लखनऊ। बाल संग्रहालय चारबाग में रविवार को चेतना साहित्य परिषद की ओर से काव्य संध्या का आयोजन किया गया। शुरुआत डॉ. शिव भजन कमलेश एवं प्रमोद द्विवेदी प्रमोद ने सरस्वती वंदना से की। खुशी राम बाजपेई ने कागा जैसे हो गए हम सब के अब बोल, कद्दू लंबे हो गए, लौकी हो गई गोल पर सभी को हंसाकर लोटपाेट कर दिया। केशव बिना पार्थ की शानदार रचना पर जमकर तालियां बजी। डॉ. दिनेश चंद्र अवस्थी और जगदीश शुक्ल ने छंद पर वाहवाही लूटी। रश्मि शरद ने सावन गीत से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर कवि अरविंद झा, वरिष्ठ कवि रमाशंकर सिंह, राजकिशोर नमन, अटल नारायण, राजीव वत्सल, चेतराम अज्ञानी, पं. शारदा प्रसाद शर्मा शारदेदुं आदि लोग माैजूद रहे।