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जांघ के मांस को गाल पर फिट कर बदली जिंदगी, साल भर से खुला था मुंह, नहीं खा पा रहा था खाना
Wed, 20 Nov 2019 03:46 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Wed, 20 Nov 2019 03:46 PM IST
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सर्जरी करने वाले प्रोफेसर बृजेश मिश्रा
- फोटो : अमर उजाला
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केजीएमयू के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के चिकित्सकों ने जांघ से मांस लेकर गाल पर बने गड्ढे को भर दिया है। अब मरीज की कुरूपता खत्म हो गई है और वह सालभर बाद मुंह से खाना खाने लगा है। मरीजहेपेटाइटिस सी वायरस (एचसीवी) से ग्रसित था। ऐसे में संक्रमण को रोकना भी चुनौतीपूर्ण था।
केस स्टडी : ट्यूमर की सर्जरी के बाद मुंह टेढ़ा हो गया था
बिजनौर निवासी 27 साल के युवक के गाल के नीचे दाड़ की हड्डी से जुड़ा हुआ ट्यूमर हो गया था। पीजीआई चंडीगढ़ में वर्ष 2018 में उसकी सर्जरी हुई। सर्जरी के बाद मरीज की मुंह टेढ़ा हो गया। उसका मुंह खुला रहने लगा। बायीं आंख लटक गई थी। नाक भी टेढ़ी हो गई थी। उसका चेहरा वीभत्स लगने लगा। वह मुंह से खाना भी नहीं खा पा रहा था। सालभर से उसे ट्यूब के जरिए तरल पदार्थ दिया जा रहा था।
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केस स्टडी : ट्यूमर की सर्जरी के बाद मुंह टेढ़ा हो गया था
बिजनौर निवासी 27 साल के युवक के गाल के नीचे दाड़ की हड्डी से जुड़ा हुआ ट्यूमर हो गया था। पीजीआई चंडीगढ़ में वर्ष 2018 में उसकी सर्जरी हुई। सर्जरी के बाद मरीज की मुंह टेढ़ा हो गया। उसका मुंह खुला रहने लगा। बायीं आंख लटक गई थी। नाक भी टेढ़ी हो गई थी। उसका चेहरा वीभत्स लगने लगा। वह मुंह से खाना भी नहीं खा पा रहा था। सालभर से उसे ट्यूब के जरिए तरल पदार्थ दिया जा रहा था।
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केजीएमयू की टीम ने दोबारा सर्जरी प्लान की
प्रतीकात्मक तस्वीर
अक्तूबर के पहले सप्ताह में केजीएमयू के प्लास्टिक सर्जरी विभाग आया। यहां प्रोफेसर बृजेश मिश्रा ने उसकी दोबारा सर्जरी प्लान किया। 15 अक्तूबर को सर्जरी की गई। जांघ से मांस का लोथड़ा लेकर उसे गाल पर फिट किया गया। इसके लिए चेहरे, नाक, आंख की बारीक नसों को ढूंढकर जांघ से लिए गए मांस की नसों से जोड़ा गया। अब उसके चेहरे की विकृति ठीक हो गई है। उसका मुंह भी बंद रहने लगा है और वह खा पी रहा है। उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
ये सर्जरी खास क्यों : सबसे बड़ी चुनौती एचसीवी का संक्रमण
मरीज एचसीवी ग्रसित था। यह इंफेक्शन एचआईवी से भी गंभीर होता है। मरीज केजीएमयू से पहले कई चिकित्सा केंद्रों पर गया, लेकिन एचसीवी होने की वजह से उसकी सर्जरी करने को कोई तैयार नहीं था। सर्जरी टीम को खुद को बचाना और मरीज से दूसरों को किसी तरह का संक्रमण न होने पाए, इस पर विशेष तौर पर फोकस किया गया। जिस स्थान से चमड़ा सहित मांस का टुकड़ा लिया गया, वहां के घाव के साथ ही आंख को उसके मूल स्थान पर फिट करना भी चिकित्सकों के लिए बड़ी चुनौती थी।
इस टीम ने की सर्जरी
प्रो. बृजेश मिश्रा के साथ डॉ. शिल्पी कर्मकार, डॉ. अभिजात मिश्रा, डॉ. निखिल मक्कर, डॉ. सुरेंद्र, डॉ. मणिगंदन एनेस्थिसिया से डॉ. सतीश वर्मा व उनकी टीम शामिल थी।
ये सर्जरी खास क्यों : सबसे बड़ी चुनौती एचसीवी का संक्रमण
मरीज एचसीवी ग्रसित था। यह इंफेक्शन एचआईवी से भी गंभीर होता है। मरीज केजीएमयू से पहले कई चिकित्सा केंद्रों पर गया, लेकिन एचसीवी होने की वजह से उसकी सर्जरी करने को कोई तैयार नहीं था। सर्जरी टीम को खुद को बचाना और मरीज से दूसरों को किसी तरह का संक्रमण न होने पाए, इस पर विशेष तौर पर फोकस किया गया। जिस स्थान से चमड़ा सहित मांस का टुकड़ा लिया गया, वहां के घाव के साथ ही आंख को उसके मूल स्थान पर फिट करना भी चिकित्सकों के लिए बड़ी चुनौती थी।
इस टीम ने की सर्जरी
प्रो. बृजेश मिश्रा के साथ डॉ. शिल्पी कर्मकार, डॉ. अभिजात मिश्रा, डॉ. निखिल मक्कर, डॉ. सुरेंद्र, डॉ. मणिगंदन एनेस्थिसिया से डॉ. सतीश वर्मा व उनकी टीम शामिल थी।