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आशियाना रेप पीड़िता बोली, ‘अपराध बड़ों जैसे, फिर बच्चे कैसे’

Wed, 23 Dec 2015 01:26 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 23 Dec 2015 01:26 AM IST
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A rape victim speaks about juvenile act.

साढ़े दस साल से इंसाफ की लड़ाई लड़ रही लखनऊ के आशियाना दुराचार कांड की पीड़िता ने जुवेनाइल जस्टिस बिल-2015 पास होने को समाज के लिए राहत भरा कदम बताया है। इस बिल में 16 से अधिक उम्र के किशोरों को जघन्य अपराध पर नाबालिग मानकर सजा दिए जाने का प्रावधान है।

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मंगलवार को ‘अमर उजाला’ से बातचीत में आशियाना पीड़िता ने सवाल किया कि जब ऐसे लोग कम उम्र में बड़ों जैसा अपराध करते हैं तो फिर वे बच्चे कैसे हुए? उन्हें तो वही सजा होनी चाहिए जो किसी वयस्क को होती है।
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पीड़िता ने कहा कि किसी अपराधी को केवल इसलिए नहीं छोड़ा जा सकता कि उसकी उम्र कम है। इससे यह सोच विकसित होगी कि वे जो चाहे सो कर सकते हैं क्योंकि सिर्फ तीन साल बच्चों के सुधार गृह में रहकर वे छूट जाएंगे। इसी सोच को खत्म करने की जरूरत है।
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निर्भया के गुनहगार को छोड़ना इंसाफ नहीं
आशियाना पीड़िता ने कहा कि निर्भया के गुनहगार को सिर्फ तीन वर्ष में छोड़ा जाना निराशाजनक है। यह इंसाफ नहीं है। यह कानून पहले ही पास हो गया होता वह उसे भी गंभीर सजा मिलती। कई अपराधी पुराने कानून में फायदा लेने की कोशिश कर रहे थे। खुद मेरे और मेरे जैसे हर साल होने वाली ऐसी घटनाओं पर भी सबक नहीं लिया गया। कानून तब बदला जब नागरिकों ने सड़क पर उतरकर विरोध किया।

उम्र नहीं अपराध से तय हो सजा

A rape victim speaks about juvenile act.

अपने मामले के परिप्रेक्ष्य में उसने कहा कि मुख्य आरोपी गौरव शुक्ला ने उसके साथ जो किया वह किसी बच्चे का दिमाग सोच भी नहीं सकता। पर खुद को नाबालिग बताकर वह साढ़े 10 साल से कानून की आंखों में धूल झोंक रहा है। दरअसल जो व्यक्ति जैसा अपराध करता है उसकी सजा भी वैसी ही होनी चाहिए। उम्र नहीं, अपराध को देखकर सजा तय होनी चाहिए।

अपराधियों के हौसले पस्त होंगे
पीड़िता ने कहा कि नए बिल से सैकड़ों पीड़िताओं को आशियाना कांड की तरह कानूनी संघर्ष से नहीं जूझना पड़ेगा। इस कानून से अपराध करने की बात सोचने वालों के हौसले पस्त होंगे।

नाबालिग दुराचारियों में 70 प्रतिशत 16 से 18 वर्ष के
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार 2014 में दुराचार के 2144 मामलों में नाबालिग शामिल रहे। इसमें 656 आरोपी 16 या उससे कम उम्र थे। जबकि, 1488 मामलों में 16 से 18 वर्ष उम्र के किशोर शामिल थे। यानी, दुराचार के 69.40 प्रतिशत मामलों में 16 या उससे अधिक उम्र के किशोर आरोपी बने।

यूपी: अपराधों में शामिल नाबालिग
76 हत्या
176 दुराचार
27 गैर इरादतन हत्या
23 हत्या की कोशिश
260 अपहरण के मामले
34 डकैती और लूट

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