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वित्तीय अनियमितता के आरोपी प्रधानाचार्य से होगी वसूली, लखनऊ में की थी अनियमितता
Fri, 05 Mar 2021 12:06 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Fri, 05 Mar 2021 12:06 PM IST
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भ्रष्टाचार
- फोटो : un hindi samachar
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भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत योगी सरकार ने मुरादाबाद स्थित राजकीय महिला पॉलीटेक्निक के प्रधानाचार्य राजन सिंह पर शिकंजा कस दिया है। गंभीर वित्तीय अनियमितता से घिरे राजन से वसूली का आदेश दिया गया है। राजन पर सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने ट्वीट कर यह जानकारी साझा की है।
सूत्रों के मुताबिक लखनऊ के राजकीय पॉलीटेक्निक में तैनाती के दौरान राजन पर कॉलेज परिसर स्थित कर्मशालाओं की छतों की चादर की रिपेयरिंग कराने में भ्रष्टाचार का आरोप लगा था। उनके खिलाफ यह शिकायत भी मिली थी कि उन्होंने एक वित्तीय वर्ष में एक ही फर्म के जरिए 8 बार एक ही कार्य कराया। दूसरी फर्म से भी उसी काम को दो बार कराया। इन कामों पर सरकारी खजाने से 9 लाख 13 हजार 51 रुपये खर्च किए गए थे।
प्रारंभिक जांच में उन पर लगे सभी आरोप सही मिलेे। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रधानाचार्य ने वित्तीय नियमों के विपरीत अलग-अलग एक लाख रुपये से कम के बिल-वाउचर बनवाकर भुगतान किया है। जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इसमें टेंडर प्रक्रिया भी नहीं अपनाई गई है। राजन ने व्यय एवं कार्य की प्रशासनिक अनुमति भी सक्षम स्तर से नहीं ली। जांच में रिपोर्ट को मुख्यमंत्री कार्यालय भेजा गया था। इस आधार पर मुख्यमंत्री ने राजन सिंह से पूरी धनराशि वसूलने का निर्देश दिया है।
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सूत्रों के मुताबिक लखनऊ के राजकीय पॉलीटेक्निक में तैनाती के दौरान राजन पर कॉलेज परिसर स्थित कर्मशालाओं की छतों की चादर की रिपेयरिंग कराने में भ्रष्टाचार का आरोप लगा था। उनके खिलाफ यह शिकायत भी मिली थी कि उन्होंने एक वित्तीय वर्ष में एक ही फर्म के जरिए 8 बार एक ही कार्य कराया। दूसरी फर्म से भी उसी काम को दो बार कराया। इन कामों पर सरकारी खजाने से 9 लाख 13 हजार 51 रुपये खर्च किए गए थे।
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प्रारंभिक जांच में उन पर लगे सभी आरोप सही मिलेे। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रधानाचार्य ने वित्तीय नियमों के विपरीत अलग-अलग एक लाख रुपये से कम के बिल-वाउचर बनवाकर भुगतान किया है। जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इसमें टेंडर प्रक्रिया भी नहीं अपनाई गई है। राजन ने व्यय एवं कार्य की प्रशासनिक अनुमति भी सक्षम स्तर से नहीं ली। जांच में रिपोर्ट को मुख्यमंत्री कार्यालय भेजा गया था। इस आधार पर मुख्यमंत्री ने राजन सिंह से पूरी धनराशि वसूलने का निर्देश दिया है।
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