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Lucknow News: बीएलओ ड्यूटी के बहाने स्कूल से गैरहाजिरी पर लगेगी लगाम
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लखनऊ। बीएलओ ड्यूटी के नाम पर सप्ताह में दो दिन स्कूल नहीं पहुंचने वाले शिक्षकों पर अब शिक्षा विभाग ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद बीएसए ने राजधानी के परिषदीय विद्यालयों में बीएलओ ड्यूटी पर लगाए गए करीब 2000 शिक्षकों की नामवार आख्या सभी खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) से चार दिन में मांगी है। साथ ही सोमवार से इन शिक्षकों को रोजाना स्कूल पहुंचकर शिक्षण कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।
दरअसल, बीएलओ ड्यूटी में लगे शिक्षक तहसील स्तर से जारी उप जिलाधिकारी के आदेश का हवाला देकर सप्ताह में दो दिन स्कूल नहीं पहुंच रहे थे। जबकि बीएसए की ओर से पूर्व में जारी दो आदेशों में स्पष्ट किया गया था कि शिक्षण कार्य पूरा करने के बाद ही बीएलओ का काम किया जाएगा। इसके बावजूद शिक्षक एसडीएम के आदेश को प्राथमिकता दे रहे थे। इससे करीब 40 हजार बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी।
अमर उजाला ने 17 और 18 सितंबर के अंक में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक श्याम किशोर तिवारी ने मामले का संज्ञान लिया। उन्होंने बीएसए को शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए और सभी शिक्षकों की नाम सहित आख्या मांगी।
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निर्वाचन का काम नहीं, फिर भी गैरहाजिरी तो देनी होगी सूचना
शनिवार को बीएसए ने सभी बीईओ को पत्र जारी कर चार दिन में आख्या उपलब्ध कराने को कहा है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान में निर्वाचन से संबंधित कोई भी काम नहीं है। इसके बावजूद जो शिक्षक बीएलओ ड्यूटी का हवाला देकर स्कूल नहीं पहुंच रहे हैं, उनकी सूचना भी उपलब्ध कराई जाए।
कोट
वर्तमान समय में परिषदीय विद्यालयों में निपुण आकलन, नवोदय विद्यालय में प्रवेश परीक्षा की तैयारी और राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा जैसी महत्वपूर्ण विभागीय गतिविधियां संचालित हो रही हैं। शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि पठन-पाठन और शैक्षणिक कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही न करें। आगे भी निर्वाचन संबंधी कार्य आता है तो शिक्षण कार्य के बाद ही उसे करना होगा। - विपिन कुमार, बीएसए
शिक्षक संघ ने भी उठाए ड्यूटी लगाने की प्रक्रिया पर सवालशिक्षक वाली खबर में वर्जन जोड़
स्कूल रोजाना सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक संचालित होता है। ऐसे में शिक्षक आधा समय स्कूल में दें और आधे समय में बीएलओ या निर्वाचन संबंधी कार्य कर सकता है। क्योंकि समय-समय पर वह भी जरूरी है। पर कई शिक्षक स्कूल न आने के लिए खुद से भी बीएलओ ड्यूटी लगवा लेते हैं। यदि वही शिक्षक की ड्यूटी बीएलओ कार्य के लिए लगे जिसका नाम बीएसए की ओर से दिया जाए तो पढ़ाई भी प्रभावित नहीं होगी और काम भी हो जाएगा।
- वीरेंद्र सिंह, वरिष्ठ शिक्षक व जिला मंत्री प्राथमिक शिक्षक संघ
निर्वाचन या बीएलओ ड्यूटी के लिए सूची पहले बीएसए की ओर से जानी चाहिए। कई शिक्षक सीधे अपनी ड्यूटी लगवा लेते हैं और सूची बाद में विभाग के पास आती है। इससे बीएसए और बीईओ भी कुछ नहीं कर पाते।
- शुधांशु मोहन, जिलाध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक संघ
लखनऊ में कई ऐसे विद्यालय हैं जहां के शिक्षक पांच-पांच साल से बीएलओ ड्यूटी कर रहे हैं। एसडीएम के अग्रिम आदेश के आधार पर वे सप्ताह में दो दिन स्कूल भी नहीं आते हैं।
- आशुतोष मिश्रा, प्रांतीय महामंत्री, प्राथमिक शिक्षक स्नातक एसोसिएशन
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दरअसल, बीएलओ ड्यूटी में लगे शिक्षक तहसील स्तर से जारी उप जिलाधिकारी के आदेश का हवाला देकर सप्ताह में दो दिन स्कूल नहीं पहुंच रहे थे। जबकि बीएसए की ओर से पूर्व में जारी दो आदेशों में स्पष्ट किया गया था कि शिक्षण कार्य पूरा करने के बाद ही बीएलओ का काम किया जाएगा। इसके बावजूद शिक्षक एसडीएम के आदेश को प्राथमिकता दे रहे थे। इससे करीब 40 हजार बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी।
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अमर उजाला ने 17 और 18 सितंबर के अंक में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक श्याम किशोर तिवारी ने मामले का संज्ञान लिया। उन्होंने बीएसए को शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए और सभी शिक्षकों की नाम सहित आख्या मांगी।
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निर्वाचन का काम नहीं, फिर भी गैरहाजिरी तो देनी होगी सूचना
शनिवार को बीएसए ने सभी बीईओ को पत्र जारी कर चार दिन में आख्या उपलब्ध कराने को कहा है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान में निर्वाचन से संबंधित कोई भी काम नहीं है। इसके बावजूद जो शिक्षक बीएलओ ड्यूटी का हवाला देकर स्कूल नहीं पहुंच रहे हैं, उनकी सूचना भी उपलब्ध कराई जाए।
कोट
वर्तमान समय में परिषदीय विद्यालयों में निपुण आकलन, नवोदय विद्यालय में प्रवेश परीक्षा की तैयारी और राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा जैसी महत्वपूर्ण विभागीय गतिविधियां संचालित हो रही हैं। शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि पठन-पाठन और शैक्षणिक कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही न करें। आगे भी निर्वाचन संबंधी कार्य आता है तो शिक्षण कार्य के बाद ही उसे करना होगा। - विपिन कुमार, बीएसए
शिक्षक संघ ने भी उठाए ड्यूटी लगाने की प्रक्रिया पर सवालशिक्षक वाली खबर में वर्जन जोड़
स्कूल रोजाना सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक संचालित होता है। ऐसे में शिक्षक आधा समय स्कूल में दें और आधे समय में बीएलओ या निर्वाचन संबंधी कार्य कर सकता है। क्योंकि समय-समय पर वह भी जरूरी है। पर कई शिक्षक स्कूल न आने के लिए खुद से भी बीएलओ ड्यूटी लगवा लेते हैं। यदि वही शिक्षक की ड्यूटी बीएलओ कार्य के लिए लगे जिसका नाम बीएसए की ओर से दिया जाए तो पढ़ाई भी प्रभावित नहीं होगी और काम भी हो जाएगा।
- वीरेंद्र सिंह, वरिष्ठ शिक्षक व जिला मंत्री प्राथमिक शिक्षक संघ
निर्वाचन या बीएलओ ड्यूटी के लिए सूची पहले बीएसए की ओर से जानी चाहिए। कई शिक्षक सीधे अपनी ड्यूटी लगवा लेते हैं और सूची बाद में विभाग के पास आती है। इससे बीएसए और बीईओ भी कुछ नहीं कर पाते।
- शुधांशु मोहन, जिलाध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक संघ
लखनऊ में कई ऐसे विद्यालय हैं जहां के शिक्षक पांच-पांच साल से बीएलओ ड्यूटी कर रहे हैं। एसडीएम के अग्रिम आदेश के आधार पर वे सप्ताह में दो दिन स्कूल भी नहीं आते हैं।
- आशुतोष मिश्रा, प्रांतीय महामंत्री, प्राथमिक शिक्षक स्नातक एसोसिएशन