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आधार बनवाने के लिए लगाया अंगूठा तो छह साल बाद मिला बच्ची के घर का पता
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अतुल भारद्वाज
वर्ष 2016 में लखीमपुर निवासी आठ साल की रोशनी सीतापुर स्टेशन पर मां से बिछड़ गई। वहां के अनाथालय से कुछ समय बाद उसे लखनऊ के मोतीनगर स्थित बालगृह (बालिका) भेज दिया गया। इस साल बच्ची का आधार कार्ड बनवाने की प्रक्रिया के दौरान मिले पते ने उसे छह साल बाद अपने घर पहुंचा दिया। भावुक कर देने वाली इस घटना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिल को भी छुआ। गांधीनगर में चार जुलाई को डिजिटल इंडिया वीक कार्यक्रम के तहत आयोजित प्रदर्शनी में पीएम ने बच्ची से उसकी दास्तां सुनी। इसके बाद उन्होंने मंच से इस घटना व डिजिटल इंडिया की मदद से आ रहे बदलाव को साझा भी किया।
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय के उप महानिदेशक प्रशांत सिंह ने बताया कि रोशनी को पुलिस और समाजसेवी संस्था काफी प्रयास पर भी परिवार तक नहीं पहुंचा सके। काउंसलर ने भी जानकारी लेने का प्रयास किया, लेकिन बच्ची से घर का पता नहीं चल सका। इसके बाद उसे लखनऊ के बालगृह भेज दिया गया। यहां दिसंबर 2021 में पढ़ाई की जरूरत को देखते हुए बालगृह ने यूआईडीएआई से आधार कार्ड बनाने का शिविर लगाने की मांग की। फरवरी 2022 में लगे कैंप में कई प्रयासों के बाद भी रोशनी का आधार नहीं बन पा रहा था। अंगूठा लगाने पर ऑनलाइन सिस्टम बार-बार पहले से उसके बायोमीट्रिक का इस्तेमाल कर आधार बने होने का मैसेज दे रहा था। इस पर कार्यालय में मौजूद डाटा सर्वर से आधार कार्ड बनने की पूरी जानकारी ली गई। इसमें पता चला कि रोशनी का आधार वर्ष 2015 में लखीमपुर खीरी के गांव लंदनपुर ग्रांट, पोस्ट लीलापुर, तहसील गोला के पते पर बना था। पुलिस की मदद से इस पर संपर्क किया तो पता चला कि यहां रोशनी के चाचा राजेश कुमार रहते हैं। इसके बाद उन्हें बच्ची सौंप दी गई। रोशनी के पिता सुरेंद्र कुमार की साल 2016 में ही मौत हो गई थी। इसके बाद मां उसे लेकर बिहार अपने घर लौट रही थी। रास्ते में सीतापुर में रोशनी मां से बिछड़ गई। राजेश रोशनी की मां के बारे में जानकारी नहीं दे सके।
ढाई मिनट तक पीएम ने की रोशनी से बात
यूआईडीएआई के अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल इंडिया वीक में प्रधानमंत्री करीब 25 मिनट रहे। बच्ची की कहानी सुनने के बाद वह करीब छह मिनट तक आधार के शिविर पर ही रहे। इस दौरान उन्होंने ढाई मिनट तक बच्ची से ही बात की। उसकी पूरी कहानी सुनकर पीएम भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि यह तकनीक का सबसे भावुक पहलू है। उन्होंने रोशनी के सुखद भविष्य की कामना भी की।
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आधार की मदद से 85 बच्चे मिल चुके
उप महानिदेशक प्रशांत सिंह का कहना है कि बीते चार सालों में आधार की मदद से 85 बच्चों को घर पहुंचाया जा चुका है। इस दौरान पांच साल से छोटे बच्चों को उनके माता-पिता के नाम और घर की लोकेशन के जरिये तलाशा गया। प्रयास है कि ज्यादा से ज्यादा बच्चों के आधार कार्ड बन जाएं।
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वर्ष 2016 में लखीमपुर निवासी आठ साल की रोशनी सीतापुर स्टेशन पर मां से बिछड़ गई। वहां के अनाथालय से कुछ समय बाद उसे लखनऊ के मोतीनगर स्थित बालगृह (बालिका) भेज दिया गया। इस साल बच्ची का आधार कार्ड बनवाने की प्रक्रिया के दौरान मिले पते ने उसे छह साल बाद अपने घर पहुंचा दिया। भावुक कर देने वाली इस घटना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिल को भी छुआ। गांधीनगर में चार जुलाई को डिजिटल इंडिया वीक कार्यक्रम के तहत आयोजित प्रदर्शनी में पीएम ने बच्ची से उसकी दास्तां सुनी। इसके बाद उन्होंने मंच से इस घटना व डिजिटल इंडिया की मदद से आ रहे बदलाव को साझा भी किया।
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय के उप महानिदेशक प्रशांत सिंह ने बताया कि रोशनी को पुलिस और समाजसेवी संस्था काफी प्रयास पर भी परिवार तक नहीं पहुंचा सके। काउंसलर ने भी जानकारी लेने का प्रयास किया, लेकिन बच्ची से घर का पता नहीं चल सका। इसके बाद उसे लखनऊ के बालगृह भेज दिया गया। यहां दिसंबर 2021 में पढ़ाई की जरूरत को देखते हुए बालगृह ने यूआईडीएआई से आधार कार्ड बनाने का शिविर लगाने की मांग की। फरवरी 2022 में लगे कैंप में कई प्रयासों के बाद भी रोशनी का आधार नहीं बन पा रहा था। अंगूठा लगाने पर ऑनलाइन सिस्टम बार-बार पहले से उसके बायोमीट्रिक का इस्तेमाल कर आधार बने होने का मैसेज दे रहा था। इस पर कार्यालय में मौजूद डाटा सर्वर से आधार कार्ड बनने की पूरी जानकारी ली गई। इसमें पता चला कि रोशनी का आधार वर्ष 2015 में लखीमपुर खीरी के गांव लंदनपुर ग्रांट, पोस्ट लीलापुर, तहसील गोला के पते पर बना था। पुलिस की मदद से इस पर संपर्क किया तो पता चला कि यहां रोशनी के चाचा राजेश कुमार रहते हैं। इसके बाद उन्हें बच्ची सौंप दी गई। रोशनी के पिता सुरेंद्र कुमार की साल 2016 में ही मौत हो गई थी। इसके बाद मां उसे लेकर बिहार अपने घर लौट रही थी। रास्ते में सीतापुर में रोशनी मां से बिछड़ गई। राजेश रोशनी की मां के बारे में जानकारी नहीं दे सके।
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ढाई मिनट तक पीएम ने की रोशनी से बात
यूआईडीएआई के अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल इंडिया वीक में प्रधानमंत्री करीब 25 मिनट रहे। बच्ची की कहानी सुनने के बाद वह करीब छह मिनट तक आधार के शिविर पर ही रहे। इस दौरान उन्होंने ढाई मिनट तक बच्ची से ही बात की। उसकी पूरी कहानी सुनकर पीएम भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि यह तकनीक का सबसे भावुक पहलू है। उन्होंने रोशनी के सुखद भविष्य की कामना भी की।
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आधार की मदद से 85 बच्चे मिल चुके
उप महानिदेशक प्रशांत सिंह का कहना है कि बीते चार सालों में आधार की मदद से 85 बच्चों को घर पहुंचाया जा चुका है। इस दौरान पांच साल से छोटे बच्चों को उनके माता-पिता के नाम और घर की लोकेशन के जरिये तलाशा गया। प्रयास है कि ज्यादा से ज्यादा बच्चों के आधार कार्ड बन जाएं।