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आम महोत्सव का अजब नजारा : 50 ग्राम का अंगूरदाना, 5 किलो का गजानन
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लाल सिंदूरी आम।
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लखनऊ। चारों ओर आम की खुशबू, रंग-बिरंगे फलों से सजे स्टॉल और मोबाइल से आमों की कई किस्मों के साथ सेल्फी लेते लोगों की भीड़। यह नजारा था इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में शुक्रवार को शुरू हुए आम महोत्सव का। तीन दिवसीय आम के इस महोत्सव का शुभारंभ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया।
मलिहाबाद निवासी आम उत्पादक उपेंद्र कुमार सिंह के स्टॉल पर महज 50 ग्राम वजन वाला अंगूरदाना और चार से पांच किलो तक के वजन वाला विशाल गजानन आम लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा। छोटे से अंगूरदाना को हथेली पर रखकर और गजानन को दोनों हाथों से उठाकर लोग तस्वीरें खिंचवाते नजर आए। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक यह देखकर हैरान थे कि आम के आकार में इतना बड़ा अंतर भी हो सकता है।
महोत्सव के पहले दिन सबसे ज्यादा उत्सुकता दो नई किस्मों कृष्ण और लाल सुंदरी को लेकर दिखाई दी। हर दूसरा व्यक्ति इनके बारे में पूछ रहा था और इनके साथ तस्वीरें खिंचवा रहा था। प्रदर्शनी में मौजूद आलमबाग निवासी आम उत्पादक एससी शुक्ला के स्टॉल पर लोगों की भीड़ लगातार बनी रही। उन्होंने बताया कि आम का रंग सांवला होने के कारण इसका नाम कृष्ण रखा गया है। वहीं लाल सुंदरी अपनी बारहमासी विशेषता, लाल रंग के कारण लोगों को चौंका रही है। जैसे ही लोग यह सुनते कि यह तीन बार फल देने वाली प्रजाति है, वे इसे करीब से देखने और उसकी तस्वीर अपने मोबाइल में कैद करने लगते।
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प्रदर्शनी में दसहरी, लंगड़ा, चौसा के अलावा नेहाल पसंद, अरुणिका, वनराज, नीलम, मिठास कुंज, लंगड़ा अनारी समेत 800 से अधिक प्रजातियां सजी हैं। हर स्टॉल पर बागवान अपने-अपने आम की खासियत बताते रहे और आगंतुक स्वाद, रंग, खुशबू, उत्पादन और खेती की तकनीक के बारे में जानकारी लेते रहे। कई किसान नोटबुक में जानकारी लिखते दिखे तो युवा मोबाइल में वीडियो बनाकर नई किस्मों को रिकॉर्ड करते नजर आए।
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मलिहाबाद निवासी आम उत्पादक उपेंद्र कुमार सिंह के स्टॉल पर महज 50 ग्राम वजन वाला अंगूरदाना और चार से पांच किलो तक के वजन वाला विशाल गजानन आम लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा। छोटे से अंगूरदाना को हथेली पर रखकर और गजानन को दोनों हाथों से उठाकर लोग तस्वीरें खिंचवाते नजर आए। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक यह देखकर हैरान थे कि आम के आकार में इतना बड़ा अंतर भी हो सकता है।
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महोत्सव के पहले दिन सबसे ज्यादा उत्सुकता दो नई किस्मों कृष्ण और लाल सुंदरी को लेकर दिखाई दी। हर दूसरा व्यक्ति इनके बारे में पूछ रहा था और इनके साथ तस्वीरें खिंचवा रहा था। प्रदर्शनी में मौजूद आलमबाग निवासी आम उत्पादक एससी शुक्ला के स्टॉल पर लोगों की भीड़ लगातार बनी रही। उन्होंने बताया कि आम का रंग सांवला होने के कारण इसका नाम कृष्ण रखा गया है। वहीं लाल सुंदरी अपनी बारहमासी विशेषता, लाल रंग के कारण लोगों को चौंका रही है। जैसे ही लोग यह सुनते कि यह तीन बार फल देने वाली प्रजाति है, वे इसे करीब से देखने और उसकी तस्वीर अपने मोबाइल में कैद करने लगते।
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प्रदर्शनी में दसहरी, लंगड़ा, चौसा के अलावा नेहाल पसंद, अरुणिका, वनराज, नीलम, मिठास कुंज, लंगड़ा अनारी समेत 800 से अधिक प्रजातियां सजी हैं। हर स्टॉल पर बागवान अपने-अपने आम की खासियत बताते रहे और आगंतुक स्वाद, रंग, खुशबू, उत्पादन और खेती की तकनीक के बारे में जानकारी लेते रहे। कई किसान नोटबुक में जानकारी लिखते दिखे तो युवा मोबाइल में वीडियो बनाकर नई किस्मों को रिकॉर्ड करते नजर आए।