अजीबोगरीब मामला: 21 साल तक पेट में धड़कता रहा दिल
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पेट में दिल के धड़कने की बात क्या आपने सुनी है? मऊ निवासी 26 वर्षीय युवक सुभाष का दिल 21 साल से पेट में धड़क रहा था। जबकि आंत का कुछ हिस्सा सीने में पहुंच गया था।
यह सब हुआ था सुभाष पर पांच साल की उम्र में दीवार गिरने की वजह से। चोट की वजह से दिल और फेफड़ों को पेट से अलग करने वाली दीवार यानी डायाफ्राम फट गया था। दिक्कत बढ़ने पर डॉक्टर उसका टीबी का इलाज करते रहे।
केजीएमयू के सर्जन डॉ. सुरेश कुमार और उनकी टीम ने उसका ऑपरेशन कर दिल और आंतों को अपने स्थान पर पहुंचाया। केजीएमयू में पहली बार इस तरह का मामला सामने आया।
डॉक्टरों ने किया गलत डॉयग्नोज और करते रहे इलाज
डॉ. सुरेश कुमार के मुताबिक सुभाष को सांस लेने में दिक्कत होती, चक्कर आता और पेट खराब की समस्या रहती। उसका वजह नहीं बढ़ रहा था। भीड़ में जाने से वह घबराता। डॉक्टरों को दिखाया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
एक डॉक्टर ने 2009 में उसकी समस्या को टीबी के रूप में गलत डायग्नोज किया और उसे 90 दिनों तक स्ट्रेप्टोमायसिन इंजेक्शन लगाए। इसके बाद एक अन्य चिकित्सक ने भी उसे गलत डायग्नोज किया और टीबी का इलाज किया।
फट गया था डायाफ्राम
कुछ महीने पहले सुभाष आजमगढ़ मेडिकल कॉलेज पहुंचा जहां एक्स-रे के बाद उसे फिर टीबी का इलाज देने को कहा गया। जब सुभाष ने बताया कि पहले ही उसे दो बार टीबी का इलाज दिया जा चुका है तब उसका सीटी स्कैन कराया गया। इसके बाद पता चला कि उसका डायाफ्राम दो जगह फटा हुआ है। इसके बाद उसे केजीएमयू रेफर कर दिया गया।
इस तरह की गई सर्जरी
सभी जांचें कराने के बाद 12 अप्रैल को सुभाष की सर्जरी का फैसला किया गया। सुभाष की सर्जरी में सबसे बड़ी दिक्कत उसका कमजोर होना था। उसका वजन महज 35 किलोग्राम था।
दिल का निचला हिस्सा (लगभग एक तिहाई) डायाफ्राम के छेद से नीचे की ओर आ गया था। छोटी और बड़ी आंत दोनों को मिलाकर लगभग 60 मीटर हिस्सा सीने की तरफ ऊपर खिसक गया था। छोटी और बड़ी आंत दोनों लगभग 45-45 मीटर की होती हैं। इसके अलावा तिल्ली भी ऊपर चढ़ गई थी।
इसमें से धड़कते दिल को सही स्थिति में पहुंचाना बड़ी चुनौती थी। 10 सेंटीमीटर का चीरा लगाकर पेट को खोला गया। डायाफ्राम के हुए एक छेद से दिल को सही स्थान पर पहुंचाकर उसे बंद किया गया।
इसके बाद पेट के अंगों को पेट में लाकर डायाफ्राम के दूसरे छेद को भी बंदकर दिया गया। इसमें चार घंटे लग गए सर्जरी के बाद अब सुभाष पूरी तरह से ठीक है। उसे जल्द डिस्चार्ज किया जाएगा।
इस टीम ने की सर्जरी
सर्जन डॉ. सुरेश कुमार, डॉ. संजीव कुमार, डॉ. सौरभ सिंह, डॉ. शाकिब अंसारी और डॉ. नवनीत मिश्रा, एनेस्थीसिया से डॉ. दिनेश सिह और डॉ. विकास।