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आजादी मिलने तक 26 जनवरी को स्वतंत्रता दिवस क्यों मनाती रही कांग्रेस, पढ़ें एक संस्मरण
अखिलेश वाजपेयी/ अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 03 Nov 2018 03:33 PM IST
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किशोरी दास वाजपेयी
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आचार्य किशोरीदास वाजपेयी साहित्यकार के साथ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी थे। कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में 31 दिसंबर 1929 को जवाहर लाल नेहरू ने पूर्ण स्वराज्य की मांग उठाई और देश का झंडा फहराया। साथ ही कांग्रेस ने प्रस्ताव पारित किया कि 26 जनवरी 1930 को पहला 'स्वतंत्रता दिवस' मनाया जाए। तब से आजादी मिलने तक कांग्रेस हर वर्ष 26 जनवरी को स्वतंत्रता दिवस मनाती रही। अब यह गणतंत्र दिवस है।
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एक वर्ष बाद सन 1931 का स्वतंत्रता दिवस आने वाला था। डॉ. योगेंद्र नाथ शर्मा 'अरुण' के संस्मरण से पता चलता है, कांग्रेस की तैयारी उस दिन सभी जगह स्वतंत्रता दिवस मनाते हुए वहीं प्रतिज्ञा दोहराने की थी, पर अंग्रेजों ने जगह-जगह छापे डलवाकर प्रतिज्ञा की प्रतियां जब्त करा ली।
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कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई को भी प्रतियों की जरूरत थी। आगरा में 'सैनिक' अखबार निकालने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी डॉ. कृष्णदत्त पालीवाल ने अंग्रेजों से छिपाकर अपने प्रेस में रातों रात इस प्रतिज्ञा की 500 प्रतियां छापी, पर अब समस्या इन प्रतियों को लखनऊ पहुंचाने की थी।
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प्रतियों को आगरा पहुंचाने की ली जिम्मेदारी
आचार्य उन दिनों आगरा में थे और उन्होंने प्रतियों को आगरा पहुंचाने की जिम्मेदारी ली। पत्नी गर्भवती और ढाई वर्ष का पुत्र, पर वाजपेयी को तो धुन चढ़ी थी।
उन्होंने प्रतियां ली और अंग्रेजों के गुप्तचरों की आंखों में धूल झोंककर प्रतियों को लखनऊ पहुंचाया। अंग्रेज तब चौंक उठे जब 26 जनवरी को लखनऊ में जगह-जगह पूर्ण स्वराज्य की प्रतिज्ञा के शब्द गूंजने लगे।
उन्होंने प्रतियां ली और अंग्रेजों के गुप्तचरों की आंखों में धूल झोंककर प्रतियों को लखनऊ पहुंचाया। अंग्रेज तब चौंक उठे जब 26 जनवरी को लखनऊ में जगह-जगह पूर्ण स्वराज्य की प्रतिज्ञा के शब्द गूंजने लगे।