी गुर्जर ने कलीम अहमद के कारोबार में साझेदार व अहमदाबाद के अम्बलि रोड रेलवे स्टेशन, थेल्ताज निवासी जिगर राजेंद्र भाई गंजवाला और शिकायतकर्ता नीलम नरेंद्र भाई पटेल आपस में दोस्त हैं। जिगर राजेंद्र केमिकल कंपनी में साझेदारी के साथ ही नीलम नरेंद्र की खाद्य सामग्री की आपूर्ति से संबंधित कारोबार में भी पार्टनर है।
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मोंटी गुर्जर ने कलीम के माध्यम से जिगर राजेंद्र से संपर्क किया और खुद को राजस्थान का विधायक व अपने पिता राम नारायण गुर्जर को वहां का पूर्व मंत्री बताते हुए उत्तर प्रदेश में नमक की सप्लाई का टेंडर दिलाने का लालच दिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लखनऊ के नोवोटेल और दिल्ली के विभिन्न ठिकानों पर दोनों के बीच हुई बैठकों में मोंटी गुर्जर ने कहा था कि नमक की आपूर्ति गरीबों को मुफ्त राशन के पॉयलट प्रोजेक्ट के तौर पर की जानी है।
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नीलम नरेंद्र ने इतना बड़ा टेंडर बिना अधिकारिक नोटिफिकेशन के निकालने पर सवाल उठाए तो खुद को लखनऊ सचिवालय में बतौर तैनात संयुक्त सचिव एनके कनौजिया बताने वाले जालसाज आशीष राय ने कहा था कि वह एक सरकारी अधिकारी है और उसे किसी भी कंपनी के पॉयलट प्रोजेक्ट में 200 से 300 करोड़ रुपये तक के बजट का ठेका देने की पावर है। 

ठेके की रकम का 10 प्रतिशत मांगा था खर्च 

शातिर जालसाजों ने 120 करोड़ रुपये का ठेका दिलाने के बदले 10 प्रतिशत खर्च मांगा था। मोंटी गुर्जर का कहना था कि यह 10 प्रतिशत रकम सचिवालय के कथित संयुक्त सचिव एनके कनौजिया को देनी है। उसने पांच प्रतिशत रकम एडवांस देने को कहा था जबकि बाकी का पांच प्रतिशत बिलिंग के वक्त मांगा था।

जालसाजों का यह भी कहना था कि जो पांच प्रतिशत धनराशि एडवांस के तौर पर दी जा रही है, वह पांच-छह विभागों में अधिकारियों में बांटी जाएगी। यही नहीं, नीलम नरेंद्र से छह प्रतिशत अतिरिक्त खर्च बिलिंग प्रॉफिट के मुताबिक भी देने को कहा गया था जिसमें मोंटी गुर्जर और कलीम अहमद का कमीशन शामिल था। 

विधानसभा भवन स्थित सचिवालय में रात आठ बजे शुरू होती थी मीटिंग

पीड़ित कारोबारी नीलम नरेंद्र के मुताबिक मोंटी गुर्जर ने उसे 11 सितंबर 2019 की शाम करीब छह बजे लखनऊ विधानसभा सचिवालय में बैठक के लिए बुलाया था। हालांकि, मीटिंग रात आठ बजे शुरू हुई। मोंटी गुर्जर ने उसे विधानसभा भवन के गेट नंबर सात पर बुलाया। वहां से एनके कनौजिया की फॉर्च्यूनर कार से उन्हें सचिवालय के भीतर ले जाया गया।

कनौजिया के केबिन के बाहर उसके नाम के साथ जॉइंट सेक्रेटरी की तख्ती लगी थी। उसी कमरे में बैठक में टेंडर को लेकर बातचीत हुई। दोबारा भी सचिवालय में रात को आठ बजे ही कथित संयुक्त सचिव कनौजिया के साथ मीटिंग हुई थी। कारोबारी का कहना है कि शातिर जालसाजों ने सचिवालय में ठगी का पूरा सेट बना रखा था।

कारोबारी ने बताया कि विधानसभा सचिवालय के भीतर हुई मीटिंग में कथित संयुक्त सचिव एनके कनौजिया बने आशीष राय ने उससे एक एमओयू पर हस्ताक्षर कराए थे। यह एमओयू दरअसल उत्तर प्रदेश सरकार के खाद्य एवं रसद विभाग तथा उनकी कंपनी योर्स एथनिक फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के बीच एक फर्जी अनुबंध पत्र था जिस पर उत्तर प्रदेश शासन के वित्त नियंत्रक का फर्जी अनुमोदन भी था। एनके कनौजिया ने एक पेन ड्राइव देते हुए कहा था कि उसमें उत्तर प्रदेश सरकार का लोगो और नमक की पैकिंग का डिजाइन है। माल की आपूर्ति के लिए डिजायन के पैकेट बनवाने हैं। 

पांच प्रतिशत रकम एडवांस न देने पर धमकाया
जालसाजों ने गुजरात के कारोबारी नीलम नरेंद्र भाई पटेल से टेंडर की कुल धनराशि का पांच प्रतिशत एडवांस के रूप में छह लाख रुपये मांगा था। यह रकम देने में नीलम नरेंद्र को देर हो गई तो उन्होंने धमकाना शुरू कर दिया। 
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