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सर्जरी कर अलग किए गए पेट से जुड़े बच्चे, केजीएमयू के इतिहास में अपनी तरह का पहला ऑपरेशन
Mon, 30 Nov 2020 03:05 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Mon, 30 Nov 2020 03:05 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
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पेट से जुड़े जुड़वा बच्चों का ऑपरेशन कर उन्हें अलग किया गया था। केजीएमयू के डॉक्टरों ने इस जटिल सर्जरी को अंजाम दिया। अब दोनों बच्चे पूरी तरह स्वस्थ हैं। कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. विपिन पुरी ने बताया कि यह ऑपरेशन आयुष्मान योजना के तहत किया गया था।
यह जटिल ऑपरेशन करने वाली डॉक्टरों की टीम में अलग-अलग विभागों के 28 डॉक्टर और नर्स शामिल थे। टीम के सभी सदस्यों को प्रशस्ति प्रत्र देकर सम्मानित किया गया है। केजीएमयू के कुलपति ने बताया कि बच्चों के माता-पिता कुशीनगर में मजदूरी करते हैं।
गरीब होने के कारण उनके लिए ऑपरेशन का खर्च उठाना मुश्किल था। बच्चे जन्म से ही आपस में जुड़े थे, जिस कारण गोरखपुर मेडिकल कॉलेज से इन्हें केजीएमयू रेफर किया गया था। जांच में पता चला कि दोनों बच्चों का लिवर एक ही है।
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केजीएमयू में कई विभाग के डॉक्टरों ने इनकी जांच की और सर्जरी का निर्णय लिया। वीसी ने बताया कि ऑपरेशन के बाद कई दिनों तक बच्चे वेंटिलेटर पर रहे। अब दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। डॉ. पूरी के मुताबिक केजीएमयू के इतिहास में अपनी तरह का यह पहला ऑपरेशन था। जुड़वा बच्चों के कई अंग जुड़े होने या दोनों में एक ही अंग होने से ऑपरेशन मुश्किल होता है।
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यह जटिल ऑपरेशन करने वाली डॉक्टरों की टीम में अलग-अलग विभागों के 28 डॉक्टर और नर्स शामिल थे। टीम के सभी सदस्यों को प्रशस्ति प्रत्र देकर सम्मानित किया गया है। केजीएमयू के कुलपति ने बताया कि बच्चों के माता-पिता कुशीनगर में मजदूरी करते हैं।
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गरीब होने के कारण उनके लिए ऑपरेशन का खर्च उठाना मुश्किल था। बच्चे जन्म से ही आपस में जुड़े थे, जिस कारण गोरखपुर मेडिकल कॉलेज से इन्हें केजीएमयू रेफर किया गया था। जांच में पता चला कि दोनों बच्चों का लिवर एक ही है।
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केजीएमयू में कई विभाग के डॉक्टरों ने इनकी जांच की और सर्जरी का निर्णय लिया। वीसी ने बताया कि ऑपरेशन के बाद कई दिनों तक बच्चे वेंटिलेटर पर रहे। अब दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। डॉ. पूरी के मुताबिक केजीएमयू के इतिहास में अपनी तरह का यह पहला ऑपरेशन था। जुड़वा बच्चों के कई अंग जुड़े होने या दोनों में एक ही अंग होने से ऑपरेशन मुश्किल होता है।